Election 2024: चारों ओर चुनावी शोर, छूट रही पंचेश्वर बांध की उम्मीद की डोर; विस्थापन की नहीं बनी योजना
लोकसभा चुनाव के शोर में चंपावत जिले में प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय पंचेश्वर बांध परियोजना की उम्मीदों की बागडोर हाथ से छूटती नजर आ रही है। बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले 134 गांवों के विस्थापन की अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बन सकी है
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लोकसभा चुनाव के शोर में चंपावत जिले में प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय पंचेश्वर बांध परियोजना की उम्मीदों की बागडोर हाथ से छूटती नजर आ रही है। एशिया में सर्वाधिक बिजली उत्पादन के लिए प्रस्तावित परियोजना की अब तक की प्रगति नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली रही है। प्रस्तावित बांध परियोजना से 5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था। बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले के 134 गांवों के विस्थापन की अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बन सकी है
बीते छह दशकों से भारत और पड़ोसी मुल्क नेपाल के बीच राजनीति के केंद्र में रही प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना को जल्द उम्मीदों के पंख लगने की संभावनाएं क्षीण होती जा रही है। बांध निर्माण से जहां भारत और नेपाल के 150 से अधिक गांवों को विस्थापन का दंश झेलना होगा, वहीं 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार का लाभ भी मिल सकेगा।
पंचेश्वर बांध परियोजना का प्रारंभिक सर्वे 1960 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनुसंधान नियोजन विंग ने किया था। 1980 के बाद इस काम को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) को सौंपा गया। भारत और नेपाल सरकार ने सर्वेक्षण कार्य को युद्धस्तर पर संचालित करने के लिए वर्ष 1996 में संयुक्त परियोजना कार्यालय (जेपीओ) स्थापित किया गया था। दोनों देशों के बीच यह परियोजना वर्षों तक अधर में लटकी रही, लेकिन वर्ष 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे के बाद परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद थी। जो एक दशक में भी परवान नहीं चढ़ पाई हैं।
5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा बांध से
60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना में बीते एक दशक से ठहराव की स्थिति है। पंचेश्वर और इसके रेगुलेटिंग बांध रूपालीगाड़ से 5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। पंचेश्वर से 4800 और रूपालीगाड़ से 240 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। पंचेश्वर के अलावा रूपालीगाड़ में बनने वाले रेगुलेटिंग बांध निर्माण के लिए भूमिगत सुरंगों का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
विस्थापन की नहीं बनी योजना : प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में 3.40 लाख से अधिक पेड़ आएंगे। जिनकी गिनती का कार्य वन विभाग ने पूरा कर लिया है। परियोजना से तीन जिलों की 134 ग्राम पंचायतों (पिथौरागढ़ के 87, चंपावत के 26 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव) के 54488 लोग विस्थापित होंगे। जिनके कोई भी कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
बांध के अनुकूल पाई गई है पहाड़ों की क्षमता
पंचेश्वर बांध निर्माण की डीपीआर तैयार कर रही वापकोस कंपनी की ओर से किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार यहां के पहाड़ों की क्षमता बांध के लिए अनुकूल पाई गई है। 315 मीटर ऊंचे प्रस्तावित बांध से 25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जलमग्न होगा। इसके दायरे में झूलाघाट बाजार के अलावा घाट, पनार, सरयू नदी तट पर बने पुल तथा बस्तियां जलमग्न हो जाएंगी। रॉकफिल डिजाइन से बनने वाले बांध की डीपीआर तैयार करने के साथ यहां भूकंपीय दृष्टि से भी सर्वेक्षण उपयुक्त पाया गया है।
पंचेश्वर बांध परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें खत्म होती जा रही है। एक दशक में बांध निर्माण की दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। -गुमान प्रथोली, ग्रामीण।
पंचेश्वर में परियोजना के निर्माण से क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में बढ़ोत्तरी होती और विकास के नए युग का आगाज होता। -नंदाबल्लभ बगौली, ग्रामीण।
केंद्र सरकार को अपने चुनावी मैनीफेस्टों में स्पष्ट करना चाहिए कि बांध परियोजना का निर्माण होगा या नहीं होगा। -ओंकार सिंह धौनी, ग्रामीण।
परियोजना के प्रस्तावित होने के कारण क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बड़े विकास और निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। -शंकर दत्त पांडे, ग्रामीण।