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Champawat News: पीएम के दौरे से बढ़ेगी पंचेश्वर बांध की आस
Mon, 09 Oct 2023 12:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 09 Oct 2023 12:30 AM IST
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। पीएम नरेंद्र मोदी के पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों के दौरे से लोगों में उत्साह है और उम्मीद भी। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के लोगों को इस दौरे से नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को कई सौगात मिलने की आस है। सीमांत में मोबाइल की घंटियों के बजने, टनकपुर-जौलजीबी रोड पर लटके पुल के साथ अधूरी सड़क की अड़चन दूर होने सहित ढेरों बुनियादी सुविधाओं के पूरा होने की उम्मीद है। लेकिन इस दौरे पर सबसे ज्यादा नजर पंचेश्वर बांध को लेकर है।
नेपाल सीमा पर पंचेश्वर बांध तीन दशक से प्रस्तावित था लेकिन इस पर उम्मीद के पंख नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद ही लगे।
मई 2014 में पीएम बनने के तीन महीने बाद अगस्त में उन्होंने नेपाल दौरे पर बांध को लेकर वार्ता भी की थी। लेकिन भूगर्भीय सर्वे, भूमिगत सुरंग का काम पूरा होने और केंद्रीय ऊर्जा शक्ति मंत्रालय की वाप्कोस कंपनी के डीपीआर बनाने के बाद 2020 से बांध क्षेत्र में कोई काम नहीं हो रहा है।
भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्याम नारायण पांडे का कहना है कि पीएम मोदी का दौरा इस ठहराव पर विराम लगाते हुए पंचेश्वर बांध की संभावनाओं को आगे बढ़ा सकता है।
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बांध से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. पंचेश्वर बांध से 5040 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा।
2. भूगर्भीय सर्वे के लिए चार साल पहले 625 मीटर की भूमिगत सुरंग बनाई जा चुकी है।
3. 60 हजार करोड़ रुपये से बनने वाले बांध की 315 मीटर प्रस्तावित ऊंचाई है।
4. बांध के बनने से भारत का 76 वर्ग किमी हिस्सा डूब जाएगा। इसमें चंपावत के 26, पिथौरागढ़ के 87 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव शामिल हैं।
5. नेपाल का 40 वर्ग किमी हिस्सा भी डूब क्षेत्र में आएगा।
6. चंपावत जिले के डूब क्षेत्र में 19 विभागों की करीब 1.60 अरब रुपये की परिसंपत्तियां प्रभावित होंगी।
7. परियोजना तीन जिलों के 31 हजार से अधिक लोग विस्थापित होंगे।
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चंपावत। पीएम नरेंद्र मोदी के पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों के दौरे से लोगों में उत्साह है और उम्मीद भी। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के लोगों को इस दौरे से नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को कई सौगात मिलने की आस है। सीमांत में मोबाइल की घंटियों के बजने, टनकपुर-जौलजीबी रोड पर लटके पुल के साथ अधूरी सड़क की अड़चन दूर होने सहित ढेरों बुनियादी सुविधाओं के पूरा होने की उम्मीद है। लेकिन इस दौरे पर सबसे ज्यादा नजर पंचेश्वर बांध को लेकर है।
नेपाल सीमा पर पंचेश्वर बांध तीन दशक से प्रस्तावित था लेकिन इस पर उम्मीद के पंख नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद ही लगे।
मई 2014 में पीएम बनने के तीन महीने बाद अगस्त में उन्होंने नेपाल दौरे पर बांध को लेकर वार्ता भी की थी। लेकिन भूगर्भीय सर्वे, भूमिगत सुरंग का काम पूरा होने और केंद्रीय ऊर्जा शक्ति मंत्रालय की वाप्कोस कंपनी के डीपीआर बनाने के बाद 2020 से बांध क्षेत्र में कोई काम नहीं हो रहा है।
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भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्याम नारायण पांडे का कहना है कि पीएम मोदी का दौरा इस ठहराव पर विराम लगाते हुए पंचेश्वर बांध की संभावनाओं को आगे बढ़ा सकता है।
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बांध से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. पंचेश्वर बांध से 5040 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा।
2. भूगर्भीय सर्वे के लिए चार साल पहले 625 मीटर की भूमिगत सुरंग बनाई जा चुकी है।
3. 60 हजार करोड़ रुपये से बनने वाले बांध की 315 मीटर प्रस्तावित ऊंचाई है।
4. बांध के बनने से भारत का 76 वर्ग किमी हिस्सा डूब जाएगा। इसमें चंपावत के 26, पिथौरागढ़ के 87 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव शामिल हैं।
5. नेपाल का 40 वर्ग किमी हिस्सा भी डूब क्षेत्र में आएगा।
6. चंपावत जिले के डूब क्षेत्र में 19 विभागों की करीब 1.60 अरब रुपये की परिसंपत्तियां प्रभावित होंगी।
7. परियोजना तीन जिलों के 31 हजार से अधिक लोग विस्थापित होंगे।