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...उनके लिए हरेला माने पेड़-पौधों की परवरिश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2020 11:58 PM IST
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... raising green plants for them
पर्यावरण के सारथी एडवोकेट अशोक चौधरी। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। 16 जुलाई को हरियाला (हरेला) का पर्व है। इस बार चंपावत में कोरोना महामारी के चलते हरेले का मेला नहीं होगा। मगर एक काश्तकार के लिए हरेला का मायना पर्यावरण को संरक्षित करना है। इसके लिए वे नई पहल करते रहे हैं। जड़ीबूटी भेषज विकास संघ के अध्यक्ष और नामी काश्तकार एडवोकेट अशोक चौधरी के लिए रक्षा बंधन का अर्थ पेड़-पौधों की रक्षा करना और सूखी धरती को हराभरा करना है। फलदार पेड़ों को लगाना और उन्हें संरक्षित करने के लिए चौधरी पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र में बांधते रहे हैं।
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एडवोकेट चौधरी ने चंपावत के ढकनाबडोला और लोहाघाट ब्लाक के चौमेल में पुलम, सेव, नाशपती, आड़ू, माल्टा और संतरे के कुल 217 पौधे रोपे हैं। नौ साल पूर्व से उन्होंने इन पौधों को रोपना शुरू किया और अब इनमें से 175 पेड़ फल दे रहे हैं। एडवोकेट चौधरी का कहना है कि पौधों की परवरिश उनके जीवन का लक्ष्य है। पौधों के प्रति उनमें इस अपनेपन के बीज पिथौरागढ़ जीआईसी के प्रधानाचार्य और चौमेल क्षेत्र निवासी मोहन चंद्र पाठक की प्रेरणा से करीब एक दशक पूर्व आए। प्रधानाचार्य पाठक बीते कई वर्षो से पौधों को बचाने के लिए रक्षा बांधते रहे हैं। चौधरी बताते हैं कि इन पौधों को बचाने के लिए वे अपने परिवार के साथ नियमित रूप से वक्त देते हैं। कहते हैं कि पौधों की रक्षा केवल फल और छाया के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि धरती के बढ़ते तापमान से बचने के लिए भी ये उतना ही जरूरी है। पांच हजार फीट की ऊंचाई वाले चंपावत में जिस तेजी से गर्मी बढ़ रही है, उसके मद्देनजर पेड़-पौधों और हरियाली को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। अब वे नियमित रूप से रक्षा बंधन में पौधों को रक्षा बांध समाज को संदेश देने का प्रयास करेंगे। वहीं डीएचओ सतीश शर्मा का कहना है कि भेषज संघ अध्यक्ष अशोक चौधरी की पहल ने पौधों को संरक्षित करने की अन्य काश्तकारों को भी प्रेरणा दी है।
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