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अब चंपावत जिले के किसान भी आंदोलन की राह पर
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:36 PM IST
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अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय किसान यूनियन ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। शुक्रवार को रामलीला मैदान में जिलाध्यक्ष नवीन करायत की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों ने कृषि ऋण माफ करने की मांग की। कर्ज माफ नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। जिलेभर से आए किसानों ने मांगों को लेकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। निर्णय लिया कि 20 जून को जिलेभर के किसान चंपावत में डीएम कार्यालय में मांगों को रखेंगे। सरकार ने समय से उनकी नहीं सुनी, तो जिले के कई किसान सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे।
जिलेभर के किसानों ने कहा कि सीमांत और पिछड़ा जिला होने के बावजूद सरकार चंपावत जिले की लगातार अनदेखी कर रही है। एक ओर राज्य सरकार ने किसानों के हक में बुनियादी फैसले लिए हैं, वहीं छोटे और मंझले किसानों की ओर आंख मूंद ली है। कहा कि एक ओर प्रकृति की मार और दूसरी ओर जंगली जानवरों का आतंक ऊपर से सरकारी विभागों की उदासीनता के कारण किसान अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
जिले का हर किसान बैंक के कर्ज से उबर नहीं पा रहा है। उन्होंने सरकार से कृषि ऋण माफ करने और दूध का मूल्य कम से कम 40 रुपये लीटर करने की मांग की है। बैठक में गिरीश फर्त्याल, धीरज मुरारी, रिटायर्ड कैप्टन केएस महर, रमेश चंद्र राय, हंसादत्त पांडेय, चंद्रदत्त जोशी, श्याम सिंह फर्त्याल, लक्ष्मण राम, तेज सिंह, बंशीधर जोशी, ललित खर्कवाल, देवकी नंदन, नरेश भट्ट, छत्तर राम, विपिन चंद्र पांडेय, जीवन राम, देवी दत्त आदि किसान मौजूद थे।
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जिलेभर के किसानों ने कहा कि सीमांत और पिछड़ा जिला होने के बावजूद सरकार चंपावत जिले की लगातार अनदेखी कर रही है। एक ओर राज्य सरकार ने किसानों के हक में बुनियादी फैसले लिए हैं, वहीं छोटे और मंझले किसानों की ओर आंख मूंद ली है। कहा कि एक ओर प्रकृति की मार और दूसरी ओर जंगली जानवरों का आतंक ऊपर से सरकारी विभागों की उदासीनता के कारण किसान अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
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जिले का हर किसान बैंक के कर्ज से उबर नहीं पा रहा है। उन्होंने सरकार से कृषि ऋण माफ करने और दूध का मूल्य कम से कम 40 रुपये लीटर करने की मांग की है। बैठक में गिरीश फर्त्याल, धीरज मुरारी, रिटायर्ड कैप्टन केएस महर, रमेश चंद्र राय, हंसादत्त पांडेय, चंद्रदत्त जोशी, श्याम सिंह फर्त्याल, लक्ष्मण राम, तेज सिंह, बंशीधर जोशी, ललित खर्कवाल, देवकी नंदन, नरेश भट्ट, छत्तर राम, विपिन चंद्र पांडेय, जीवन राम, देवी दत्त आदि किसान मौजूद थे।
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