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मोटी फीस पर आग से बचाव की फिक्र नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:17 PM IST
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आग
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के डबवाली शहर के एक स्कूल में करीब दो दशक पूर्व हुए अग्निकांड ने जनधन का भारी नुकसान किया था। इसके बाद से देश के काफी स्कूलों में आग से बचाव को लेकर कुछ सावधानी बरती जाने लगी, मगर चंपावत जिले में हालात अब भी नहीं बदले हैं। यहां अधिकांश स्कूलों में आग से बचाव के लिए कोई सुविधा नहीं है। सरकारी स्कूलों से लेकर मोटी फीस लेने वाले प्राइवेट स्कूलों तक इस मामले में लापरवाह बने हैं। अधिकांश स्कूलों ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट तक नहीं लिया है।
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14 से 20 अप्रैल तक अग्नि सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, मगर इस अभियान में भी गंभीरता कम है। स्कूलों से भविष्य का सपना संजोने वाले बच्चों का वर्तमान ही दांव पर है। अधिकांश स्कूलों में आग से बचाव के बंदोबस्त नहीं है। सिर्फ इक्का-दुक्का स्कूलों के पास फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र है। जिले में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा को मिलाकर कुल 903 स्कूल हैं। इन स्कूलों में करीब 48 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, लेकिन इन विद्यालयों में से 95 प्रतिशत से अधिक में तो आग के खतरों से बचाव के इंतजाम एकदम नहीं हैं। रेत और पानी जैसी जरूरी सुविधा भी कुछ ही स्कूलों में है। स्कूलों तक रोड नहीं होना अथवा संकरी सड़क में आपदा के वक्त फायरब्रिगेड के वाहन का न निकल पाना बड़ी चुनौती है। अग्निशमन विभाग का कहना है कि जिले में सिर्फ एक स्कूल ने ही आग से बचाव का प्रमाणपत्र (फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट) लिया है।
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इसके अलावा फायर स्टेशन नहीं होने से चंपावत के स्कूलों में हालात और भी अधिक चिंताजनक है। आग से बचाव के लिए इस शहर को 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट फायर स्टेशन की सेवाएं लेने को मजबूर होना पड़ता है, जिसमें 20 मिनट से अधिक का वक्त बर्बाद होता है। जाहिर है ये तस्वीर आग से खेलने जैसी है।
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आदर्श स्कूलों में भी बचाव का प्रबंध नहीं
चंपावत जिले के चार विकासखंडों में कुल 20 स्कूलों को आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया गया है, लेकिन इनमें से किसी में भी आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। जिला मुख्यालय के जीआईसी से लेकर न तो माध्यमिक, न बेसिक अथवा जूनियर हाईस्कूल में अग्निशमन उपकरण है।