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सूखीढांग के युवाओं को मिला ज्ञान का भंडार
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सूखीढांग की सिटीजन लाइब्रेरी।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। टनकपुर से 27 किमी दूर सूखीढांग के युवाओं को विश्व पुस्तक दिवस पर शुक्रवार को नागरिक पुस्तकालय (सिटीजन लाइब्रेरी) का तोहफा मिला है। 2016 बैच के पीसीएस टॉपर और टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने गांव में पुस्तकालय की सुविधा देने की पहल की है। इसके चलते गांव के युवाओं को पुस्तकालय के लिए टनकपुर जाने से निजात मिलेगी।
सूखीढांग के पंचायतघर में शुरू इस पुस्तकालय में 15 लोगों के एक साथ पढ़ने की सुविधा है। पुस्तकालय में एनसीईआरटी, सामान्य अध्ययन, सामाजिक विषय, स्वास्थ्य, पर्यावरण के अलावा प्रेरणा देने वाली 250 पुस्तकें रखी गई हैं। इस पुस्तकालय को खोले जाने की वजह गांव के युवाओं को 27 किमी दूर टनकपुर सिटीजन लाइब्रेरी जाने में होने वाली परेशानी थी। यहां के छात्र देव कलोनी बताते हैं कि मार्च में वे और उनके कुछ साथी टनकपुर तहसील स्थित पुस्तकालय गए थे। इसी बीच काउंसलिंग के दौरान एसडीएम ने उनसे पूछताछ की। जब उन्हें पता चला कि वे सूखीढांग से पढ़ने टनकपुर आए हैं, तो उन्होंने सूखीढांग में पुस्तकालय खोलने का विचार बनाया। इसके लिए एसडीएम हर माह 20 हजार रुपये की मदद कर रहे हैं। साथ ही ग्राम प्रधान मुकेश कुमार सहित कई अन्य लोगों ने बुकसेल्फ आदि की मदद की।
नवंबर में टनकपुर में खोली गई लाइब्रेरी
चंपावत। सूखीढांग के नागरिक पुस्तकालय से पूर्व पिछले साल नवंबर में टनकपुर में नागरिक पुस्तकालय खोल परीक्षार्थियों के लिए स्तरीय किताबों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने अपने खर्च पर दिल्ली से 1.13 लाख रुपये की पुस्तकें मंगवाई। बाद में पुस्तकालय के लिए समाज के अन्य लोगों से भी सहयोग लिया गया। पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों को कामयाबी की बारीकियां भी बताई जाती हैं। पुस्तकालय आने वाले लोकेश जोशी का पिछले माह एसबीआई में पीओ में चयन भी हुआ था।
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सूखीढांग के पंचायतघर में शुरू इस पुस्तकालय में 15 लोगों के एक साथ पढ़ने की सुविधा है। पुस्तकालय में एनसीईआरटी, सामान्य अध्ययन, सामाजिक विषय, स्वास्थ्य, पर्यावरण के अलावा प्रेरणा देने वाली 250 पुस्तकें रखी गई हैं। इस पुस्तकालय को खोले जाने की वजह गांव के युवाओं को 27 किमी दूर टनकपुर सिटीजन लाइब्रेरी जाने में होने वाली परेशानी थी। यहां के छात्र देव कलोनी बताते हैं कि मार्च में वे और उनके कुछ साथी टनकपुर तहसील स्थित पुस्तकालय गए थे। इसी बीच काउंसलिंग के दौरान एसडीएम ने उनसे पूछताछ की। जब उन्हें पता चला कि वे सूखीढांग से पढ़ने टनकपुर आए हैं, तो उन्होंने सूखीढांग में पुस्तकालय खोलने का विचार बनाया। इसके लिए एसडीएम हर माह 20 हजार रुपये की मदद कर रहे हैं। साथ ही ग्राम प्रधान मुकेश कुमार सहित कई अन्य लोगों ने बुकसेल्फ आदि की मदद की।
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नवंबर में टनकपुर में खोली गई लाइब्रेरी
चंपावत। सूखीढांग के नागरिक पुस्तकालय से पूर्व पिछले साल नवंबर में टनकपुर में नागरिक पुस्तकालय खोल परीक्षार्थियों के लिए स्तरीय किताबों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने अपने खर्च पर दिल्ली से 1.13 लाख रुपये की पुस्तकें मंगवाई। बाद में पुस्तकालय के लिए समाज के अन्य लोगों से भी सहयोग लिया गया। पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों को कामयाबी की बारीकियां भी बताई जाती हैं। पुस्तकालय आने वाले लोकेश जोशी का पिछले माह एसबीआई में पीओ में चयन भी हुआ था।
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