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सैनिक विश्रामगृह के एक कमरे में चल रहा पाटी का थाना
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:23 PM IST
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पूर्व सैनिक विश्रामगृह में चल रहा पाटी थाने का भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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करीब ढाई साल पूर्व पाटी तहसील मुख्यालय में खुले जिले के आठवें थाने की हालत बुरी है। 121 राजस्व गांवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले इस थाने की व्यवस्था ही बे-पटरी है। यहां तक कि थाने के लिए भी जगह नहीं है। अभी भी यह थाना सैनिक विश्रामगृह से चलाया जा रहा है। थाने का पूरा कामकाज महज एक कमरे से चल रहा है। बंदियों के लिए हवालात तक नहीं बन सकी है। असलहा और थाने के अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संभालने में भी काफी चुनौती झेलनी पड़ रही है।
पाटी थाना 23 जून 2015 को विधिवत रूप से शुरू हुआ था। संचालन शुरू हुए दो साल बीतने के बाद भी व्यवस्थाएं अभी भी पटरी से उतरी हुई है। वर्तमान में यहां थानाध्यक्ष के अलावा तीन दरोगा तैनात हैं। वहीं 15 कांस्टेबलों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनात 11 ही हैं। पूरे थाने में एक भी महिला सिपाही नहीं है। इसके चलते महिलाओं से संबंधित आपराधिक मामलों के लिए 30 किलोमीटर दूर लोहाघाट थाने से महिला कांस्टेबलों को बुलाने की मजबूरी है। थाना स्थापित होने के बाद यहां 70 अपराध दर्ज किए गए। इनमें से सभी मामलों का खुलासा किया जा चुका है।
जगह की कमी से न केवल थाने का संचालन में परेशानी आ रही है बल्कि कर्मियों को भी दिक्कत हो रही है। इस वजह से थाने के पुलिस कर्मी पाटी विकासखंड के बने भवन में रहने को मजबूर हैं। पाटी थाने की एक चौकी सीमांग गांव वालिक में भी खोली गई है, लेकिन भवन नहीं होने से यह चौकी भी निजी भवन से संचालित की जा रही है। थानाध्यक्ष पीआर विश्वकर्मा का कहना है थाने में संसाधनों का अभाव जरूर है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की सक्रियता से कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। अशांति के डर से पाटी में 2010 से रामलीला बंद थी। लेकिन थाना खुलने के बाद से 2015 में फिर से लीला शुरू हो गई।
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शराब की पेटियों से भरा है थाना
पाटी थाने में जगह की बेहद कमी है। 8 नवंबर को थाने ने भिंगराड़ा से करीब 200 पेटी अवैध शराब दबोची। और यह शराब भी थाने के इसी कमरे के एक हिस्से में रखी गई है।
जौलाड़ी में प्रस्तावित है थाना
पाटी के थाने के लिए भवन तो दूर, अभी जमीन को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरु का कहना है कि पाटी थाने के लिए जौलाड़ी में जमीन का प्रस्ताव भेजा गया है।
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पाटी थाना 23 जून 2015 को विधिवत रूप से शुरू हुआ था। संचालन शुरू हुए दो साल बीतने के बाद भी व्यवस्थाएं अभी भी पटरी से उतरी हुई है। वर्तमान में यहां थानाध्यक्ष के अलावा तीन दरोगा तैनात हैं। वहीं 15 कांस्टेबलों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनात 11 ही हैं। पूरे थाने में एक भी महिला सिपाही नहीं है। इसके चलते महिलाओं से संबंधित आपराधिक मामलों के लिए 30 किलोमीटर दूर लोहाघाट थाने से महिला कांस्टेबलों को बुलाने की मजबूरी है। थाना स्थापित होने के बाद यहां 70 अपराध दर्ज किए गए। इनमें से सभी मामलों का खुलासा किया जा चुका है।
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जगह की कमी से न केवल थाने का संचालन में परेशानी आ रही है बल्कि कर्मियों को भी दिक्कत हो रही है। इस वजह से थाने के पुलिस कर्मी पाटी विकासखंड के बने भवन में रहने को मजबूर हैं। पाटी थाने की एक चौकी सीमांग गांव वालिक में भी खोली गई है, लेकिन भवन नहीं होने से यह चौकी भी निजी भवन से संचालित की जा रही है। थानाध्यक्ष पीआर विश्वकर्मा का कहना है थाने में संसाधनों का अभाव जरूर है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की सक्रियता से कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। अशांति के डर से पाटी में 2010 से रामलीला बंद थी। लेकिन थाना खुलने के बाद से 2015 में फिर से लीला शुरू हो गई।
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शराब की पेटियों से भरा है थाना
पाटी थाने में जगह की बेहद कमी है। 8 नवंबर को थाने ने भिंगराड़ा से करीब 200 पेटी अवैध शराब दबोची। और यह शराब भी थाने के इसी कमरे के एक हिस्से में रखी गई है।
जौलाड़ी में प्रस्तावित है थाना
पाटी के थाने के लिए भवन तो दूर, अभी जमीन को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरु का कहना है कि पाटी थाने के लिए जौलाड़ी में जमीन का प्रस्ताव भेजा गया है।