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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Not so much on health heavy sweetness of Diwali!

कहीं सेहत पर भारी तो नहीं दिवाली की मिठास!

Fri, 23 Oct 2015 10:29 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 23 Oct 2015 10:29 PM IST
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2012 की दिवाली में 5 सैंपल, 2013 में 15 और 2014 की दिवाली में महज 2 सैंपल। ये आंकड़ा चंपावत जिले का है पर इन नमूनों में मिलावटखोरी के मामलों का कोई अता-पता नहीं। पिछले साल के नमूनों की रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है।

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दिवाली के पर्व में मिठाई और इससे जुड़े अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग 60 प्रतिशत बढ़ जाता है। दुग्ध संघ प्रबंधक निर्भय सिंह ने बताया कि दिवाली के मौके पर दूध और इससे बने उत्पादों की खपत में 60 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा होता है। दूध, मावा, मिठाई, पनीर समेत तमाम खाने-पीने की वस्तुओं की मांग बढ़ती है पर आपूर्ति में अंतर नहीं आता है। ऐसे में बढ़ी खपत की भरपाई के लिए मिलावट या गुणवत्ता से समझौता अधिक आसान हो जाता है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 की दिवाली के दौरान अक्तूबर में सिर्फ 2 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, लेकिन एक साल बीतने पर भी किसी सैंपल की रिपोर्ट नहीं आ सकी। इससे पूर्व के 2 वर्षों के हाल भी कमोबेश ऐसे ही रहे।
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खाद्य सुरक्षा विभाग में न अधिकारी और नहीं बाबू
सैंपलिंग लेने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग की हालत भी ठीक नहीं है। महीनों से चंपावत में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कुर्सी खाली है। यहां की अतिरिक्त जिम्मेदारी पिथौरागढ़ के अधिकारी के पास है। अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) भी चार के सापेक्ष बस एक है। निरीक्षकों की ही कमी नहीं है, बल्कि विभाग के पास एक अदद बाबू भी नहीं है। संसाधनों की कमी विभाग के लिए चुनौती बन रहा है। चार तहसीलों में से तीन में अभिहीत अधिकारी की कुर्सी खाली है। यहां तक कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय में एक लिपिक तक का पद नहीं भरा जा सका है। बहरहाल काम चलाने के लिए सीएमओ कार्यालय से एक कर्मी संबद्ध जरूर किया गया है। छापामारी के लिए वाहन तक नहीं है। अन्य संसाधन भी आधे-अधूरे हैं। इन हालातों में सैंपलिंग भी पर्याप्त संख्या में होना कठिन हो रहा है।


पर्वों में मिलावट के मामले बढ़ते हैं। दिवाली के मद्देनजर मिलावटखोरी और घटिया सामग्री से निपटने के लिए अभियान चलाए जाएगा। 21 अक्तूबर को दो सैंपल लिए गए। हां स्टाफ की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। -राजेंद्र सिंह कठायत, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़।

नकली दूध, पनीर, मावा, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री इंसान के शरीर के लिए बेहद घातक है। मिलावटी सामग्री गुर्दे, लीवर और आंत को प्रभावित करती है। मिलावट का असर दूरगामी होता है। -डा.विनोद टोलिया, सीएमओ, चंपावत।

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वर्ष                 लिए गए नमूने            मिलावटी मामले
2012                36                        0
2013                39                        0
2014               18                        17 मामलों की रिपोर्ट नहीं मिली

2015               13                        रिपोर्ट नहीं मिली

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