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शुल्क वृद्धि भरेगा जिला पंचायत का खजाना लेकिन कम करेगा स्वरोजगार के मौके
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चंपावत। कोरोना काल में रोजगार घटने के बावजूद अब गांवों में छोटे कारोबार की राह भी कठिन हो रही है। इसकी वजह छोटे-छोटे स्वरोजगार के कार्यों के लिए जिला पंचायत का शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है। कई नए कारोबारों पर भी लाइसेंस शुल्क वसूली का प्रस्ताव है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना कारोबार करने वालों को लाइसेंस शुल्क बढ़ाने से आर्थिक चपत लगेगी। खास बात यह कि शराब के गोदामों पर लाइसेंस शुल्क नहीं बढ़ाया गया है जबकि किताब विक्रेता, नमकीन, दूध डेयरी, मुर्गीचारा जैसे व्यवसायों से पहली बार शुल्क वसूलने से इन पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है।
जिला पंचायत ने लाइसेंस शुल्क की दर में 16 से 300 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। बिस्कुट फैक्टरी, साबुन फैक्टरी, साइकिल मरम्मत, मुर्गीपालन, मछलीपालन, कारपेंटर, फर्नीचर, किताबों की दुकान आदि गतिविधियों में शुल्क बढ़ाया गया है। सबसे कम 16 प्रतिशत शुल्क शराब की दुकान में बढ़ा है जबकि सबसे ज्यादा 300 प्रतिशत शुल्क बिस्कुट की फैक्टरी पर बढ़ाया गया है। मोबाइल टावर, शराब के गोदाम, राइस मिल जैसे कारोबारियों पर लाइसेंस शुल्क की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं 23 से अधिक नए क्षेत्रों में पहली बार लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा। प्रदीप शर्मा सहित कई ग्रामीण उद्यमियों का कहना है कि पंचायत की इस नीति से नए और छोटे उद्यमी हतोत्साहित होंगे। हालांकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 2700 दुकानों में से लाइसेंस वाली दुकानें सिर्फ 425 हैं।
इन व्यवसायों में पहली बार प्रस्तावित किया गया लाइसेंस शुल्क
नमकीन, बेकरी, व्यायामशाला, मुर्गी चारा, दूध डेयरी, साहसिक पर्यटन, जड़ीबूटी के गोदाम, रंधा मशीन, गमला, बॉक्स-अलमारी उद्योग, जन सुविधा केंद्र, दर्जी, बर्तन, कपड़े की दुकान, फल-सब्जी थोक कारोबार, मेडिकल स्टोर, सेकेंड हैंड शोरूम, डिस्पोजेबल गिलास, प्लास्टिक सामग्री निर्माण, मिनरल वाटर प्लांट, पेय पदार्थ कंपनी, केला राइपिंग प्लांट, हॉटमिक्स प्लांट।
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वर्ष लक्ष्य उपलब्धि (लाख रुपये में)
2020-21 17.70 15.41
2021-22 16.25 12.87
2022-23 16.50 1.12 (जून तक)
लाइसेंस शुल्क लगाने और दरों में संशोधन का प्रस्ताव इसी साल मार्च में हुई बोर्ड की बैठक में पारित हुआ है। इसके लिए नागरिकों से 18 जुलाई तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। शासकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से नई दरें लागू होंगी। - भगवत पाटनी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।
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जिला पंचायत ने लाइसेंस शुल्क की दर में 16 से 300 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। बिस्कुट फैक्टरी, साबुन फैक्टरी, साइकिल मरम्मत, मुर्गीपालन, मछलीपालन, कारपेंटर, फर्नीचर, किताबों की दुकान आदि गतिविधियों में शुल्क बढ़ाया गया है। सबसे कम 16 प्रतिशत शुल्क शराब की दुकान में बढ़ा है जबकि सबसे ज्यादा 300 प्रतिशत शुल्क बिस्कुट की फैक्टरी पर बढ़ाया गया है। मोबाइल टावर, शराब के गोदाम, राइस मिल जैसे कारोबारियों पर लाइसेंस शुल्क की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं 23 से अधिक नए क्षेत्रों में पहली बार लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा। प्रदीप शर्मा सहित कई ग्रामीण उद्यमियों का कहना है कि पंचायत की इस नीति से नए और छोटे उद्यमी हतोत्साहित होंगे। हालांकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 2700 दुकानों में से लाइसेंस वाली दुकानें सिर्फ 425 हैं।
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इन व्यवसायों में पहली बार प्रस्तावित किया गया लाइसेंस शुल्क
नमकीन, बेकरी, व्यायामशाला, मुर्गी चारा, दूध डेयरी, साहसिक पर्यटन, जड़ीबूटी के गोदाम, रंधा मशीन, गमला, बॉक्स-अलमारी उद्योग, जन सुविधा केंद्र, दर्जी, बर्तन, कपड़े की दुकान, फल-सब्जी थोक कारोबार, मेडिकल स्टोर, सेकेंड हैंड शोरूम, डिस्पोजेबल गिलास, प्लास्टिक सामग्री निर्माण, मिनरल वाटर प्लांट, पेय पदार्थ कंपनी, केला राइपिंग प्लांट, हॉटमिक्स प्लांट।
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वर्ष लक्ष्य उपलब्धि (लाख रुपये में)
2020-21 17.70 15.41
2021-22 16.25 12.87
2022-23 16.50 1.12 (जून तक)
लाइसेंस शुल्क लगाने और दरों में संशोधन का प्रस्ताव इसी साल मार्च में हुई बोर्ड की बैठक में पारित हुआ है। इसके लिए नागरिकों से 18 जुलाई तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। शासकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से नई दरें लागू होंगी। - भगवत पाटनी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।