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आउटसोर्स किए गए कर्मी दो माह बाद फिर हुए आउट
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चंपावत। महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग के आउटसोर्स से रखे गए कर्मचारी एक बार फिर बृहस्पतिवार से बाहर हो गए हैं। अलबत्ता उन्हें न तो पिछला वेतन मिला है और नहीं सेवा विस्तार। हटाए गए कर्मचारियों ने अविलंब वेतन देने और दोबारा काम पर रखने की मांग की है।
सितंबर 2019 में उत्तराखंड में एक आउटसोर्स एजेंसी से केंद्र पोषित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राष्ट्रीय पोषण अभियान, वन स्टॉप सेंटर और महिला शक्ति केंद्र की योजनाओं के संचालन के लिए एक साल के लिए 379 कर्मियों को रखा गया था। इन कर्मियों ने केंद्र की इन योजनाओं का शानदार तरीके से संचालन किया। लेकिन अनुबंध का निर्धारित समय पूरा होने पर पिछले साल 15 सितंबर को इन कर्मियों को हटा दिया गया। इससे इन योजनाओं का काम भी प्रभावित रहा।
सूबे में इन कर्मियों को इस साल 25 जनवरी से 31 मार्च तक के लिए रखा गया था। और अब पहली अप्रैल से इन कर्मियों की सेवा पर फिर ब्रेक लग गया है। इन कर्मियों का कहना है कि उन्हें नौ माह का वेतन नहीं मिला है। इन कर्मियों ने वेतन देने के साथ फिर से काम पर रखे जाने की मांग की है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस बृजवाल का कहना है कि आउटसोर्स किए गए कर्मियों के बारे में जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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सितंबर 2019 में उत्तराखंड में एक आउटसोर्स एजेंसी से केंद्र पोषित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राष्ट्रीय पोषण अभियान, वन स्टॉप सेंटर और महिला शक्ति केंद्र की योजनाओं के संचालन के लिए एक साल के लिए 379 कर्मियों को रखा गया था। इन कर्मियों ने केंद्र की इन योजनाओं का शानदार तरीके से संचालन किया। लेकिन अनुबंध का निर्धारित समय पूरा होने पर पिछले साल 15 सितंबर को इन कर्मियों को हटा दिया गया। इससे इन योजनाओं का काम भी प्रभावित रहा।
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सूबे में इन कर्मियों को इस साल 25 जनवरी से 31 मार्च तक के लिए रखा गया था। और अब पहली अप्रैल से इन कर्मियों की सेवा पर फिर ब्रेक लग गया है। इन कर्मियों का कहना है कि उन्हें नौ माह का वेतन नहीं मिला है। इन कर्मियों ने वेतन देने के साथ फिर से काम पर रखे जाने की मांग की है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस बृजवाल का कहना है कि आउटसोर्स किए गए कर्मियों के बारे में जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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