{"_id":"63309192ade2b62cf90a9535","slug":"not-teaching-in-the-oldest-polytechnic-of-the-district-champawat-news-hld4769304119","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के सबसे पुराने पॉलीटेक्निक में पढ़ाने वाले नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के सबसे पुराने पॉलीटेक्निक में पढ़ाने वाले नहीं
विज्ञापन
अनुदेशकों और कर्मचारियों की भारी कमी झेल रहा लोहाघाट का राजकीय पॉलीटेक्निक ।
- फोटो : LOHAGHAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोहाघाट (चंपावत)। जिले का सबसे पुराना तकनीकी शिक्षण केंद्र राजकीय पॉलीटेक्निक लोहाघाट बुरे हाल में है। 1975 में स्थापित इस पॉलीटेक्निक में 58 प्रतिशत पद खाली हैं। कार्मिकों की कमी से पढ़ाई से लेकर संस्थान की व्यवस्थाओं को सुचारु करने में दिक्कत आ रही है।
उत्तर प्रदेश के दौर में पहाड़ पर तकनीकी शिक्षा का पहला केंद्र लोहाघाट में खुला लेकिन राज्य गठन के बाद से इसके हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते गए। छात्र संख्या ही नहीं घटी बल्कि ट्रेड भी कम हो गए। इस वक्त महज 275 छात्र हैं जबकि ये संख्या राज्य बनने से पहले तक 525 से अधिक हुआ करती थी।
पांच ट्रेड में से एक स्टेनोग्राफी वर्ष 2016 से बंद हो गया है। जो चार (सिविल इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आईटी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स) ट्रेड चल रहे हैं उनमें सिर्फ फार्मेसी में ही पूरा स्टाफ है जबकि एमओएम के विभागाध्यक्ष, तीन व्याख्याताओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों के 62 में से 35 पद खाली हैं। पढ़ाने वालों की कमी से यहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है। संवाद
विज्ञापन
मुख्य रूप से खाली पद
प्रधानाचार्य, सिविल इंजीनियरिंग में विभागाध्यक्ष एवं दो व्याख्याता, आईटी और इलेक्ट्रानिक्स में एक-एक व्याख्याता, कंप्यूटर प्रोग्रामर, एमओएम के विभागाध्यक्ष एवं तीन व्याख्याता, व्याख्याता अंग्रेजी, कर्मशाला अधीक्षक, कर्मशाला अनुदेशक के तीन, पुस्तकालयाध्यक्ष, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, वैयक्तिक अधिकारी, प्रधान सहायक, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रयोगशाला प्रावि विघ्य फार्मेसी, स्वच्छक के एक-एक और चतुर्थ कर्मियों के आठ पद।
पॉलीटेक्निक में शिक्षकों और मिनिस्टीरियल के खाली पदों में तैनाती के लिए लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं। स्टाफ की कमी के बावजूद किसी तरह काम चलाया जा रहा है। पानी की कमी दूर होने से छात्रावास का संचालन शुरू हो गया है। -गोविंद बल्लभ, प्रभारी प्राचार्य।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के दौर में पहाड़ पर तकनीकी शिक्षा का पहला केंद्र लोहाघाट में खुला लेकिन राज्य गठन के बाद से इसके हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते गए। छात्र संख्या ही नहीं घटी बल्कि ट्रेड भी कम हो गए। इस वक्त महज 275 छात्र हैं जबकि ये संख्या राज्य बनने से पहले तक 525 से अधिक हुआ करती थी।
विज्ञापन
पांच ट्रेड में से एक स्टेनोग्राफी वर्ष 2016 से बंद हो गया है। जो चार (सिविल इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आईटी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स) ट्रेड चल रहे हैं उनमें सिर्फ फार्मेसी में ही पूरा स्टाफ है जबकि एमओएम के विभागाध्यक्ष, तीन व्याख्याताओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों के 62 में से 35 पद खाली हैं। पढ़ाने वालों की कमी से यहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है। संवाद
विज्ञापन
मुख्य रूप से खाली पद
प्रधानाचार्य, सिविल इंजीनियरिंग में विभागाध्यक्ष एवं दो व्याख्याता, आईटी और इलेक्ट्रानिक्स में एक-एक व्याख्याता, कंप्यूटर प्रोग्रामर, एमओएम के विभागाध्यक्ष एवं तीन व्याख्याता, व्याख्याता अंग्रेजी, कर्मशाला अधीक्षक, कर्मशाला अनुदेशक के तीन, पुस्तकालयाध्यक्ष, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, वैयक्तिक अधिकारी, प्रधान सहायक, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रयोगशाला प्रावि विघ्य फार्मेसी, स्वच्छक के एक-एक और चतुर्थ कर्मियों के आठ पद।
पॉलीटेक्निक में शिक्षकों और मिनिस्टीरियल के खाली पदों में तैनाती के लिए लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं। स्टाफ की कमी के बावजूद किसी तरह काम चलाया जा रहा है। पानी की कमी दूर होने से छात्रावास का संचालन शुरू हो गया है। -गोविंद बल्लभ, प्रभारी प्राचार्य।