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चार साल में बढ़ गए कीवी फल के कद्रदान
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:29 PM IST
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कीवी फल के साथ काश्तकार धर्मेंद्र कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत जिले के लोगों के लिए अब कीवी फल बेगाना नहीं रहा। चार साल पूर्व तक मटमैला रंग व आलू जैसा लगने वाले कीवी फल को लोग नहीं जानते थे। मगर अब न केवल लोग इससे परिचित हैं, बल्कि इसकी मांग भी बढ़ गई है। मांग बढ़ने से दाम में भी चार साल में चार गुना इजाफा हुआ है। इस साल कीवी को अच्छा बाजार मिल रहा है। 200 रुपये किलो के हिसाब से इसकी बिक्री हो रही है।
कीवी फल का चंपावत में बेहद कम उत्पादन होता है। यहां बमुश्किल 20 पेड़ हैं। चंपावत के अलावा जौलाड़ी में कुछ पेड़ हैं। अकेले चंपावत में इस साल करीब 1.75 कुंतल उत्पादन हुआ है। बनलेख गांव के काश्तकार धर्मेंद्र कुमार ने अल्मोड़ा के विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान से मिले कीवी के पांच पौधे को 2011 में लगाया था। तब 75 रुपये में खरीदे गए इन पांच पौधों को लगाने के बाद इनकी खूब परवरिश की। धर्मेंद्र का कहना है कि इन पौधों से 2014 में पहली बार फल आया। करीब 1.50 कुंतल कीवी फल पैदा हुआ। लेकिन शुरू में न खरीददार मिला और न कोई बाजार। ज्यादातर फल बर्बाद हुआ। 2015 में भी दाम 50 रुपये किलो से ज्यादा नहीं मिल सका। और पिछले साल तक लोग कीवी को जानने लगे, लेकिन फिर भी न इसकी मांग बढ़ी और नहीं दाम बढ़ा। मगर इस बार इस उत्पादक को कीवी के दाम 200 रुपये किलो मिल रहे हैं। स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज से भी लोग कीवी की मांग कर रहे हैं। इस बार इन पांच पेड़ों से करीब 1.75 कुंतल कीवी का उत्पादन हुआ है।
कोट
कीवी की पैदावार के लिए यहां की जलवायु अनुकूल है। इससे आम काश्तकार को परिचित कराने के लिए विभाग पहल करेगा। उद्यान विभाग मुडिय़ानी नर्सरी में 40 पौधे लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) भवाली से पौध मंगाकर नर्सरी में लगाए जाएंगे। भविष्य में यहीं से किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। मनरेगा से भी कीवी के पौध किसानों तक पहुंचाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
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एनके आर्या,
जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
कोट
कीवी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल है। कीवी में विटामिन सी, प्रोटीन और फाइबर जैसे गुणों की वजह से यह एंटीआक्सिडेंट से युक्त है। प्लेटलेटस बढ़ाने की क्षमता के चलते डेंगू रोग में खूब कारगर है।
डॉ.मोहम्मद शाहिद,प्रभारी चिकित्साधिकारी,आयुर्वेदिक अस्पताल, टनकपुर।
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कीवी फल का चंपावत में बेहद कम उत्पादन होता है। यहां बमुश्किल 20 पेड़ हैं। चंपावत के अलावा जौलाड़ी में कुछ पेड़ हैं। अकेले चंपावत में इस साल करीब 1.75 कुंतल उत्पादन हुआ है। बनलेख गांव के काश्तकार धर्मेंद्र कुमार ने अल्मोड़ा के विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान से मिले कीवी के पांच पौधे को 2011 में लगाया था। तब 75 रुपये में खरीदे गए इन पांच पौधों को लगाने के बाद इनकी खूब परवरिश की। धर्मेंद्र का कहना है कि इन पौधों से 2014 में पहली बार फल आया। करीब 1.50 कुंतल कीवी फल पैदा हुआ। लेकिन शुरू में न खरीददार मिला और न कोई बाजार। ज्यादातर फल बर्बाद हुआ। 2015 में भी दाम 50 रुपये किलो से ज्यादा नहीं मिल सका। और पिछले साल तक लोग कीवी को जानने लगे, लेकिन फिर भी न इसकी मांग बढ़ी और नहीं दाम बढ़ा। मगर इस बार इस उत्पादक को कीवी के दाम 200 रुपये किलो मिल रहे हैं। स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज से भी लोग कीवी की मांग कर रहे हैं। इस बार इन पांच पेड़ों से करीब 1.75 कुंतल कीवी का उत्पादन हुआ है।
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कीवी की पैदावार के लिए यहां की जलवायु अनुकूल है। इससे आम काश्तकार को परिचित कराने के लिए विभाग पहल करेगा। उद्यान विभाग मुडिय़ानी नर्सरी में 40 पौधे लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) भवाली से पौध मंगाकर नर्सरी में लगाए जाएंगे। भविष्य में यहीं से किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। मनरेगा से भी कीवी के पौध किसानों तक पहुंचाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
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एनके आर्या,
जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
कोट
कीवी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल है। कीवी में विटामिन सी, प्रोटीन और फाइबर जैसे गुणों की वजह से यह एंटीआक्सिडेंट से युक्त है। प्लेटलेटस बढ़ाने की क्षमता के चलते डेंगू रोग में खूब कारगर है।
डॉ.मोहम्मद शाहिद,प्रभारी चिकित्साधिकारी,आयुर्वेदिक अस्पताल, टनकपुर।