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फरवरी के बाद शुरू होगा दरारें भरने का काम

Sat, 10 Oct 2015 10:24 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sat, 10 Oct 2015 10:24 PM IST
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Mother Purnagiri Dham

जिले को देशभर में पहचान देने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी की दरार के समाधान को लेकर शासन गंभीर है। दरारों को भरने का काम अगले साल फरवरी के बाद शुरू हो सकेगा, जबकि फरवरी 2016 तक इससे संबंधित विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली जाएगी। दरारों के ट्रीटमेंट का जिम्मा उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट (यूडीआरपी) को सौंपा गया है, जबकि इस काम के लिए सलाह और सुपरविजन देने का जिम्मा कंसलटेंट एजेंसी का होगा।

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आपदा नियंत्रण विभाग के अपर सचिव एवं कार्यक्रम प्रबंधक (पीएम) सी रवि शंकर ने बताया कि ग्रीस की ओमी कारन कप्पा के अलावा पुणे की जैनेस्ट्रो और गुड़गांव की इंडस कंसलटेंट कंपनी को मिलाकर ज्वाइंट वेंचर बनाया गया है। विशेषज्ञता रखने वाली इन तीनों कंपनियों के मार्गदर्शन और तकनीकी सलाह से कार्य किया जाएगा। कंसलटेंट में आने वाले खर्च के लिए विश्व बैंक (आईबीआरडी) धन मुहैय्या कराएगा, जबकि डीपीआर के लिए वित्त पोषण की विश्व बैंक से बात चल रही है। आस्था के धाम मां पूर्णागिरि की पहाड़ी में दरारों के कारणों को जानने के लिए भूगर्भ शास्त्री और भूगर्भ तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।
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दरारों के कारण और इसके समाधान के साथ ही डीपीआर को फरवरी 2016 तक तैयार कर लिया जाएगा। जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि मां पूर्णागिरि ट्रीटमेंट मद में जिले के पास 1.13 करोड़ रुपये वर्षों से पड़े हैं। 2008 के बाद सबसे पहले मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी में कई जगह करीब 5 इंच चौड़ी दरार नजर आई थी। ये दरार बीते सात वर्षों में इक्का-दुक्का जगह और चौड़ी हो गई है।

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