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सीएम के चंपावत में आने के बाद गुमदेश उप तहसील के संचालन की जगी आस
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गुमदेश क्षेत्र में प्रस्तावित उप तहसील के संचालन के लिए सरकारी भवन की तलाश करती प्रशासन की टीम।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चंपावत विधानसभा सीट से दावेदारी के बाद सात वर्षों से प्रस्तावित लोहाघाट के गुमदेश उप तहसील के संचालन की आस जग गई है। स्थानीय प्रशासन ने इस उपतहसील के संचालन के लिए क्षेत्र में सरकारी भवनों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि चंपावत में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की आचार संहिता लगने से कुछ समय के लिए यह कार्य रुक गया है, लेकिन चुनाव बाद जल्द ही उप तहसील के संचालन की उम्मीद बढ़ गई है।
शासन ने वर्ष 2015 में पुल्ला गुमदेश में उपतहसील की स्वीकृति दी थी। इससे क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर थी लेकिन सात वर्ष बीतने के बाद भी उप तहसील का संचालन शुरू नहीं हो पाया। एसडीएम रिंकू बिष्ट के निर्देशन में तहसीलदार विजय गोस्वामी के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों ने सोमवार को पुल्ला गुमदेश क्षेत्र में उपतहसील के संचालन के लिए सरकारी भवनों की तलाश शुरू कर दी लेकिन चुनाव आचार संहिता लगने के कारण यह कार्य एक माह के लिए रुक गया है।
गुमदेश उपतहसील के संचालन के लिए सरकारी भवन की तलाश की जा रही थी। चंपावत में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए आचार संहिता लगने से यह कार्य फिलहाल रुक गया है। चुनाव बाद आचार संहिता हटने के बाद उप तहसील के संचालन के लिए अगली कार्यवाही की जाएगी। - रिंकू बिष्ट, एसडीएम, लोहाघाट।
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तल्लादेश उपतहसील को लेकर संशय
चंपावत। तल्लादेश के मंच की उपतहसील का बुधवार को प्रस्तावित शुभारंभ कार्यक्रम स्थगित हो गया है। चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण असमंजस बना हुआ है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि उपतहसील के संचालन को लेकर चुनाव आयोग से दिशा निर्देश लिए जा रहे हैं। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
उपतहसील संचालन के लिए नहीं मिल रहे कार्मिक
चंपावत। नेपाल सीमा से लगा लोहाघाट ब्लॉक का गुमदेश क्षेत्र बहुत पिछड़ा है। इस क्षेत्र की अनदेखी के कारण मंजूरी के पौने सात साल बाद भी गुमदेश उप तहसील नहीं खुल सकी है। उपतहसील संचालित न होने का कोई तकनीकी कारण नहीं बल्कि कार्मिकों की कमी बताई गई है। इस वजह से गुमदेश के लोगों को तहसील संबंधी कामों के लिए 39 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ रहा है।
गुमदेश की 41 ग्राम पंचायतों की 35 हजार की आबादी के लिए 15 जून 2015 को पृथक उपतहसील की राजाज्ञा जारी हुई थी। किमतोली के राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को उपतहसील मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली लेकिन तब से 82 महीने बाद भी उप तहसील नहीं खुल सकी। उपतहसील के संचालन को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन फिर भी तहसील शुरू नहीं हो सकी। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि इसके चलते नेपाल के सीमावर्ती ग्रामीणों को खतौनी की नकल, स्थायी निवास, जाति, आय, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज बनाने में परेशानी हो रही है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्मिकों की कमी की वजह से उपतहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है। कलक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी ने 22 जनवरी 2021 को राजस्व परिषद को भेजे पत्र में उप तहसील के संचालित न होने का कारण राजस्व अधिकारी-कार्मिकों की कमी को बताया था। इसके बावजूद विभाग में कार्मिकों के खाली पद नहीं भरे जा सके हैं।
बाराकोट में तहसीलदार न नायब तहसीलदार
चंपावत। पांच तहसील वाले चंपावत जिले में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के ही 60 प्रतिशत पद खाली हैं। पूर्णागिरि, चंपावत, लोहाघाट, पाटी तहसीलों में सिर्फ नायब तहसीलदार हैं जबकि बाराकोट में न नायब तहसीलदार है और न ही तहसीलदार। अफसरों की कमी के कारण लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं।
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शासन ने वर्ष 2015 में पुल्ला गुमदेश में उपतहसील की स्वीकृति दी थी। इससे क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर थी लेकिन सात वर्ष बीतने के बाद भी उप तहसील का संचालन शुरू नहीं हो पाया। एसडीएम रिंकू बिष्ट के निर्देशन में तहसीलदार विजय गोस्वामी के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों ने सोमवार को पुल्ला गुमदेश क्षेत्र में उपतहसील के संचालन के लिए सरकारी भवनों की तलाश शुरू कर दी लेकिन चुनाव आचार संहिता लगने के कारण यह कार्य एक माह के लिए रुक गया है।
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गुमदेश उपतहसील के संचालन के लिए सरकारी भवन की तलाश की जा रही थी। चंपावत में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए आचार संहिता लगने से यह कार्य फिलहाल रुक गया है। चुनाव बाद आचार संहिता हटने के बाद उप तहसील के संचालन के लिए अगली कार्यवाही की जाएगी। - रिंकू बिष्ट, एसडीएम, लोहाघाट।
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तल्लादेश उपतहसील को लेकर संशय
चंपावत। तल्लादेश के मंच की उपतहसील का बुधवार को प्रस्तावित शुभारंभ कार्यक्रम स्थगित हो गया है। चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण असमंजस बना हुआ है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि उपतहसील के संचालन को लेकर चुनाव आयोग से दिशा निर्देश लिए जा रहे हैं। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
उपतहसील संचालन के लिए नहीं मिल रहे कार्मिक
चंपावत। नेपाल सीमा से लगा लोहाघाट ब्लॉक का गुमदेश क्षेत्र बहुत पिछड़ा है। इस क्षेत्र की अनदेखी के कारण मंजूरी के पौने सात साल बाद भी गुमदेश उप तहसील नहीं खुल सकी है। उपतहसील संचालित न होने का कोई तकनीकी कारण नहीं बल्कि कार्मिकों की कमी बताई गई है। इस वजह से गुमदेश के लोगों को तहसील संबंधी कामों के लिए 39 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ रहा है।
गुमदेश की 41 ग्राम पंचायतों की 35 हजार की आबादी के लिए 15 जून 2015 को पृथक उपतहसील की राजाज्ञा जारी हुई थी। किमतोली के राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को उपतहसील मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली लेकिन तब से 82 महीने बाद भी उप तहसील नहीं खुल सकी। उपतहसील के संचालन को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन फिर भी तहसील शुरू नहीं हो सकी। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि इसके चलते नेपाल के सीमावर्ती ग्रामीणों को खतौनी की नकल, स्थायी निवास, जाति, आय, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज बनाने में परेशानी हो रही है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्मिकों की कमी की वजह से उपतहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है। कलक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी ने 22 जनवरी 2021 को राजस्व परिषद को भेजे पत्र में उप तहसील के संचालित न होने का कारण राजस्व अधिकारी-कार्मिकों की कमी को बताया था। इसके बावजूद विभाग में कार्मिकों के खाली पद नहीं भरे जा सके हैं।
बाराकोट में तहसीलदार न नायब तहसीलदार
चंपावत। पांच तहसील वाले चंपावत जिले में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के ही 60 प्रतिशत पद खाली हैं। पूर्णागिरि, चंपावत, लोहाघाट, पाटी तहसीलों में सिर्फ नायब तहसीलदार हैं जबकि बाराकोट में न नायब तहसीलदार है और न ही तहसीलदार। अफसरों की कमी के कारण लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं।