फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   National Youth Day

डूबते को तिनके का सहारा बन रहा सूरज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jan 2020 10:54 PM IST
विज्ञापन
National Youth Day
दियूरी के इस डाकबंगले में 1901 में स्वामी विवेकानंद जी रुके थे। - फोटो : CHAMPAWAT
डूबते को तिनके का सहारा की कहावत टनकपुर के सूरज शर्मा पर सटीक बैठती है। महज 22 साल की उम्र का यह तैराक इतनी छोटी उम्र में ही 63 डूबते लोगों को मौत के मुंह से निकाल चुका है। उसे इस काम के लिए पुलिस की ओर से से सम्मानित भी किया जा चुका है। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी उन्हें आर्थिक मदद दी है। सूरज बताता है कि जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय ने क्षेत्र के दौरे में उसे पीआरडी में भर्ती करने का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी यह वादा पूरा नहीं हुआ है।
विज्ञापन

शारदा नदी के किनारे रहने वाले शंकर शर्मा के बेटे सूरज को तैराकी विरासत में मिली। पिता ने सूरज को तैराकी की बारीकियां सिखाईं। तैराकी में इस कदर दिलचस्पी रही कि सूरज आठवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर सका। पढ़ाई के बजाय नदी की थाह को जानना उसका शौक बन गया।
विज्ञापन

मां पूर्णागिरि मेले के लिए परिवार के साथ आए 10 साल के एक बच्चे के नदी के बहाव में बहने पर 15 साल का सूरज नदी में कूद गया और कुशलता से उस नन्हें के लिए देवदूत बन गया। सूरज बताता है कि मौत के मुंह से निकालने के इस अनुभव से उसे बेहद संतोष मिला। फिर उसने लोगों को बचाने की ठान ली। अब तक वह 63 डूबते लोगों का सहारा बन चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्णागिरि धाम में शारदा स्नान करने वाले हों या गणपति विसर्जन में असंतुलित होकर बहने वाले या कोई और, सूरज हर जान को बचाने के लिए पूरी हिम्मत से प्रयास करता है। सितंबर 2019 में इसी फेर में उसकी जान को भी खतरा हो गया था। सूरज बताता है कि एकाएक पांच लोग एक साथ बह गए तो उन्हें बचाने के दौरान वह खुद डूबते-डूबते बचा। बहरहाल इस झटके से उबरने में उसे 13 दिन लगे और फिर से वह जिंदगी बचाने के काम में जुट गया है।
स्वरोजगार से दिया पलायन का जवाब
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट के पास के गांव रायनगर चौड़ी के राजेश राय (39) युवाओं के साथ-साथ पलायन से जूझ रहे लोगों के लिए भी मिसाल बने हुए हैं। पीजी करने के बाद उन्होंने गांव छोड़ने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार की नई पहल शुरू की। कई प्रयोग करते हुए अब वे बेकरी के व्यवसाय में तीन लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं और सात लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
स्वर्गीय धर्मानंद राय के बेटे राजेश राय ने 2003 से चार साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में पीसीओ लगा संचार सेवा से जोड़ने का काम किया। बाद में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कांटे और वाटर प्यूरीफायर के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम किया। 2009 से उन्होंने राय बेकर्स की स्थापना कर स्वरोजगार की शानदार पहल की। अपने हुनर और उद्योग विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने इस काम को खूब फैलाया। आधुनिक तौर-तरीकों का उपयोग करते हुए इस व्यवसाय से वे तीन लाख रुपये से अधिक सालाना आय करने के साथ ही सात लोगों को स्वरोजगार भी दे रहे हैं।
स्वामी जी की विरासत की हो रही अनदेखी
चंपावत। शिकागो धर्म सम्मेलन के जरिए सात समुंदर पार आध्यात्मिक पताका फहराने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का दुनियाभर में डंका है लेकिन इस जिले में उनकी विरासत से जुड़े स्थानों की अनदेखी हो रही है। दियूरी के पास उनकी स्मृतियों को सहेजने वाले डाक बंगले का भी कोई खैरख्वाह नहीं है। यह बंगला अब पूरी तरह वीरान पड़ा है। अब प्रशासन ने इसे संवारने की बात कही है।
स्वामी जी की स्मृति से जुड़ा एक बंगला यहां से 25 किमी दूर दियूरी में है। मायावती आश्रम के अध्यक्ष स्वामी शुद्धिदानंद महाराज बताते हैं कि स्वामी जी अपने गुरु भाई और श्रीरामकृष्ण देव के दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद, स्वामी विरजानंद और अल्मोड़ा के लाला गोविंद लाल शाह 19 जनवरी 1901 को यहां रुके भी थे। यहां स्वामी जी और उनके साथियों ने घी-भात खाया था।
दियूरी के ग्रामीण नंदाबल्लभ, जोहर सिंह आदि का कहना है कि दूयरी के बंगले में स्वामी जी ने रात बिताई थी। दो कमरे वाले इस बंगले के हाल बेहद खराब हैं। देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। भवन की हालत इस लायक नहीं है कि कोई इसमें रह सके। यहां तक कि देखरेख के लिए एक अदद चौकीदार भी नहीं है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में दियूरी डाक बंगले के लिए आगणन बनाया जाएगा।
आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की स्मृति से जुड़े स्थानों को सहेजने के प्रस्तावित मायावती आश्रम-श्यामलाताल सर्किट में दिूयरी को भी जोड़ा जाएगा। ताकि इस स्थान की जानकारी सैलानियों को भी मिल सकेगी। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम।
स्वामी जी ने अद्वैत आश्रम मायावती में मनाया था 38वां जन्मदिन
लोहाघाट(चंपावत)। स्वामी विवेकानंद जी को पहाड़ बहुत भाते थे। 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी जी ने अपना 38वां जन्मदिन यहां से नौ किमी दूर अद्वैत आश्रम मायावती में मनाया। 1890 में वह पहली बार अल्मोड़ा आए। घने, खूबसूरत जंगल और ऊंची पर्वत श्रृंखला उन्हें सम्मोहित करती थी।
1893 में शिकागों में हुए विश्व धर्म सम्मेलन से हिंदू धर्म की पताका फहराने वाले स्वामी जी चार साल बाद 1897 में दूसरी बार अल्मोड़ा आए थे। स्वामी जी ने 1898 में एक बार फिर अल्मोड़ा की यात्रा करते हुए बद्रीनाथ जी के दर्शन किए। उनके जीवन की अंतिम यात्रा अद्वैत आश्रम मायावती की थी जहां वे 1901 में तीन जनवरी को काठगोदाम से पैदल चलते हुए प्रतिकूल मौसम में यहां पहुंचे थे। तब स्वामी जी 15 दिन तक लोहाघाट रुके थे। इस दौरान यहां की पहाड़ियां बर्फ से ढकी रहीं।
मायावती आश्रम के अध्यक्ष स्वामी शुद्धिदानंद महाराज बताते हैं कि स्वामी जी ने हिमालय क्षेत्र में जिस स्थान की परिकल्पना की थी उसे उनके मित्र कैप्टन सेबियर ने पूरा कर दिया। स्वामी जी ने स्विटजरलैंड के भ्रमण के दौरान उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में ऐसे स्थान की परिकल्पना की थी जिसे देखकर वह भावविभोर हो गए और उनकी थकान भी दूर हो गई।

इस महापुरुष के यहां चरण पड़ने पर यहां की धरती व लोग धन्य हो गए। स्वामी जी की परिकल्पना के अनुसार अद्वैत आश्रम मायावती को ऐसा केंद्र बनाया गया जहां से विश्व के लिए अद्वैत व वेदांत की रसधारा प्रवाहित होने लगी। आज यह स्थान आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने वाले लोगों के लिए तीर्थस्थल है। इस स्थान में धर्मार्थ अस्पताल की स्थापना की गई है जहां सही मायने में मानव को देव मान सेवा की जाती है।

 तैराक सूरज शर्मा।

तैराक सूरज शर्मा।- फोटो : CHAMPAWAT

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed