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न पेयजल व्यवस्था ठीक और न रास्तों की मरम्मत हुई

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:24 PM IST
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Neither the drinking water system was good nor the roads were repaired.
पूर्णागिरि धाम का ठुलीगाड़-भैरव मंदिर का क्षतिग्रस्त रास्ता। संवाद - फोटो : CHAMPAWAT
पूर्णागिरि धाम/चंपावत। शारदीय नवरात्र में अब महज चार दिन बचे हैं लेकिन मां पूर्णागिरि धाम की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो सका है। बरसात में टूटी लाइन दुरुस्त नहीं होने से धाम की पेयजल व्यवस्था अब भी चरमराई है। इसी तरह कई रास्तों की भी अभी मरम्मत होनी है।
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26 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में पूर्णागिरि धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं लेकिन अब भी यहां की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में आठ किमी दूर निगालीगाड़, ठुंगागाड़ और भवानीगाड़ से पेयजल आपूर्ति होती है। ये स्रोत बरसात में कई जगह बुरी तरह टूट गए है। इस वजह से धाम और आसपास के गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित है।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने कहा कि लाइन की मरम्मत जल्द नहीं होने पर नवरात्र में परेशानी बढ़ सकती है। वहीं जल संस्थान के ईई विलाल यूनुस का कहना है कि पूर्णागिरि पेयजल लाइन स्रोत तक पाइप पहुंचा दिए हैं। 24 सितंबर तक लाइनों की मरम्मत कर दी जाएगी।
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26 सितंबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र की व्यवस्थाओं को अगले तीन दिन में दुरुस्त कर लिया जाएगा। पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए जल संस्थान को निर्देश दिए गए हैं। सफाई व्यवस्था और क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत कराई जा रही है। -हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।

अस्थायी रूप से ठीक हुईं 60 पेयजल लाइनें
चंपावत। दो दिनों की बारिश का जिले की 70 पेयजल योजनाओं पर असर पड़ा। अब इनमें से 60 योजनाओं को कामचलाऊ तौर पर ठीक कर लिया गया है।
जल संस्थान के ईई विलाल यूनुस ने बताया कि सभी क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत के लिए टीमें लगाई गई हैं। जल संस्थान की 54 में से 48 योजनाओं को ठीक करा लिया गया है। इसी तरह जल निगम की 16 योजनाओं में से 12 की मरम्मत हो गई है। शेष दस योजनाओं के 25 सितंबर तक ठीक होने की उम्मीद है। इसी तरह आपदा से जिले की अब भी आठ ग्रामीण मार्ग बंद है।
चंपावत जिले की बंद ग्रामीण सड़कें
रीठा-अमोड़ी, सूखीढांग-डांडा-मीडार, चमदेवल-जाख-गजीना, बांकू-सुल्ला-कनौली, बांकू-सुल्ला-रौबांकू, धौन-बड़ोली, चल्थी-नौलापानी और धौन-द्यूरी-बजौन।
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