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बेसलेस हुआ चंपावत का बेस अस्पताल
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चंपावत जिला अस्पताल भवन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। केंद्र सरकार ने पिछले साल हर जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए पिछले साल के बजट में एलान भी किया गया था लेकिन चंपावत जिले में मेडिकल कॉलेज तो दूर, अभी बेस अस्पताल तक नहीं बन सका है। साढ़े सात साल पहले चंपावत के बेस अस्पताल को मंजूरी मिलने के बावजूद इसके लिए जमीन तक नहीं खोजी जा सकी है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिसंबर 2014 में चंपावत के जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर बेस अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। पांच माह बाद अप्रैल 2015 में बेस अस्पताल को शासन ने प्रशासनिक स्वीकृति दी। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम (सीएनडीएस) ने पहले चरण के काम के लिए 276.70 लाख रुपये का आगणन बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन यह रकम नहीं मिल सकी।
चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति बेस अस्पताल बनाने की मांग कर रही है। समिति के नेता बसंत तड़ागी का कहना है कि चंपावत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बेस अस्पताल बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल को कम समय में बेस अस्पताल के रूप में उच्चीकृत किया जा सकता है। उसके बाद मेडिकल कॉलेज भी बनना चाहिए।
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नर्सों की कमी से आईसीयू का संचालन बन रहा चुनौती
चंपावत। जिला अस्पताल में इलाज की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन कई चुनौतियां बरकरार हैं। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी बताते हैं कि अस्पताल में 32 डॉॅक्टर हैं लेकिन नर्सों की कमी से दिक्कत आ रही है। खासकर आईसीयू के संचालन में परेशानी हो रही है। फिर भी किसी तरह काम चलाया जा रहा है। ईएनटी, प्लास्टिक सर्जन, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, हृदयरोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं।
बेस अस्पताल चंपावत का बजट मंजूर करवाने के लिए विभाग और जिला प्रशासन के स्तर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जमीन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
बेस अस्पताल में मिलतीं हैं ये सुविधाएं
अति विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी।
सुविधाओं के बढ़ने से मरीजों को रेफर करने की नौबत कम आएगी।
एमआरआई, सीटी स्कैन सहित चिकित्सा परीक्षण की कई आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी।
बेस अस्पताल होने से जिला अस्पताल में 60 शैय्याओं की संख्या बढ़कर 300 हो जाएगी।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिसंबर 2014 में चंपावत के जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर बेस अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। पांच माह बाद अप्रैल 2015 में बेस अस्पताल को शासन ने प्रशासनिक स्वीकृति दी। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम (सीएनडीएस) ने पहले चरण के काम के लिए 276.70 लाख रुपये का आगणन बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन यह रकम नहीं मिल सकी।
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चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति बेस अस्पताल बनाने की मांग कर रही है। समिति के नेता बसंत तड़ागी का कहना है कि चंपावत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बेस अस्पताल बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल को कम समय में बेस अस्पताल के रूप में उच्चीकृत किया जा सकता है। उसके बाद मेडिकल कॉलेज भी बनना चाहिए।
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नर्सों की कमी से आईसीयू का संचालन बन रहा चुनौती
चंपावत। जिला अस्पताल में इलाज की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन कई चुनौतियां बरकरार हैं। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी बताते हैं कि अस्पताल में 32 डॉॅक्टर हैं लेकिन नर्सों की कमी से दिक्कत आ रही है। खासकर आईसीयू के संचालन में परेशानी हो रही है। फिर भी किसी तरह काम चलाया जा रहा है। ईएनटी, प्लास्टिक सर्जन, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, हृदयरोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं।
बेस अस्पताल चंपावत का बजट मंजूर करवाने के लिए विभाग और जिला प्रशासन के स्तर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जमीन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
बेस अस्पताल में मिलतीं हैं ये सुविधाएं
अति विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी।
सुविधाओं के बढ़ने से मरीजों को रेफर करने की नौबत कम आएगी।
एमआरआई, सीटी स्कैन सहित चिकित्सा परीक्षण की कई आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी।
बेस अस्पताल होने से जिला अस्पताल में 60 शैय्याओं की संख्या बढ़कर 300 हो जाएगी।