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जल्द हो सकती है बनबसा बैराज की तकनीकी जांच
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बनबसा में चौरानवे वर्ष पुराना का ऐतिहासिक शारदा बैराज। संवाद
- फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। गुजरात के मोरबी हादसे के बाद ब्रिटिश कालीन बनबसा बैराज की तकनीकी जांच कराए जाने के लिए शारदा हेडवर्क्स ने यूपी सिंचाई विभाग को पत्र भेजा है।
शारदा बैराज निर्माण के लगभग 94 वर्ष पूरे हो चुके हैं। करीब छह लाख क्यूसेक पानी के बहाव की क्षमता वाले इस बैराज का जलस्तर वर्ष 2019 में सर्वाधिक 5,47,000 क्यूसेक तक पहुंच चुका है। पुराने हो चुके इस बैराज पर मशीनों से जांच होने पर ही बैराज की क्षमता का सही आकलन हो पाएगा। बैराज की तकनीकी जांच जल्द होने की उम्मीद है।
गुजरात के मोरबी में 30 अक्तूबर की रात पुल टूटने की घटना के बाद यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा बैराज के रखरखाव के लिए बैराज प्रशासन सतर्क हो गया है। हालांकि बैराज का नियमित रखरखाव होता है। वर्ष 1928 में अंग्रेज हुक्मरानों ने यूपी के रायबरेली तक करीब 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था के लिए बनबसा में बैराज बनाया था। शारदा बैराज को आवागमन के लिए नहीं बनाया गया था लेकिन साठ के दशक से इस बैराज को भारत-नेपाल के बीच आवागमन के लिए सेतु के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है।
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शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि वर्ष 1990 से बैराज पर दस टन भार क्षमता वजन के परिवहन पर रोक है। हाल ही में उत्तराखंड शासन को भी पत्र भेजकर बैराज से दस टन से अधिक वजन के वाहनों के परिवहन पर रोक लगाने के लिए लिखा गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही तकनीकी टीम के यहां पहुंचकर बैराज की जांच करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नियमित रखरखाव के कारण बैराज की स्थिति बेहतर है। बैराज से निकली शारदा नहर की अधिकतम क्षमता करीब ग्यारह हजार क्यूसेक है जिससे यूपी के बड़े भूभाग की सिंचाई होती है।
वहीं नहर के पानी से ही उत्तराखंड के खटीमा लोहियाहेड स्थित जलविद्युत निगम के 39 मेगावाट क्षमता के पावर हाउस का भी संचालन होता है। वर्ष 1996 में भारत सरकार की तकनीकी टीम ने शारदा बैराज से करीब एक सौ मीटर दूर डाउन स्ट्रीम में नया बैराज बनाने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा था।
जलस्तर बढ़ने पर रोक दिया जाता है आवागमन
बनबसा (चंपावत)। शारदा बैराज की जल घनत्व क्षमता छह लाख क्यूसेक है। बैराज का अधिकतम जलस्तर 21 अगस्त 1934 को पांच लाख बाइस हजार, 18 जून 2013 को पांच लाख चवालीस हजार क्यूसेक एवं 19 अक्तूबर 2019 को सर्वाधिक पांच लाख सैंतालीस हजार क्यूसेक पहुंच चुका है। शारदा में एक लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होते ही सुरक्षा के तहत बैराज से वाहनों का आवागमन रोक दिया जाता है।
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शारदा बैराज निर्माण के लगभग 94 वर्ष पूरे हो चुके हैं। करीब छह लाख क्यूसेक पानी के बहाव की क्षमता वाले इस बैराज का जलस्तर वर्ष 2019 में सर्वाधिक 5,47,000 क्यूसेक तक पहुंच चुका है। पुराने हो चुके इस बैराज पर मशीनों से जांच होने पर ही बैराज की क्षमता का सही आकलन हो पाएगा। बैराज की तकनीकी जांच जल्द होने की उम्मीद है।
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गुजरात के मोरबी में 30 अक्तूबर की रात पुल टूटने की घटना के बाद यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा बैराज के रखरखाव के लिए बैराज प्रशासन सतर्क हो गया है। हालांकि बैराज का नियमित रखरखाव होता है। वर्ष 1928 में अंग्रेज हुक्मरानों ने यूपी के रायबरेली तक करीब 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था के लिए बनबसा में बैराज बनाया था। शारदा बैराज को आवागमन के लिए नहीं बनाया गया था लेकिन साठ के दशक से इस बैराज को भारत-नेपाल के बीच आवागमन के लिए सेतु के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है।
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शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि वर्ष 1990 से बैराज पर दस टन भार क्षमता वजन के परिवहन पर रोक है। हाल ही में उत्तराखंड शासन को भी पत्र भेजकर बैराज से दस टन से अधिक वजन के वाहनों के परिवहन पर रोक लगाने के लिए लिखा गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही तकनीकी टीम के यहां पहुंचकर बैराज की जांच करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नियमित रखरखाव के कारण बैराज की स्थिति बेहतर है। बैराज से निकली शारदा नहर की अधिकतम क्षमता करीब ग्यारह हजार क्यूसेक है जिससे यूपी के बड़े भूभाग की सिंचाई होती है।
वहीं नहर के पानी से ही उत्तराखंड के खटीमा लोहियाहेड स्थित जलविद्युत निगम के 39 मेगावाट क्षमता के पावर हाउस का भी संचालन होता है। वर्ष 1996 में भारत सरकार की तकनीकी टीम ने शारदा बैराज से करीब एक सौ मीटर दूर डाउन स्ट्रीम में नया बैराज बनाने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा था।
जलस्तर बढ़ने पर रोक दिया जाता है आवागमन
बनबसा (चंपावत)। शारदा बैराज की जल घनत्व क्षमता छह लाख क्यूसेक है। बैराज का अधिकतम जलस्तर 21 अगस्त 1934 को पांच लाख बाइस हजार, 18 जून 2013 को पांच लाख चवालीस हजार क्यूसेक एवं 19 अक्तूबर 2019 को सर्वाधिक पांच लाख सैंतालीस हजार क्यूसेक पहुंच चुका है। शारदा में एक लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होते ही सुरक्षा के तहत बैराज से वाहनों का आवागमन रोक दिया जाता है।