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मलिन बस्ती आवास योजना में देर भी और अंधेर भी
योगेश जोशी , चंपावत।
Updated Tue, 26 Dec 2017 10:19 PM IST
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मलिन बस्ती आवास के कई मकान में पन्नी लगाकर चल रहा है काम।
- फोटो : amar ujala
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मलिन बस्ती आवास योजना के अंतर्गत बनने वाले 73 मकानों को सितंबर 2012 में पूरा होना था, लेकिन यह मकान करीब पांच साल बाद तैयार हो सके। निर्माण में विलंब तो हुआ ही, लेकिन अधिकांश मकानों तक आधारभूत सुविधाएं आज तक नहीं पहुंची है। इसके चलते यहां के लोगों को असुविधा के बीच वक्त काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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आवास योजना के अंतर्गत कार्यदायी संस्था नगर पालिका को 3.28 करोड़ रुपये से 73 मकानों का निर्माण करना था। योजना को पूरा करने के लिए पालिका को दो किस्तों (पहली किस्त में 1.53 करोड़ और दूसरी किस्त में 1.75 करोड़ रुपये) में ये रकम मिली। पहरूयूड़ा, तेलबाड़ा और सेलाखोला मलिन बस्ती में 2.15 लाख रुपये में गरीब पात्रों को मकान देना था।
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अप्रैल 2011 से शुरू योजना को 18 महीने के भीतर पूरा करने के साथ ही रास्ते, नाली, पेयजल, बिजली आदि की व्यवस्था भी होनी थी। सुस्त गति से होते हुए मकान का काम तो आखिरकार कुछ महीने पूरा हो सका है, लेकिन अभी तक पात्रों को आधारभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी है।
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पहरूयूड़ा के नवल किशोर, नवीन लाल, महेश राम और ओम प्रकाश के मकान स्वीकृत हुए। आवास निर्माण के साथ ही इन लोगों की मुसीबत का सफर भी शुरू हुआ। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले इन लोगों के पास जमीन का अभाव था।
इन लोगों के पुराने मकान तोड़ उसी जमीन पर नए मकान बनाने का काम शुरू किया गया। मकान के अभाव में ये लोग मजबूरी में 2014 में ही अधूरे बने मकान में रहने लगे। इन लोगों का कहना है कि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के आश्वासन पर उन्होंने स्वयं के खर्चे से दरवाजे, खिड़कियां, टॉयलेट शीट, पाइप लगाए। इस मरम्मत में लगे हजारों रुपयों का भुगतान भी अभी तक नहीं हो सका है।
कमतर गुणवत्ता की जांच भी हुई
टपकती छत, शौचालय के छोटे पिट और बिजली विहीन इन घरों में रहने वालों की शिकायत पर तत्कालीन डीएम ने जांच कमेटी का गठन किया। तकनीकी अधिकारियों की इस जांच कमेटी ने टपकती छत, रेलिंग का अभाव, बिजली विहीन और शौचालय के छोटे पिट आदि की शिकायत सही पाई। जिस पर ठेकेदार को इन खामियों को ठीक करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद ही इन कमियों को दुरुस्त किया जा सका।
कनिष्ठ अभियंता की तैनाती न होने सहित कई अन्य कारणों से मलिन बस्ती आवास योजना निर्धारित वक्त में पूरी नहीं हो सकी। अब मकानों का काम तो पूरा कर लिया गया है, वहीं आधारभूत सुविधाओं का काम भी एक माह के भीतर पूरा करा लिया जाएगा। मकान में स्वयं की धनराशि लगाने वाले लोगों को इस्टीमेट के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
- अभिनव कुमार, अधिशासी अधिकारी, चंपावत।