{"_id":"5db86f678ebc3e01376ab3dd","slug":"ladhia-valley-health-god-trust-champawat-news-hld362072431","type":"story","status":"publish","title_hn":"हालात:लधिया घाटी की सेहत रामभरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हालात:लधिया घाटी की सेहत रामभरोसे
विज्ञापन
रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु को टीका लगाती फार्मेसिस्ट।
- फोटो : CHAMPAWAT
रीठा साहिब (चंपावत)। जिले के दूरस्थ लधिया घाटी क्षेत्र की सेहत बुरी तरह बीमार है। यहां के तीनों अस्पतालों में से किसी में भी डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर नहीं होने से क्षेत्रवासियों को इलाज के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों को मामूली उपचार के लिए 75 किमी दूर चंपावत या 62 किमी दूर लोहाघाट जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
लधिया क्षेत्र में रीठा साहिब व भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) के अलावा टांण का राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) है। मगर इनमें से किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं है। रीठा साहिब के डॉ.सोनू उपाध्याय और भिंगराड़ा के डॉ.यश मोहन इस साल मई से पीजी के दो वर्ष के अध्ययन अवकाश में हैं। जबकि टांण में 2015 से डॉक्टर नहीं है। टांण के डॉक्टर को लोहाघाट अस्पताल संबद्ध किया गया है।
डॉक्टर विहीन इन तीनों अस्पतालों का जिम्मा फार्मेसिस्ट के हवाले हैं। रीठा साहिब की फार्मेसिस्ट दीपा कश्यप मरीजों की नब्ज देखने से लेकर दवा वितरण तक का सारा काम अकेले कर रही हैं। रीठा साहिब में डॉक्टर ही नहीं, वार्डब्वाय और स्वच्छक भी नहीं है।
विज्ञापन
ग्रामीण चुका रहे बदतर सेवाओं की कीमत
रीठा साहिब (चंपावत)। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि लधिया घाटी की बदतर स्वास्थ्य सेवा की ग्रामीणों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इलाज के लिए उन्हें लोहाघाट या चंपावत की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिससे उन्हें वक्त के साथ धन भी खर्च करना पड़ रहा है। पूर्व ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट, चंद्रशेखर भट्ट, उमेश भट्ट, रमेश चंद्र सहित इलाके के तमाम लोगों ने लधिया क्षेत्र के तीनों अस्पतालों की व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
कोट
लधिया क्षेत्र के तीनों अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होने से दिक्कतें आ रही है। पाटी ब्लाक में इस वक्त सिर्फ देवीधुरा में डॉक्टर हैं। उन्हें तीन दिन पाटी संबद्ध किया गया है। लधिया घाटी के अस्पतालों के लिए डॉक्टरों की व्यवस्था के प्रयास किए जाएंगे।
-डॉ.आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, चंपावत।
विज्ञापन
लधिया क्षेत्र में रीठा साहिब व भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) के अलावा टांण का राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) है। मगर इनमें से किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं है। रीठा साहिब के डॉ.सोनू उपाध्याय और भिंगराड़ा के डॉ.यश मोहन इस साल मई से पीजी के दो वर्ष के अध्ययन अवकाश में हैं। जबकि टांण में 2015 से डॉक्टर नहीं है। टांण के डॉक्टर को लोहाघाट अस्पताल संबद्ध किया गया है।
विज्ञापन
डॉक्टर विहीन इन तीनों अस्पतालों का जिम्मा फार्मेसिस्ट के हवाले हैं। रीठा साहिब की फार्मेसिस्ट दीपा कश्यप मरीजों की नब्ज देखने से लेकर दवा वितरण तक का सारा काम अकेले कर रही हैं। रीठा साहिब में डॉक्टर ही नहीं, वार्डब्वाय और स्वच्छक भी नहीं है।
विज्ञापन
ग्रामीण चुका रहे बदतर सेवाओं की कीमत
रीठा साहिब (चंपावत)। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि लधिया घाटी की बदतर स्वास्थ्य सेवा की ग्रामीणों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इलाज के लिए उन्हें लोहाघाट या चंपावत की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिससे उन्हें वक्त के साथ धन भी खर्च करना पड़ रहा है। पूर्व ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट, चंद्रशेखर भट्ट, उमेश भट्ट, रमेश चंद्र सहित इलाके के तमाम लोगों ने लधिया क्षेत्र के तीनों अस्पतालों की व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
कोट
लधिया क्षेत्र के तीनों अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होने से दिक्कतें आ रही है। पाटी ब्लाक में इस वक्त सिर्फ देवीधुरा में डॉक्टर हैं। उन्हें तीन दिन पाटी संबद्ध किया गया है। लधिया घाटी के अस्पतालों के लिए डॉक्टरों की व्यवस्था के प्रयास किए जाएंगे।
-डॉ.आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, चंपावत।