टनकपुर (चंपावत)। क्षेत्र में वर्षा से उफनते नाले ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बने हैं। बरसाती नदी, नालों से पहले से ही भूकटाव समस्या बनी है। पिछले ढाई दशकों में ग्रामीणों की कई बीघा भूमि भूकटाव की भेंट चढ़ चुकी है।
टनकपुर से पूर्णागिरि की ओर जाने वाले मार्ग किनारे के गांव थ्वालखेड़ा, खेतखेड़ा, गैंडाख्याली आदि क्षेत्र में उफनता किरोड़ा नाला किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इस नाले के उफान में आने से ग्रामीण तटबंध भूकटाव की भेंट चढ़ रहा है। समय रहते बाढ़ सुरक्षा कार्य न होने से ग्रामीण क्षेत्रों का अस्तित्व ही मिट जाएगा। किरोड़ा नाले के बहाव से खेतखेड़ा के ग्रामीण देवी दत्त पंत, चतुर सिंह, राजेंद्र कुमार, थ्वालखेड़ा के किसान कैलाश शर्मा, चंदन सिंह, केशव दत्त, खड़क सिंह, सुरेश चिल्कोटी, मोहन चंद, मदन सिंह आदि की कृषि भूमि तेजी कटाव की भेंट चढ़ रही है। थ्वालखेड़ा की प्रधान दीपा बोहरा ने प्रशासन से उक्त ग्रामों में हो रहा भूकटाव रोकने की मांग की है।