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सूखे ने लीली फसल, मुरझाये किसानों के चेहरे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 27 Oct 2015 10:48 PM IST
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अरहर की दाल की कीमत तो आकाश छू रही है, मगर अब पहाड़ की सबसे लोकप्रिय गहत पर भी ग्रहण लग गया है। इस बार गहत की पैदावार बुरी तरह लुढ़कने के आसार हैं। बारिश नहीं होने से गहत की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे उत्पादक मायूस हैं। किसानों को 50 प्रतिशत से भी अधिक नुकसान होने का अंदेशा है। साथ ही लोगों को भी चंपावत की मशहूर गहत की दाल के जायके से वंचित रहना पड़ सकता है।
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पहाड़ में गहत खरीफ की मुख्य दलहनी फसलों में है। चंपावत गहत के प्रमुख उत्पादक जिलों में से एक है। 2011-12 में 1213 हेक्टेयर गहत की खेती हुई, जबकि पिछले साल ये घटकर 834 हेक्टेयर और मौजूदा साल में 800 हेक्टेयर रह गई। उत्पादन भी 965 मीट्रिक टन से कम होकर पिछले साल 751 एमटी तक रह गया और इस साल ये उत्पादन 300 एमटी भी होने की उम्मीद नहीं है। सल्ली, तल्लादेश, गुमदेश प्रमुख गहत उत्पादक क्षेत्र हैं, लेकिन अधिकांश जगह गहत की फसल चौपट हो गई है। सितंबर में बारिश नहीं होने की मार गहत की खेती पर पड़ी है।
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फूल लगने के बाद नहीं मिली बारिश
गहत की बेहतर पैदावार के लिए बुवाई के बाद 15 मिलीमीटर बारिश की जरूरत होती है। फूल लगने के बाद बारिश नहीं होने का असर फसल पर पड़ा है और अब आधी पैदावार भी नहीं रह गई है।
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रंग और स्वाद से डिमांडेड है गहत की दाल
सल्ली के प्रधान पूरन सिंह रावत, कमल सिंह, रूप सिंह, सुरेंद्र सिंह, लाल सिंह, हयात सिंह, दीवान सिंह, नवीन सिंह, प्रकाश सिंह, हयात सिंह आदि यहां के प्रमुख उत्पादक हैं। रंग और स्वाद में बेमिसाल होने की वजह से यहां की गहत की मांग भी खूब होती थी। लेकिन इन किसानों का कहना है कि वर्षों बाद पहली बार गहत की खेती इस कदर चौपट हुई है। उनकी मेहनत भी नहीं निकल सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष यहां के लोगों ने 8000 से 9000 रुपये क्विंटल के हिसाब से 28 लाख रुपये की गहत बेची थी पर इस बार बेचने के लिए गहत नहीं है। गहत की फसल से होने वाली आय उनके सालभर की जरूरत को पूरा करती थी पर इस बार तो उसके लिए कर्ज को भी चुका पाना भी चुनौती होगा।
वक्त पर बारिश नहीं होने से इस बार गहत की पैदावार में गिरावट की आशंका है। अभी विस्तृत सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन अब तक के ब्यौरे के आधार पर करीब 30 प्रतिशत नुकसान का अंदेशा है। इसकी सूचना कृषि निदेशालय भेजी जा चुकी है। -आरएल चंद्रवाल, मुख्य कृषि अधिकारी चंपावत।
गहत में 80 फीसदी तक प्रोटीन होता है। गहत की दाल का रस शरीर में जमे कैल्शियम आर्गनेट को तोड़ता है। गरम तासीर वाली गहत की दाल का रस पथरी के रोग में फायदेमंद होता है। -महेंद्र कुमार, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, चंपावत।