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देवीधुरा में बगवाल के दिन बंद रहेंगे बाजार
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मां बाराही धाम देवीधुरा।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना महामारी के खतरे के मद्देनजर मां बाराही धाम देवीधुरा में पहली बार लोग बगवाल नहीं होगी। रक्षाबंधन के दिन तीन अगस्त को बगवाल की रस्म निभाई जाएगी। वहीं बगवाल वाले दिन देवीधुरा का बाजार भी नहीं खुलेगा। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि बाहरी लोगों की आवाजाही नहीं होने से दुकानों को खोले जाने का कोई औचित्य नहीं हैै। अलबत्ता इसे लेकर तीन दिन के भीतर मंदिर समिति के साथ प्रशासनिक अफसर बैठक कर बाजार के अलावा अन्य व्यवस्थाओं पर मंथन होगा।
मां बाराही मंदिर समिति के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया ने बताया कि सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया जाएगा। हर खाम के तीन-चार प्रतिनिधि एक साथ मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना कर सकेंगी। बगवाल के स्थान पर हर खाम एक-एक फर्रे के साथ बारी-बारी से परिक्रमा करेगा। पूजा-अर्चना व मंदिर की परिक्रमा करने के बाद ये बगवाली वीर अपने घरों को चले जाएंगे। सामान्य रूप से बगवाल में चार (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग)खाम और सात तोकों के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना के बाद फल-फूलों से बगवाल खेलते हैं।
मां पूर्णागिरि धाम में बंद है श्रद्धालुओं की आवाजाही
चंपावत। चारधाम यात्रा को शर्तों के साथ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। मगर जिले के सबसे बड़े मां पूर्णागिरि धाम में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही एकदम बंद है। इस वक्त न तो जिले के और नहीं प्रदेश के किसी अन्य जगह के श्रद्धालु आ रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि बरसात में खतरे के मद्देनजर आवाजाही वैसे भी कम होती रही है, मगर इस बार कोरोना महामारी के अंदेशे के चलते श्रद्धालुओं की आमद एकदम बंद हो गई है। पूर्णागिरि क्षेत्र के अधिकांश कारोबारी भी अपने घरों को चले गए हैं।
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बालेश्वर मंदिर मेें पहले सैनिटाइज फिर दर्शन
चंपावत। बालेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु उमड़ते रहे हैं। लेकिन इस बार कोरोना की मार ने मंदिरों को सूना कर दिया है। अलबत्ता सावन में छिटपुट रूप से श्रद्धालु आ रहे हैं। महंत भैरव गिरि बताते हैं कि कोरोना महामारी के खतरे से बचने के लिए हर श्रद्धालु का नाम व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज कराया जा रहा है। साथ ही शिवलिंग में जलाभिषेक से पूर्व श्रद्धालुओं को सैनिटाइज कराया जा रहा है।
अषाड़ी महोत्सव में नहीं होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां
लोहाघाट (चंपावत)। चामी-चौमेल का पांच दिनी अषाड़ी महोत्सव कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया है। इस वर्ष महोत्सव में न देव रथ यात्राएं निकलेंगी और न ही शैक्षिक, सांस्कृतिक, खेलकूद गतिविधियां नहीं होंगी। रक्षाबंधन के दिन तीन अगस्त को परंपरा को पूरा करने के लिए मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोरोना के मद्देनजर पांच दिवसीय अषाड़ी महोत्सव के ज्यादातर कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए मुख्य मेले रक्षाबंधन के दिन मंदिर में पूजा-अर्चना की जाएगी। इस वर्ष देवरथ यात्राएं नहीं निकाली जाएंगी। बैठक में विजय सिंह, रमेश सिंह, शिवदत्त, सतीश, प्रकाश सिंह, पूरन राम, मोहन सिंह, टीका सिंह, संजय राम, बहादुर बिष्ट, सुरेश सिंह, सोबन सिंह, ईश्वर सिंह, कुंदन सिंह आदि मौजूद थे। संवाद
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मां बाराही मंदिर समिति के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया ने बताया कि सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया जाएगा। हर खाम के तीन-चार प्रतिनिधि एक साथ मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना कर सकेंगी। बगवाल के स्थान पर हर खाम एक-एक फर्रे के साथ बारी-बारी से परिक्रमा करेगा। पूजा-अर्चना व मंदिर की परिक्रमा करने के बाद ये बगवाली वीर अपने घरों को चले जाएंगे। सामान्य रूप से बगवाल में चार (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग)खाम और सात तोकों के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना के बाद फल-फूलों से बगवाल खेलते हैं।
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मां पूर्णागिरि धाम में बंद है श्रद्धालुओं की आवाजाही
चंपावत। चारधाम यात्रा को शर्तों के साथ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। मगर जिले के सबसे बड़े मां पूर्णागिरि धाम में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही एकदम बंद है। इस वक्त न तो जिले के और नहीं प्रदेश के किसी अन्य जगह के श्रद्धालु आ रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि बरसात में खतरे के मद्देनजर आवाजाही वैसे भी कम होती रही है, मगर इस बार कोरोना महामारी के अंदेशे के चलते श्रद्धालुओं की आमद एकदम बंद हो गई है। पूर्णागिरि क्षेत्र के अधिकांश कारोबारी भी अपने घरों को चले गए हैं।
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बालेश्वर मंदिर मेें पहले सैनिटाइज फिर दर्शन
चंपावत। बालेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु उमड़ते रहे हैं। लेकिन इस बार कोरोना की मार ने मंदिरों को सूना कर दिया है। अलबत्ता सावन में छिटपुट रूप से श्रद्धालु आ रहे हैं। महंत भैरव गिरि बताते हैं कि कोरोना महामारी के खतरे से बचने के लिए हर श्रद्धालु का नाम व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज कराया जा रहा है। साथ ही शिवलिंग में जलाभिषेक से पूर्व श्रद्धालुओं को सैनिटाइज कराया जा रहा है।
अषाड़ी महोत्सव में नहीं होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां
लोहाघाट (चंपावत)। चामी-चौमेल का पांच दिनी अषाड़ी महोत्सव कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया है। इस वर्ष महोत्सव में न देव रथ यात्राएं निकलेंगी और न ही शैक्षिक, सांस्कृतिक, खेलकूद गतिविधियां नहीं होंगी। रक्षाबंधन के दिन तीन अगस्त को परंपरा को पूरा करने के लिए मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोरोना के मद्देनजर पांच दिवसीय अषाड़ी महोत्सव के ज्यादातर कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए मुख्य मेले रक्षाबंधन के दिन मंदिर में पूजा-अर्चना की जाएगी। इस वर्ष देवरथ यात्राएं नहीं निकाली जाएंगी। बैठक में विजय सिंह, रमेश सिंह, शिवदत्त, सतीश, प्रकाश सिंह, पूरन राम, मोहन सिंह, टीका सिंह, संजय राम, बहादुर बिष्ट, सुरेश सिंह, सोबन सिंह, ईश्वर सिंह, कुंदन सिंह आदि मौजूद थे। संवाद