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मिट जाएगी चूका और रूपालीगाड़ की दूरी
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) सड़क के तहत 690 मीटर लंबा पुल दिसंबर 2022 तक पूरा हो जाएगा। पांच साल से लटके इस पुल की निविदा बृहस्पतिवार को हो गई है। लधिया नदी पर 37.56 करोड़ रुपये में बनने वाले पुल का निर्माण उत्तर प्रदेश सेतु निगम करेगा।
टीजे सड़क पर चूका और रुपालीगाड़ को जोड़ने के लिए बनने वाले इस पुल का जिम्मा 2016 में ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रांस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को दिया गया था। उसे जून 2019 में पुल को तैयार करना था, लेकिन विवाद के चलते छिटपुट सर्वे के अलावा काम ही शुरू नहीं हो सका था। काम में ढिलाई की वजह से शासन ने अक्तूबर 2020 में पुल की एजेंसी लोनिवि की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) की थी। एजेंसी बदलने के सात माह बाद पीआईयू ने निविदा प्रक्रिया को पूरा कर दिया। 690 मीटर पुल की तकनीकी नीलामी 13 मई और वित्तीय नीलामी बृहस्पतिवार को हुई। पीआईयू के ईई बीसी पंत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सेतु निगम को इस पुल को दिसंबर 2022 तक पूरा करना होगा।
एसएसबी की बीओपी तक मजबूत होगा आधारभूत ढांचा
चंपावत। नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी तेज करने और एसएसबी की बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) तक सशक्त आधारभूत ढांचा बनाने के लिए बनाई जा रही टीजे रोड बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पर स्थित बीओपी तक पहुंच को सुगम बनाने के साथ सीमा पर चौकसी के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। सीमा सुरक्षा के लिए इस इलाके में एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 सड़क से कटी है। इस वजह से यहां सामान पहुंचाने में देरी और लागत भी ज्यादा आती है। इस पुल के बनने के बाद इन दिक्कतों से निजात मिल सकेगी। (संवाद)
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दूसरे पैकेज के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है यह पुल
चंपावत। टीजे सड़क का पहला पैकेज (17.875 किमी लंबा ठुलीगाड़ से चूका) में अधिकांश काम पूरा हो चुका है। जून तक इस पहले पैकेज का बकाया काम भी पूरा हो जाएगा, लेकिन इस सड़क के दूसरे पैकेज चूका-रुपालीगाड़ (24.400 किमी) को मिलाने में यह पुल सबसे अहम कड़ी है। अलबत्ता नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निर्माण संबंधी अड़चन खत्म हो गई है। दिसंबर तक यह काम पूरा करा लिया जाएगा। करीब 123 करोड़ रुपये से बनने वाले चूका-रुपालीगाड़ का काम भी अगस्त 2017 से पूरे 39 महीने तक निविदा विवाद की वजह से लटका रहा। जिसे बाद में आर्बिट्रेशन से क्लीन चिट देने और सरकार की अनुमति के बाद दिसंबर 2020 में शुरू कराया जा सका। अब सड़क की कटिंग का 50 प्रतिशत से ज्यादा काम कराया जा चुका है। (संवाद)
कोट
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण टीजे सड़क पर चूका से रुपालीगाड़ के बीच 690 मीटर लंबे पुल के निर्माण का जिम्मा शासन को दिया। अब निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद तुरंत जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कहा जा रहा है। दिसंबर 2022 के निर्धारित समय में इस पुल को हर हाल में पूरा कराया जाएगा।
- विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।
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टीजे सड़क पर चूका और रुपालीगाड़ को जोड़ने के लिए बनने वाले इस पुल का जिम्मा 2016 में ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रांस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को दिया गया था। उसे जून 2019 में पुल को तैयार करना था, लेकिन विवाद के चलते छिटपुट सर्वे के अलावा काम ही शुरू नहीं हो सका था। काम में ढिलाई की वजह से शासन ने अक्तूबर 2020 में पुल की एजेंसी लोनिवि की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) की थी। एजेंसी बदलने के सात माह बाद पीआईयू ने निविदा प्रक्रिया को पूरा कर दिया। 690 मीटर पुल की तकनीकी नीलामी 13 मई और वित्तीय नीलामी बृहस्पतिवार को हुई। पीआईयू के ईई बीसी पंत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सेतु निगम को इस पुल को दिसंबर 2022 तक पूरा करना होगा।
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एसएसबी की बीओपी तक मजबूत होगा आधारभूत ढांचा
चंपावत। नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी तेज करने और एसएसबी की बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) तक सशक्त आधारभूत ढांचा बनाने के लिए बनाई जा रही टीजे रोड बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पर स्थित बीओपी तक पहुंच को सुगम बनाने के साथ सीमा पर चौकसी के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। सीमा सुरक्षा के लिए इस इलाके में एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 सड़क से कटी है। इस वजह से यहां सामान पहुंचाने में देरी और लागत भी ज्यादा आती है। इस पुल के बनने के बाद इन दिक्कतों से निजात मिल सकेगी। (संवाद)
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दूसरे पैकेज के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है यह पुल
चंपावत। टीजे सड़क का पहला पैकेज (17.875 किमी लंबा ठुलीगाड़ से चूका) में अधिकांश काम पूरा हो चुका है। जून तक इस पहले पैकेज का बकाया काम भी पूरा हो जाएगा, लेकिन इस सड़क के दूसरे पैकेज चूका-रुपालीगाड़ (24.400 किमी) को मिलाने में यह पुल सबसे अहम कड़ी है। अलबत्ता नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निर्माण संबंधी अड़चन खत्म हो गई है। दिसंबर तक यह काम पूरा करा लिया जाएगा। करीब 123 करोड़ रुपये से बनने वाले चूका-रुपालीगाड़ का काम भी अगस्त 2017 से पूरे 39 महीने तक निविदा विवाद की वजह से लटका रहा। जिसे बाद में आर्बिट्रेशन से क्लीन चिट देने और सरकार की अनुमति के बाद दिसंबर 2020 में शुरू कराया जा सका। अब सड़क की कटिंग का 50 प्रतिशत से ज्यादा काम कराया जा चुका है। (संवाद)
कोट
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण टीजे सड़क पर चूका से रुपालीगाड़ के बीच 690 मीटर लंबे पुल के निर्माण का जिम्मा शासन को दिया। अब निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद तुरंत जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कहा जा रहा है। दिसंबर 2022 के निर्धारित समय में इस पुल को हर हाल में पूरा कराया जाएगा।
- विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।