फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Rural Devlopment in Majhganv

कई समस्याओं से जूझ रहा है खेती के लिए प्रसिद्ध मझगांव

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 12:54 AM IST
विज्ञापन
Rural Devlopment in Majhganv
बनबसा के मझगांव में लहलहाती खेती।संवाद - फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। क्षेत्र का दूरस्थ मझगांव आजादी के करीब 7.5 दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। नेपाल की अंतरराष्ट्रीय और ऊधमसिंह नगर जिले की सीमा से सटे इस गांव के निवासी इस सदी में भी आदिवासियों सा जीवन जीने के लिए विवश हैं जबकि देवीपुरा ग्राम पंचायत के इस तोक में रहने वाले 300 परिवारों में करीब 900 मतदाता पंजीकृत हैं।
विज्ञापन

क्षेत्र का खेती संपन्न मझगांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। भूमि का मालिकाना हक न होने से लोग कई सरकारी योजनाओं समेत बैंक ऋण से भी वंचित हैं। बुजुर्ग ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1930-32 के आसपास यह गांव थारू जनजाति के लोगों का था, जिसे वे मझगई के नाम से पुकारते थे, जो बाद में मझगांव बन गया।
विज्ञापन

वर्ष 1940 के आसपास लोहाघाट, चंपावत क्षेत्रों से लोग जाड़ों में अपने मवेशी लेकर यहां घाम तापने (धूप सेंकने) आते थे। ग्रीष्मकाल में वे पहाड़ों की ओर लौट जाते थे। वर्ष 1960 के आसपास ग्रामीणों ने यहां स्थायी तौर पर बसना शुरू किया। प्रधान दीपक प्रकाश चंद ने बताया कि भूमि का मालिकाना हक न होने से मझगांव के ग्रामीण आवास, शौचालय, संपर्क मार्ग, सिंचाई गूल आदि से वंचित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जंगली जानवरों के आतंक से त्रस्त हैं ग्रामीण
बनबसा (चंपावत)। नेपाल सीमा से सटे मझगांव को जंगली जानवरों के आतंक से जूझना पड़ता है। फसलों के नुकसान के साथ ही जंगली जानवर मवेशियों को मारते रहते हैं। भूस्वामित्व के अभाव में ग्रामीण उत्पादित अनाज सरकारी क्रय केंद्रों में नहीं बेच पाते हैं। उन्हें अपना अनाज बिचौलियों को सस्ते में देना पड़ता है। बैंक ऋण न मिलने से ग्रामीण कारोबार एवं शिक्षा ऋण से वंचित हैं। खेती के लिहाज से क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव होते हुए भी कृषि और उद्यान विभाग ने यहां जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर नहीं लगाया है।
काबिज वन भूमि पर मालिकाना हक न होने से ग्रामीण परेशान
बनबसा (चंपावत)। मझगांव वासी 85 वर्षीय रामी चंद बताते हैं कि गांव में संपर्क मार्गों की जरूरत है। करीब 80 वर्षीय शांति देवी का कहना है कि गांव में कई परिवार शौचालयों से वंचित हैं। पूर्व उपप्रधान कमला उप्रेती गांव में आवासीय अनुदान न मिल पाने की समस्या बताती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पठक के मुताबिक काबिज वन भूमि पर मालिकाना हक न होने से ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

नियमानुसार वन या सरकारी भूमि पर मालिकाना हक न होने से लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। सरकारी जमीनों पर ऐसी भूमि पर रहने को अतिक्रमण माना जाता है। इसके लिए ग्रामीणों को पहने भूमि का मालिकाना हक लेना होगा।
- हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम टनकपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed