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छह साल में 78 प्रतिशत कम हो गया खेल बजट
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लोहाघाट का निर्माणाधीन स्टेडियम। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। टोक्यो ओलंपिक में भारत ने इतिहास रचा है। न केवल एथलेटिक्स में पहली बार स्वर्ण पदक जीता, बल्कि सबसे ज्यादा सात पदक (एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य) पहली बार भारत की झोली में आए हैं।
भाला फेंक में सूबेदार नीरज चोपड़ा के असाधारण प्रदर्शन के बाद खेलों को लेकर फिर जोश भर गया है, लेकिन सच्चाई यह है कि साधन और संसाधनों की कमी खेल प्रतिभाओं को रोक रही है।
चंपावत जिले को ही लें, यहां स्टेडियम से लेकर अन्य सुविधाएं गायब हैं। यहां तक कि खेल बजट में भी लगातार कमी हुई है। छह साल में जिला योजना का खेल बजट 78.85 प्रतिशत कम हुआ है।
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जिले की 2021-22 की 4078 लाख रुपये की जिला योजना में से खेल विभाग को सिर्फ 31.50 लाख रुपये मिले हैं, जबकि 2016-17 में 149 लाख रुपये खेल विभाग को मिले थे।
इस राशि का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतियोगिता आयोजन, आवासीय क्रीड़ा छात्रावास, प्रकीर्ण व्यय आदि में होता है, लेकिन कम राशि का असर प्रशिक्षण से लेकर खेल आयोजनों तक पड़ता है।
चंपावत जिले के 144 स्कूलों में से 10 प्रतिशत में भी पीटीआई और खेल मैदान नहीं हैं। प्रशिक्षक और स्टेडियम में भी जिला फिसड्डी है। सिर्फ टनकपुर में मिनी स्टेडियम है। राज्य बनने के बाद जिले में एक भी स्टेडियम नहीं बन सका है।
लोहाघाट में 1092.68 लाख रुपये के स्टेडियम का काम भी धीमी गति से चल रहा है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि स्टेडियम के काम को तेजी से कराने के उप्र निर्माण निगम को निर्देश दिए गए हैं।
चंपावत जिले में छह साल में जिला योजना से मिला खेल बजट
वर्ष बजट (लाख रुपये में)
2016-17 149.00
2017-18 49.02
2018-19 47.60
2019-20 52.35
2020-21 12.35
2021-22 31.50
गांव स्तर पर बढ़ानी होगी सुविधा
ओलंपिक या दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन करने के लिए खेल संस्कृति को विस्तार देना होगा। इसके लिए खेलों के आधारभूत ढांचे को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाना होगा। तभी जीत हमारी आदत का हिस्सा बनेगा।
- नायब सूबेदार बहादुर सिंह धामी
ढाका अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ के विजेता।
खेल प्रतिभाओं की खोज को चले अभियान
खेल प्रतिभाओं को खोजने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उनकी प्रतिभाओं को निखारने का व्यवस्थित तंत्र नहीं है। स्कूली स्तर पर खिलाड़ियों की क्षमताओं की परख कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।
- नरेंद्र सिंह बोहरा
खेल महाकुंभ के 2017-18 के चंपावत जिले के विजेता।
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भाला फेंक में सूबेदार नीरज चोपड़ा के असाधारण प्रदर्शन के बाद खेलों को लेकर फिर जोश भर गया है, लेकिन सच्चाई यह है कि साधन और संसाधनों की कमी खेल प्रतिभाओं को रोक रही है।
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चंपावत जिले को ही लें, यहां स्टेडियम से लेकर अन्य सुविधाएं गायब हैं। यहां तक कि खेल बजट में भी लगातार कमी हुई है। छह साल में जिला योजना का खेल बजट 78.85 प्रतिशत कम हुआ है।
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जिले की 2021-22 की 4078 लाख रुपये की जिला योजना में से खेल विभाग को सिर्फ 31.50 लाख रुपये मिले हैं, जबकि 2016-17 में 149 लाख रुपये खेल विभाग को मिले थे।
इस राशि का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतियोगिता आयोजन, आवासीय क्रीड़ा छात्रावास, प्रकीर्ण व्यय आदि में होता है, लेकिन कम राशि का असर प्रशिक्षण से लेकर खेल आयोजनों तक पड़ता है।
चंपावत जिले के 144 स्कूलों में से 10 प्रतिशत में भी पीटीआई और खेल मैदान नहीं हैं। प्रशिक्षक और स्टेडियम में भी जिला फिसड्डी है। सिर्फ टनकपुर में मिनी स्टेडियम है। राज्य बनने के बाद जिले में एक भी स्टेडियम नहीं बन सका है।
लोहाघाट में 1092.68 लाख रुपये के स्टेडियम का काम भी धीमी गति से चल रहा है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि स्टेडियम के काम को तेजी से कराने के उप्र निर्माण निगम को निर्देश दिए गए हैं।
चंपावत जिले में छह साल में जिला योजना से मिला खेल बजट
वर्ष बजट (लाख रुपये में)
2016-17 149.00
2017-18 49.02
2018-19 47.60
2019-20 52.35
2020-21 12.35
2021-22 31.50
गांव स्तर पर बढ़ानी होगी सुविधा
ओलंपिक या दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन करने के लिए खेल संस्कृति को विस्तार देना होगा। इसके लिए खेलों के आधारभूत ढांचे को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाना होगा। तभी जीत हमारी आदत का हिस्सा बनेगा।
- नायब सूबेदार बहादुर सिंह धामी
ढाका अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ के विजेता।
खेल प्रतिभाओं की खोज को चले अभियान
खेल प्रतिभाओं को खोजने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उनकी प्रतिभाओं को निखारने का व्यवस्थित तंत्र नहीं है। स्कूली स्तर पर खिलाड़ियों की क्षमताओं की परख कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।
- नरेंद्र सिंह बोहरा
खेल महाकुंभ के 2017-18 के चंपावत जिले के विजेता।