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Champawat News: हौसले के धनी पूरन एक हाथ से ट्रैक्टर चलाकर कर रहे पशुपालन
Fri, 31 Oct 2025 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 31 Oct 2025 11:28 PM IST
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लोहाघाट में अपने खेतों पर एक हाथ से मशीन चलाते पूरन सिंह। स्रोत: वीडियो ग्रैब
चंपावत। लोहाघाट विकासखंड की ग्राम पंचायत बलाई के पूरन सिंह एक हाथ से ट्रैक्टर चलाकर पशुपालन कर आत्मनिर्भरता के प्रतीक बन चुके हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने अथक परिश्रम और सकारात्मक सोच से नई कहानी लिखी।
बता दें कि वर्ष 2009 में राजस्थान की एक कंपनी में कार्य करते समय हुए हादसे में पूरन का बायां हाथ कट गया था। यह घटना अधिकांश लोगों के लिए जीवन थम जाने जैसी होती, लेकिन पूरन सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने इसे अपनी ताकत बनाया और एक हाथ से ही विभिन्न कंपनियों में कार्य कर अपनी जीविका चलाई। कोरोना महामारी के दौरान जब देशभर में रोजगार संकट गहराया तो वह अपने पैतृक गांव लौट आए। यहां उन्होंने कृषि और पशुपालन को अपनाया। आज वह खेती और डेयरी कार्य कर रहे हैं। साथ ही दूध से खोया और पनीर बनाकर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। उनकी मेहनत और लगने के चलते ग्रामीण वह आजीविका के एक सशक्त उदाहरण बन चुके हैं।
पूरन एक हाथ से भी सभी कार्य दक्षता से करते हैं। वह घास काटने की मशीन चलाते हैं। ट्रैक्टर चलाते चलाते- चलाते वह दायें हाथ को दक्ष कर चुके हैं। वह बड़े पैमाने पर आलू, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। उनके इस प्रयास में उनकी पत्नी ममता का महत्वपूर्ण सहयोग रहता है।
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बता दें कि वर्ष 2009 में राजस्थान की एक कंपनी में कार्य करते समय हुए हादसे में पूरन का बायां हाथ कट गया था। यह घटना अधिकांश लोगों के लिए जीवन थम जाने जैसी होती, लेकिन पूरन सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने इसे अपनी ताकत बनाया और एक हाथ से ही विभिन्न कंपनियों में कार्य कर अपनी जीविका चलाई। कोरोना महामारी के दौरान जब देशभर में रोजगार संकट गहराया तो वह अपने पैतृक गांव लौट आए। यहां उन्होंने कृषि और पशुपालन को अपनाया। आज वह खेती और डेयरी कार्य कर रहे हैं। साथ ही दूध से खोया और पनीर बनाकर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। उनकी मेहनत और लगने के चलते ग्रामीण वह आजीविका के एक सशक्त उदाहरण बन चुके हैं।
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पूरन एक हाथ से भी सभी कार्य दक्षता से करते हैं। वह घास काटने की मशीन चलाते हैं। ट्रैक्टर चलाते चलाते- चलाते वह दायें हाथ को दक्ष कर चुके हैं। वह बड़े पैमाने पर आलू, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। उनके इस प्रयास में उनकी पत्नी ममता का महत्वपूर्ण सहयोग रहता है।
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