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... और अब दुल्हन के घर जाए बगैर हो गए सात फेरे
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चंपावत। कोरोना काल में शादी-ब्याह में अजीबो-गरीब हालात पैदा हो रहे हैं। शादी के बाद कहीं दुल्हन मायके में आइसोलेट है तो अब विवाह के लिए दुल्हन को शादी के लिए दूल्हे के घर आना पड़ा। विवाह में दुल्हन पक्ष से दुल्हन, उसके माता-पिता और पंडित जी ही आए। बुधवार को हुए इस विवाह में यह नौबत वर पक्ष के गांव स्वांला के एक दिन पहले यानी 11 मई को कंटेनमेंट जोन बन जाने से आई।
स्वांला गांव के डुंगर देव के बेटे प्रकाश भट्ट की बरात 12 मई को पुनावे में रमेश बिनवाल की बेटी प्रियंका के घर जानी थी, लेकिन 47 लोगों के कोरोना संक्रमित होने से स्वांला गांव को 11 मई को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया। जोन बनने से संबंधित गांव में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
इस कारण बुधवार सुबह पुलिस ने स्वांला से बरात न ले जाने की सूचना दूल्हे के पिता को दी। इससे दोनों पक्षों में हड़कंप मच गया। बाद में किसी तरह प्रशासन ने सशर्त विवाह के आयोजन की इजाजत दी। इसके तहत बरात को कंटेनमेंट जोन वाले गांव स्वांला से पुनावे नहीं ले जाने के आदेश दिए गए।
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इसके बजाय दुल्हन पक्ष को विवाह की रस्म दूल्हे के गांव स्वांला में करने के लिए कहा गया। इसके लिए दुल्हन पक्ष के चार लोग (दुल्हन, दुल्हन की मां भावना देवी, पिता रमेश बिनवाल और पंडित रघुवर दत्त) को पुनावे से स्वांला जाने की इजाजत दी गई। इसके बाद बुधवार शाम को स्वांला में प्रशासनिक मौजूदगी में पीपीई किट पहनकर विवाह की रस्म अदा की गई।
सात फेरों के बाद विवाह की रस्म पूरी हुई। वहीं विवाह के स्वांला में होने से पुनावे गांव में की गई दुल्हन पक्ष की सारी तैयारी धरी रह गई। दुल्हन को हल्दी लगाते समय मायका पक्ष को इस बदलाव की सूचना मिल सकी।
स्वांला गांव में 10 मई को 47 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसी कारण 11 मई को इस गांव को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया था। यहां से किसी का दूसरी जगह जाना या दूसरी जगह से यहां आना प्रतिबंधित कर दिया गया। इसलिए बरात को स्वांला से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई। बाद में विशेष परिस्थितियों में दुल्हन पक्ष के चार लोगों को विवाह के लिए स्वांला जाने की अनुमति दे दी गई। दुल्हन को छोड़ पुनावे से स्वांला गए तीन लोगों को उनके गांव पुनावे में आइसोलेट किया जाएगा। - ज्योति धपवाल, तहसीलदार, चंपावत।
सामाजिक कार्यकर्ता सामंत की पहल आई काम
चंपावत। कोविड कर्फ्यू के बीच प्रियंका और प्रकाश का विवाह बुधवार सुबह खटाई में पड़ गया था। पुलिस ने जब दूल्हे के घर फोन कर बरात ले जाने की इजाजत नहीं दी, तो सभी सन्न रह गए।
दूल्हे के भाई बीडीसी सदस्य हेम भट्ट ने तुरंत पूर्व जिला पंचायत सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सामंत को फोन कर मदद मांगी। इस पर सामंत ने पुलिस और प्रशासन से बात कर बीच का रास्ता निकाला।
वहीं गांव के लोगों ने प्रशासन पर समय से जानकारी न देने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। कहा कि दुल्हन पक्ष की तैयारियां धरीं रह गईं।
बेलखेत से दुल्हन बिना विदा हुई थी बरात
चंपावत। ऊधमसिंह नगर जिले के चकरपुर से बेलखेत गांव में आठ मई को हुई बरात भी अजीबोगरीब रही। यह बरात तो संपन्न हुई, लेकिन दुल्हन सीमा अपने पति पंकज अधिकारी के साथ नहीं जा सकी, बल्कि मायके में ही रहने को मजबूर हुई।
ऐसा दुल्हन के कोरोना संक्रमित आने की वजह से हुआ। दुल्हन को आइसोलेशन की अवधि पूरी होने के बाद ससुराल चकरपुर भेजा जाएगा।
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स्वांला गांव के डुंगर देव के बेटे प्रकाश भट्ट की बरात 12 मई को पुनावे में रमेश बिनवाल की बेटी प्रियंका के घर जानी थी, लेकिन 47 लोगों के कोरोना संक्रमित होने से स्वांला गांव को 11 मई को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया। जोन बनने से संबंधित गांव में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
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इस कारण बुधवार सुबह पुलिस ने स्वांला से बरात न ले जाने की सूचना दूल्हे के पिता को दी। इससे दोनों पक्षों में हड़कंप मच गया। बाद में किसी तरह प्रशासन ने सशर्त विवाह के आयोजन की इजाजत दी। इसके तहत बरात को कंटेनमेंट जोन वाले गांव स्वांला से पुनावे नहीं ले जाने के आदेश दिए गए।
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इसके बजाय दुल्हन पक्ष को विवाह की रस्म दूल्हे के गांव स्वांला में करने के लिए कहा गया। इसके लिए दुल्हन पक्ष के चार लोग (दुल्हन, दुल्हन की मां भावना देवी, पिता रमेश बिनवाल और पंडित रघुवर दत्त) को पुनावे से स्वांला जाने की इजाजत दी गई। इसके बाद बुधवार शाम को स्वांला में प्रशासनिक मौजूदगी में पीपीई किट पहनकर विवाह की रस्म अदा की गई।
सात फेरों के बाद विवाह की रस्म पूरी हुई। वहीं विवाह के स्वांला में होने से पुनावे गांव में की गई दुल्हन पक्ष की सारी तैयारी धरी रह गई। दुल्हन को हल्दी लगाते समय मायका पक्ष को इस बदलाव की सूचना मिल सकी।
स्वांला गांव में 10 मई को 47 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसी कारण 11 मई को इस गांव को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया था। यहां से किसी का दूसरी जगह जाना या दूसरी जगह से यहां आना प्रतिबंधित कर दिया गया। इसलिए बरात को स्वांला से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई। बाद में विशेष परिस्थितियों में दुल्हन पक्ष के चार लोगों को विवाह के लिए स्वांला जाने की अनुमति दे दी गई। दुल्हन को छोड़ पुनावे से स्वांला गए तीन लोगों को उनके गांव पुनावे में आइसोलेट किया जाएगा। - ज्योति धपवाल, तहसीलदार, चंपावत।
सामाजिक कार्यकर्ता सामंत की पहल आई काम
चंपावत। कोविड कर्फ्यू के बीच प्रियंका और प्रकाश का विवाह बुधवार सुबह खटाई में पड़ गया था। पुलिस ने जब दूल्हे के घर फोन कर बरात ले जाने की इजाजत नहीं दी, तो सभी सन्न रह गए।
दूल्हे के भाई बीडीसी सदस्य हेम भट्ट ने तुरंत पूर्व जिला पंचायत सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सामंत को फोन कर मदद मांगी। इस पर सामंत ने पुलिस और प्रशासन से बात कर बीच का रास्ता निकाला।
वहीं गांव के लोगों ने प्रशासन पर समय से जानकारी न देने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। कहा कि दुल्हन पक्ष की तैयारियां धरीं रह गईं।
बेलखेत से दुल्हन बिना विदा हुई थी बरात
चंपावत। ऊधमसिंह नगर जिले के चकरपुर से बेलखेत गांव में आठ मई को हुई बरात भी अजीबोगरीब रही। यह बरात तो संपन्न हुई, लेकिन दुल्हन सीमा अपने पति पंकज अधिकारी के साथ नहीं जा सकी, बल्कि मायके में ही रहने को मजबूर हुई।
ऐसा दुल्हन के कोरोना संक्रमित आने की वजह से हुआ। दुल्हन को आइसोलेशन की अवधि पूरी होने के बाद ससुराल चकरपुर भेजा जाएगा।