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Champawat News: नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक से प्राकृतिक खेती पर शोध कार्य शुरू
Sat, 15 Feb 2025 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 15 Feb 2025 11:27 PM IST
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चंपावत। जिले में कृषि विज्ञान केंद्र नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक से प्राकृतिक खेत को फिर चलन में लाने का प्रयास करेगा। इसकी शुरुआत कर दी है। शोध सफल होने के बाद केंद्र किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेगा। शोध सफल होगा तो निश्चित तौर पर यह प्राकृतिक खेती नया दौर होगा। केंद्र ने नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक के निर्माण कर प्राकृतिक खेती पर शोध काम शुरू कर दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र ने प्याज, मटर, बीन, पालक, मैथी, मक्का आदि ब्लॉक में लगाई हैं। इनका उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उत्पादन किया जाएगा। इन सब्जियों के उत्पादन के लिए जीवामृत, गोबर की खाद का उपयोग किया जाएगा। हर 15 दिन में खेतों में जीवामृत और गोबर की खाद डाली जाएगी। नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। उन्हें बताया कि शोध के बाद सफलता मिलेगा तो किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र के वैज्ञानिक और एक किसान मास्टर ट्रेनर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ाने का काम करेगा। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डॉ. दीपाली तिवारी ने प्रथम चरण में केंद्र में नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक के माध्यम से प्राकृतिक खेती के लिए शोध कार्य शुरू कर दिया है। प्राकृतिक खेती सदियों पुरानी है। इसके लिए स्कूली बच्चों को भी जागरूक को भी इसके बारे में जागरूक किया जाएगा।
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निराई और गुड़ाई से होगा उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक में निराई गुड़ाई प्राकृतिक तरीके से की जा रही है। आधुनिक तौर पर फार्मिंग ब्लॉक में कोई चीज इस्तेमाल नहीं की जाएगी। न ही किसी प्रकार का केमिकल डाला जाएगा। इससे उवर्रक क्षमता का भी पता चलेगा। वर्तमान में पहले चरण में शुरुआत हो गई है। अगर यह शोध सफल होता है तो केंद्र इसे बड़े स्तर पर किसानों के साथ मिलकर करेगा।
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निराई और गुड़ाई से होगा उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट नेचुरल फार्मिंग ब्लॉक में निराई गुड़ाई प्राकृतिक तरीके से की जा रही है। आधुनिक तौर पर फार्मिंग ब्लॉक में कोई चीज इस्तेमाल नहीं की जाएगी। न ही किसी प्रकार का केमिकल डाला जाएगा। इससे उवर्रक क्षमता का भी पता चलेगा। वर्तमान में पहले चरण में शुरुआत हो गई है। अगर यह शोध सफल होता है तो केंद्र इसे बड़े स्तर पर किसानों के साथ मिलकर करेगा।
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