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अब नेपाल अपना रहा लचीला रुख

Sat, 25 Feb 2017 09:10 PM IST
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sat, 25 Feb 2017 09:10 PM IST
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Nepal adopting flexible
अब नेपाल अपना रहा लचीला रुख - फोटो : अमर उजाला
भारत-नेपाल दोनों ही देश पंचेश्वर बांध परियोजना को जल्द से जल्द शुरू करने की मंशा रखते हैं। इसे लेकर दोनों देशों की सहमति आज भी नजर आई। डीपीआर जल्द बनाकर काम शुरू करने की बात भी कही गई। साथ ही किसी भी तरह के विवाद पर नेपाल की ओर से लचीले रवैये के संकेत दिए जा रहे हैं।
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पंचेश्वर बांध परियोजना के मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) महेंद्र बहादुर गुरुंग ने कहा कि किसी भी तरह के विवाद को आपसी वार्ता से निपटा लिया जाएगा। दोनों देश के अधिकारी प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। इस साल के आखिर तक डीपीआर तैयार कर ली जाएगी।
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हालांकि, इससे पहले वापकोस कंपनी की ओर से बनाई गई डीपीआर पर नेपाल के कुछ राजनीतिक दलों को आपत्ति थी। नेपाल के इन दलों का कहना था कि डीपीआर में जल बंटवारे में नेपाल को मात्र 22 फीसदी पानी देने की बात कही गई थी, जबकि नेपाल को 50 फीसदी पानी मिलना चाहिए। अब इस मामले पर नेपाल लचीला रवैया अपनाने की बात कह रहा है। इसके अलावा उनका डीपीआर शारदा का उद्गम स्थल धारचूला दर्शाया गया है, जबकि शारदा का उद्गम स्थल लिपूलेख है।
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विस्थापन बन सकती है चुनौती
पंचेश्वर बांध बनने से विस्थापन सबसे बड़ा सवाल है। केंद्रीय सचिव अमरजीत का कहना है कि विस्थापन का काम राज्य सरकार को करना है। नई सरकार पर विस्थापन के काम को नतीजे तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों का जल्द से जल्द विस्थापन करना राज्य सरकार के लिए चुनौती होगी। नेपाल के 11 एवं भारत के 24 गांवों पर विस्थापन का असर पड़ेगा।
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