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Champawat News: इलाज के लिए 40 किमी की दौड़ लगा रहे नेत्रसलान के ग्रामीण
Thu, 08 Feb 2024 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 08 Feb 2024 11:05 PM IST
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चंपावत। जिले के बाराकोट विकासखंड के ग्राम पंचायत नेत्रसलान के ग्रामीण इलाज के लिए 43 किमी दूर लोहाघाट और 40 किमी दूर पिथौरागढ़ की दौड़ लगा रहे हैं। यह क्षेत्र चंपावत और पिथौरागढ़ के बीच में है। क्षेत्र में कोई नजदीकी अस्पताल नहीं होने से उन्हें काफी दिक्कत होती है। इलाज नहीं मिलने से कई बार बीमार रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
ग्राम पंचायत नेत्रसलान की 450 की आबादी है। चुनाव में जनप्रतिनिधि इन्हें आश्वासन देते हैं कि इस बार अस्पताल खोलने की व्यवस्था जरूरी होगी लेकिन आश्वासन सिर्फ कोरे होते हैं। इलाज के अभाव में यहां के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। करीब चार साल पहले अस्पताल ले जाते समय उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया था। यहां के लोग गंभीर बीमार होने पर डर जाते हैं। उनका डर इस बात को लेकर होता है कि समय से अस्पताल नहीं पहुंचे तो कहीं कुछ अनहोनी रास्ते में न हो जाए। स्थानीय जमुना देवी ने बताया कि गांव के अधिकतर युवा अन्य जिलों में कार्य कर रहे हैं। इस कारण यहां बीमारों को बुजुर्ग अस्पताल तक ले जाते हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि अगर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव देते हैं तो शासन को भेजा जाएगा।
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रात में मुश्किल होता है वाहन मिलना
चंपावत। सरयू नदी के किनारे बसे नेत्रसलान के लोगों को रात में वाहन मिलना मुश्किल होता है। गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे मीलों दूर लोहाघाट, चंपावत या फिर पिथौरागढ़ ले जाने की मजबूरी होती है। दिन में किसी के बीमार होने पर ग्रामीण टैक्सी या अन्य वाहन से अस्पताल तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां इलाज के लिए एक एएनएम केंद्र खोला जाए।
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नेत्रसलान की 450 आबादी के पास इलाज की सुविधा नहीं है। इलाज के लिए उन्हें 40 किमी दूर पिथौरागढ़ या फिर 43 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ता है। चार साल पूर्व मेरे चाचा पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह की भी इलाज नहीं मिलने से रास्ते में मौत हो गई थी।
-रतन सिंह, ग्राम प्रधान, नेत्रसलान।
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नेत्रसलान के ग्रामीणों का जीवन मुश्किल भरा है। सड़क तो लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। गर्भवतियों, बीमार बच्चों, बुजुर्गों को बड़ी समस्या होती है। यहां पर एक एएनएम केंद्र खोलने की जरूरत है।
13 पी-जगत सिंह, ग्रामीण, ग्राम बेट्टा।
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ग्राम पंचायत नेत्रसलान की 450 की आबादी है। चुनाव में जनप्रतिनिधि इन्हें आश्वासन देते हैं कि इस बार अस्पताल खोलने की व्यवस्था जरूरी होगी लेकिन आश्वासन सिर्फ कोरे होते हैं। इलाज के अभाव में यहां के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। करीब चार साल पहले अस्पताल ले जाते समय उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया था। यहां के लोग गंभीर बीमार होने पर डर जाते हैं। उनका डर इस बात को लेकर होता है कि समय से अस्पताल नहीं पहुंचे तो कहीं कुछ अनहोनी रास्ते में न हो जाए। स्थानीय जमुना देवी ने बताया कि गांव के अधिकतर युवा अन्य जिलों में कार्य कर रहे हैं। इस कारण यहां बीमारों को बुजुर्ग अस्पताल तक ले जाते हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि अगर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव देते हैं तो शासन को भेजा जाएगा।
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रात में मुश्किल होता है वाहन मिलना
चंपावत। सरयू नदी के किनारे बसे नेत्रसलान के लोगों को रात में वाहन मिलना मुश्किल होता है। गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे मीलों दूर लोहाघाट, चंपावत या फिर पिथौरागढ़ ले जाने की मजबूरी होती है। दिन में किसी के बीमार होने पर ग्रामीण टैक्सी या अन्य वाहन से अस्पताल तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां इलाज के लिए एक एएनएम केंद्र खोला जाए।
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नेत्रसलान की 450 आबादी के पास इलाज की सुविधा नहीं है। इलाज के लिए उन्हें 40 किमी दूर पिथौरागढ़ या फिर 43 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ता है। चार साल पूर्व मेरे चाचा पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह की भी इलाज नहीं मिलने से रास्ते में मौत हो गई थी।
-रतन सिंह, ग्राम प्रधान, नेत्रसलान।
नेत्रसलान के ग्रामीणों का जीवन मुश्किल भरा है। सड़क तो लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। गर्भवतियों, बीमार बच्चों, बुजुर्गों को बड़ी समस्या होती है। यहां पर एक एएनएम केंद्र खोलने की जरूरत है।
13 पी-जगत सिंह, ग्रामीण, ग्राम बेट्टा।

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