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सांगी पूजन के साथ बगवाल का आयोजन शुरू
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मां बाराही धाम देवीधुरा में सांगी पूजन करते पुजारी। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा में कोरोना के चलते बगवाल का आयोजन भले ही सांकेतिक रूप से होगा, लेकिन पूजा-अर्चना कोरोना के नियमों का पालन कर पूरे विधि-विधान के साथ शुरू हो गई है। बुधवार को पहले दिन सांगी पूजन के साथ इसका श्रीगणेश हुआ। मंदिर के पीठाचार्य पंडित कीर्ति बल्लभ जोशी और मुख्य पुजारी धर्मानंद ने गणेश पूजन, मातृका पूजन, कलश पूजन, नवग्रह पूजन, अष्टोत्तर पूजन के बाद मंत्रोच्चार के साथ सांगी पूजन किया।
सांगी पूजन में चारों खाम और सातों थोकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, वालिग खाम के बद्री सिंह, दीवान सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह, गहड़वाल खाम के बद्री सिंह, खुशाल सिंह, त्रिलोक सिंह, पान सिंह, माधो सिंह बिष्ट, शिव सिंह चौहान, लाल सिंह चम्याल आदि थे। सांकेतिक रूप से होने वाली बगवाल 22 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगी, जबकि इससे पूर्व रोज पूजा-अर्चना में सभी चार खाम और सातों थोक के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।
बगवाल में सिर्फ 75 लोग ले सकेंगे हिस्सा
पाटी (चंपावत)। कोरोना महामारी के कारण लगातार दूसरी बार बगवाल मेला नहीं हो रहा है। वर्ष 2020 की तरह इस बार भी बगवाल सांकेतिक रूप से होगी। मंदिर समिति और प्रशासन के बीच हुई बैठक में तय किया गया था कि बगवाल में हर खाम के 11-11 लोगों के अलावा पूजा कराने वाले और मंदिर समिति से संबद्ध अन्य 31 लोग ही शामिल हो सकेंगे। संवाद
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सांगी पूजन में चारों खाम और सातों थोकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, वालिग खाम के बद्री सिंह, दीवान सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह, गहड़वाल खाम के बद्री सिंह, खुशाल सिंह, त्रिलोक सिंह, पान सिंह, माधो सिंह बिष्ट, शिव सिंह चौहान, लाल सिंह चम्याल आदि थे। सांकेतिक रूप से होने वाली बगवाल 22 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगी, जबकि इससे पूर्व रोज पूजा-अर्चना में सभी चार खाम और सातों थोक के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।
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बगवाल में सिर्फ 75 लोग ले सकेंगे हिस्सा
पाटी (चंपावत)। कोरोना महामारी के कारण लगातार दूसरी बार बगवाल मेला नहीं हो रहा है। वर्ष 2020 की तरह इस बार भी बगवाल सांकेतिक रूप से होगी। मंदिर समिति और प्रशासन के बीच हुई बैठक में तय किया गया था कि बगवाल में हर खाम के 11-11 लोगों के अलावा पूजा कराने वाले और मंदिर समिति से संबद्ध अन्य 31 लोग ही शामिल हो सकेंगे। संवाद
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