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अंतराराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के लिए:90 के पार पर जोश 20 जैसा
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बुजुर्ग मोती सिंह मेहता।
- फोटो : LOHAGHAT
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बाराकोट विकासखंड के रेगड़ू गांव के मोती सिंह मेहता की उम्र भले ही 91 साल है लेकिन अब भी वे हर रोज तीन किमी सैर करते हैं। हर व्यसन से दूर होने के चलते उनकी फिटनेस बेहद उम्दा है।
जानकीधार जूनियर हाईस्कूल से रिटायर्ड प्रधानाध्यापक मेहता ने प्रधान रहते हुए अपनी ग्राम पंचायत को आदर्श दर्जा दिया तो समाज सेवा में भी वे लोगों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
1988 में प्रधानाध्यापक पद से रिटायर मोती सिंह मेहता (91) इस उम्र में भी नौनिहालों और युवाओं को शिक्षण, भविष्य निर्माण और फिटनेस की सीख दे रहे हैं। हर रोज तीन किमी की सैर करने के साथ नियमित रूप से योग करते हैं।
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करीब पांच माह पूर्व तक वह रेगड़ू गांव में खेती में भी हाथ बंटाते थे। गांव के विकास के लिए आवाज उठाना, रामलीला व अन्य सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर शिरकत करते रहे हैं लेकिन पांच माह पहले पत्नी के निधन के बाद वे अपने प्रधानाध्यापक बेटे और योगाचार्य लक्ष्मण सिंह मेहता के साथ आकर रहने लगे।
91 साल के मोती सिंह मेहता कहते हैं नियमित दिनचर्या, अनुशासन, काम के प्रति ईमानदारी, संयम और संतुलित खानपान ने उन्हें दवाओं से दूर रखा है। उनसे सीख लेने वाले युवा बताते हैं कि वे अपने अनुभव और ज्ञान से उनमें ऊर्जा भरते हैं।
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जानकीधार जूनियर हाईस्कूल से रिटायर्ड प्रधानाध्यापक मेहता ने प्रधान रहते हुए अपनी ग्राम पंचायत को आदर्श दर्जा दिया तो समाज सेवा में भी वे लोगों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
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1988 में प्रधानाध्यापक पद से रिटायर मोती सिंह मेहता (91) इस उम्र में भी नौनिहालों और युवाओं को शिक्षण, भविष्य निर्माण और फिटनेस की सीख दे रहे हैं। हर रोज तीन किमी की सैर करने के साथ नियमित रूप से योग करते हैं।
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करीब पांच माह पूर्व तक वह रेगड़ू गांव में खेती में भी हाथ बंटाते थे। गांव के विकास के लिए आवाज उठाना, रामलीला व अन्य सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर शिरकत करते रहे हैं लेकिन पांच माह पहले पत्नी के निधन के बाद वे अपने प्रधानाध्यापक बेटे और योगाचार्य लक्ष्मण सिंह मेहता के साथ आकर रहने लगे।
91 साल के मोती सिंह मेहता कहते हैं नियमित दिनचर्या, अनुशासन, काम के प्रति ईमानदारी, संयम और संतुलित खानपान ने उन्हें दवाओं से दूर रखा है। उनसे सीख लेने वाले युवा बताते हैं कि वे अपने अनुभव और ज्ञान से उनमें ऊर्जा भरते हैं।