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झील नगरी के सपने के साकार होने में हो रही देरी...

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 12:09 AM IST
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New Lake in Champawat
डिप्टेश्वर के पास का क्षेत्र। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कुदरती झील श्यामलाताल के लिए प्रसिद्ध चंपावत को झील नगरी बनाने में अभी लंबा वक्त लगेगा। चंपावत क्षेत्र में घोषणा के पांच साल बाद भी दो झीलों का निर्माण शुरू होना तो दूर अभी कोई खास प्रगति भी नहीं हो सकी है।
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पांच साल पहले चंपावत जिले को झील नगरी बनाने का दावा किया गया था। इसके लिए चंपावत में डिप्टेश्वर झील और यहां से आठ किमी दूर सिमल्टा गांव में कूर्म सरोवर के निर्माण का 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। इन दोनों झीलों का शुरुआती काम सुस्त तरीके से चल रहा है। पांच साल में सर्वे समेत आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों का तकनीकी परामर्श ही पूरा हो सका है। यहां तक कि अभी इसका आगणन भी नहीं बनाया जा सका है।
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करीब डेढ़ किमी लंबी, 30 मीटर चौड़ी, 15 मीटर गहरी डिप्टेश्वर झील का निर्माण गंडकी नदी में होगा। झील का कुछ हिस्सा ढकना गाड़ में भी बनेगा। कूर्म सरोवर करीब 150 मीटर लंबी, 15 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है। इन झीलों के बनने से विकास, रोजगार, पर्यटन की संभावनाओं को पंख लगते लेकिन देरी से क्षेत्र को झील नगरी बनाने के सपने के साकार होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा।
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झील से होंगे ये लाभ
दोनों झीलों का निर्माण पूरा होने पर बहुआयामी लाभ होगा। इससे सिंचाई, जल संरक्षण के साथ ही पर्यटन भी प्रोत्साहित होगा। रोजगार और स्वरोजगार के मौके बढ़ेंगे। भविष्य में पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रहेगा।
झील की टाइमलाइन
2017 : तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत की गंडकी नदी के पास डिप्टेश्वर झील और सिमल्टा की कूर्म सरोवर के निर्माण का एलान किया था।
2019 : झील निर्माण और सर्वे में परीक्षण अनुकूल पाया गया।
2019 : तकनीकी सलाहकार समिति के अनुमोदन के बाद झील के सर्वे और भूगर्भीय रिपोर्ट के लिए बजट मिला।
2022 : रुड़की आईआईटी के इंजीनियरों ने ड्राफ्ट रिपोर्ट दी।
डिप्टेश्वर झील और कूर्म सरोवर को लेकर आईआईटी के विशेषज्ञों की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार पर विभाग आगणन बना रहा है। आगणन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। बजट मिलने के बाद झीलों का काम शुरू कर दिया जाएगा। - लक्ष्मण कुमार, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, चंपावत।
श्यामलाताल का भी होना है संरक्षण
चंपावत। जिले में कुदरती ताल भी है। यहां से 55 किमी दूर श्यामलाताल इसी खास खूबी के लिए आकर्षण का केंद्र है। इन्हीं खूबियों के कारण इसके संरक्षण और संवर्धन का काम प्रस्तावित किया गया है। इस स्थल को बेहतर बनाने के लिए पर्यटन और सिंचाई विभाग पहल कर रहे हैं।

कोलीढेक झील का काम पूरा लेकिन पानी भरने में लगेगा समय
चंपावत। लोहाघाट की कोलीढेक झील का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब इस झील में पानी भरने का काम किया जा रहा है। सिंचाई, पर्यटन विकास में मददगार इस झील से लिफ्ट पेयजल योजना भी प्रस्तावित की गई है। 1500 मीटर लंबी, 80 मीटर चौड़ी, 21 मीटर गहरी झील में पानी भरने का काम शुरू किया गया है। सिंचाई विभाग के ईई फरहान खान का कहना है कि 30.76 करोड़ रुपये से निर्मित इस झील के भरने में अभी कुछ समय लगेगा।
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