फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   No More Fund For Helipaid in Champawat

80 लाख नहीं मिले, अब 272 लाख की जरूरत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 12:27 AM IST
विज्ञापन
No More Fund For Helipaid in Champawat
चंपावत का अधूरा हेलीपैड, जो धन की कमी से अटका पड़ा है। इसके बावजूद इसमें हेलीकॉप्टर उतरते हैं। सं? - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले के लोगों का पहले हेलीपैड का इंतजार पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। धन न मिलने से तीन साल से काम पूरी तरह बंद है। बजट मिलने में हो रही देरी से हेलीपैड की लागत भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2019 में 80 लाख रुपये का संशोधित आगणन अब बढ़कर 272 लाख रुपये हो गया है।
विज्ञापन

नगर में सर्किट हाउस से 200 मीटर की दूरी पर 2016 से शुरू हेलीपैड का काम अब भी अधूरा है।
उत्तराखंड इमरजेंसी एसिस्टेंस प्रोजेक्ट (यूईएपी) के तहत चंपावत में सर्किट हाउस के पास 0.20 हेक्टेयर जमीन पर शुरू इस हेलीपैड का निर्माण कार्य नवंबर 2018 में पूरा होना था, लेकिन 99 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद काम अब भी अधूरा है। करीब तीन साल से काम रुका है। जमीन के समतलीकरण और प्लेटफार्म का काम पूरा होने के कारण यहां हेलीकॉप्टर रुकते तो हैं, लेकिन न चहारदीवारी है और न ही भूकटाव से बचाव के लिए सुरक्षा दीवार।
विज्ञापन

लोनिवि के ईई एमसी पांडेय ने बताया कि हेलीपैड के अधूरे काम को पूरा करने के लिए लोनिवि तीन बार आगणन भेज चुका है। पहली बार 80 लाख रुपये, दूसरी बार 2020 में कार्य में कुछ कटौती कर 60 लाख रुपये का बजट भेजा, लेकिन बजट मिला नहीं। अब हेलीपैड के बचे सभी काम को पूरा करने के लिए 272 लाख रुपये का आगणन पिछले महीने भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाकी हैं ये काम
चंपावत। चंपावत के इस निर्माणाधीन हेलीपैड पर तीन जहाज (दो चौपर और एक एम-17) एक साथ उतरने की सुविधा है। वीआईपी के आवागमन समेत इसका उपयोग आपदा में राहत के साथ ही अन्य गतिविधियों के लिए किया जाना है लेकिन इस हेलीपैड पर बहुउद्देश्यीय सभागार, सुरक्षा दीवार, घास, सजावट का काम होना बाकी है।

खेल मैदान है अस्थायी हेलीपैड
चंपावत। हेलीपैड न होने की स्थिति में चंपावत में अक्सर गोरलचौड़ मैदान को अस्थायी हेलीपैड बनाया जाता रहा है। इससे न केवल खेल मैदान की हालत बिगड़ती है, बल्कि प्रतिकूल असर भी पड़ता है। एसएसएबी के हेलीपैड का भी कभी कभार उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed