{"_id":"5d52eecb8ebc3e6d1a13f79a","slug":"maa-barahi-dham-devidhura-champawat-news-hld3528254113","type":"story","status":"publish","title_hn":"भीम शिला से पांडवों का रहा है खास ताल्लुक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भीम शिला से पांडवों का रहा है खास ताल्लुक
विज्ञापन
देवीधुरा में स्थित भीम शिला।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मां बाराही धाम देवीधुरा की भीम शिला का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। इसे लेकर कई मान्यताएं भी हैं। मां बाराही धाम के पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ शास्त्री का मानना है कि पांडवों के यहां आने से पूर्व मां बाराही की स्थापना इस स्थान पर हो चुकी होगी अन्यथा वे यहां अन्य देवी-देवता की स्थापना कर सकते थे।
प्राचीनकाल से मान्यता रही है कि किसी क्षेत्र में कोई एक देवी-देवता निवास स्थापित है तो वहां उसी की प्रधानता रहती है। भीम शिला एक विशालकाय शिला है। इस शिला पर प्रमाण चिन्हित है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया और वह इस शिला के ऊपर चौपड़ खेला करते थे। शिला पर चौपड़ के लिए चौकियां बनी हुई हैं।
किवदंतियों के अनुसार जब पांडव इस शिला के ऊपर चौपड़ खेल रहे थे, तब उनके साथ शक्ति स्वरूपी मां बाराही एक ग्वालन के रूप में बैठी हुई थीं। इसी बीच किसी बात पर भीम को क्रोध आया और ग्वालन इस शिला के भीतर समा गईं।
विज्ञापन
आज भी इस शिला के एक भाग को थपथपाने पर ऐसा लगता है कि यह खोखली है। भीम ने ग्वालन की तलाश में इस शिला के दो हिस्से कर दिए लेकिन वह भूल गए कि उनके सभी भाई शिला के ऊपर बैठे चौपड़ खेल रहे हैं।
उसी समय शिला दो भागों में विभक्त होकर गिरने लगी थी। भीम ने पास में रखी एक छोटी शिला को विभक्त करने वाले जोड़ पर रख दिया जिसके शिला गिरने से बच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी शिला पर भीम के हाथ, पंजों और तलवार से विभक्त किए गए निशान दिखते हैं।
अब नहीं दी जा रही अठवार
पाटी/देवीधुरा। बगवाल मेले के दौरान 2013 से पशुबलि के रूप में अठवार दी जाती थी। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर में अष्ट बलि और अठवार के तहत बकरे, कटरे, मुर्गों आदि की बलि देने की परंपरा थी लेकिन पीपुल्स एनीमल नामक गैर सरकारी संस्था की गीता मौलेखी की ओर से उच्च न्यायालय में दायर रिट के बाद आए फैसले के बाद मंदिर में पशुबलि के रूप में अठवार दिए जाने की परंपरा पर रोक लग गई है। इस आदेश का यहां पूरी तरह पालन हो रहा है।
एनएसएस और स्काउट छात्र कर रहे हैं सहयोग
बगवाल मेले में व्यवस्था बनाने में देवीधुरा जीआईसी और संस्कृत महाविद्यालय के छात्र सहयोग कर रहे हैं। प्रधानाचार्य दिनेश जोशी के मार्गदर्शन में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्रनाथ गोस्वामी, सहायक प्रभारी हेमंत बिनवाल, स्काउट प्रभारी राकेश चंद्र शर्मा और शकुंतला बोहरा के नेतृत्व में 21 छात्र शांति व्यवस्था से लेकर साफ-सफाई तक में सहयोग कर रहे हैं। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने भी इन स्वयंसेवकों की पीठ थपथपाई।
श्रम विभाग ने किया 15 श्रमिकों का पंजीकरण
चंपावत। जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को बाराही धाम देवीधुरा में बहुउद्देशीय जन सुविधा शिविर का आयोजन किया गया। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में श्रम विभाग की ओर से 15 श्रमिकों का पंजीकरण किया गया। जबकि 80 लोगों को परिवार रजिस्टर की नकल जारी की गई। साथ ही वृद्धावस्था पेंशन के 13, विधवा पेंशन के लिए पांच, दिव्यांग पेंशन के लिए चार, तीलू रौतेली के लिए एक, बीपीएल राशनकार्ड के लिए 65 लोगों ने आवेदन किए। इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 17 और मनरेगा के तहत जॉब कार्ड के लिए नौ लोगों का पंजीकरण किया गया। शिविर में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
प्राचीनकाल से मान्यता रही है कि किसी क्षेत्र में कोई एक देवी-देवता निवास स्थापित है तो वहां उसी की प्रधानता रहती है। भीम शिला एक विशालकाय शिला है। इस शिला पर प्रमाण चिन्हित है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया और वह इस शिला के ऊपर चौपड़ खेला करते थे। शिला पर चौपड़ के लिए चौकियां बनी हुई हैं।
विज्ञापन
किवदंतियों के अनुसार जब पांडव इस शिला के ऊपर चौपड़ खेल रहे थे, तब उनके साथ शक्ति स्वरूपी मां बाराही एक ग्वालन के रूप में बैठी हुई थीं। इसी बीच किसी बात पर भीम को क्रोध आया और ग्वालन इस शिला के भीतर समा गईं।
विज्ञापन
आज भी इस शिला के एक भाग को थपथपाने पर ऐसा लगता है कि यह खोखली है। भीम ने ग्वालन की तलाश में इस शिला के दो हिस्से कर दिए लेकिन वह भूल गए कि उनके सभी भाई शिला के ऊपर बैठे चौपड़ खेल रहे हैं।
उसी समय शिला दो भागों में विभक्त होकर गिरने लगी थी। भीम ने पास में रखी एक छोटी शिला को विभक्त करने वाले जोड़ पर रख दिया जिसके शिला गिरने से बच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी शिला पर भीम के हाथ, पंजों और तलवार से विभक्त किए गए निशान दिखते हैं।
अब नहीं दी जा रही अठवार
पाटी/देवीधुरा। बगवाल मेले के दौरान 2013 से पशुबलि के रूप में अठवार दी जाती थी। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर में अष्ट बलि और अठवार के तहत बकरे, कटरे, मुर्गों आदि की बलि देने की परंपरा थी लेकिन पीपुल्स एनीमल नामक गैर सरकारी संस्था की गीता मौलेखी की ओर से उच्च न्यायालय में दायर रिट के बाद आए फैसले के बाद मंदिर में पशुबलि के रूप में अठवार दिए जाने की परंपरा पर रोक लग गई है। इस आदेश का यहां पूरी तरह पालन हो रहा है।
एनएसएस और स्काउट छात्र कर रहे हैं सहयोग
बगवाल मेले में व्यवस्था बनाने में देवीधुरा जीआईसी और संस्कृत महाविद्यालय के छात्र सहयोग कर रहे हैं। प्रधानाचार्य दिनेश जोशी के मार्गदर्शन में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्रनाथ गोस्वामी, सहायक प्रभारी हेमंत बिनवाल, स्काउट प्रभारी राकेश चंद्र शर्मा और शकुंतला बोहरा के नेतृत्व में 21 छात्र शांति व्यवस्था से लेकर साफ-सफाई तक में सहयोग कर रहे हैं। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने भी इन स्वयंसेवकों की पीठ थपथपाई।
श्रम विभाग ने किया 15 श्रमिकों का पंजीकरण
चंपावत। जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को बाराही धाम देवीधुरा में बहुउद्देशीय जन सुविधा शिविर का आयोजन किया गया। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में श्रम विभाग की ओर से 15 श्रमिकों का पंजीकरण किया गया। जबकि 80 लोगों को परिवार रजिस्टर की नकल जारी की गई। साथ ही वृद्धावस्था पेंशन के 13, विधवा पेंशन के लिए पांच, दिव्यांग पेंशन के लिए चार, तीलू रौतेली के लिए एक, बीपीएल राशनकार्ड के लिए 65 लोगों ने आवेदन किए। इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 17 और मनरेगा के तहत जॉब कार्ड के लिए नौ लोगों का पंजीकरण किया गया। शिविर में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

देवीधुरा बहुउ्देश्यीय शिविर में आवेदन जमा कराते ग्रामीण।- फोटो : CHAMPAWAT