{"_id":"5f64eca28ebc3e74ab225b73","slug":"joint-hospital-of-tanakpur-neither-x-ray-nor-ultrasound-test-facility-here-champawat-news-hld3974217182","type":"story","status":"publish","title_hn":"टनकपुर का संयुक्त अस्पताल:यहां न एक्सरे, न अल्ट्रासाउंड परीक्षण की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टनकपुर का संयुक्त अस्पताल:यहां न एक्सरे, न अल्ट्रासाउंड परीक्षण की सुविधा
विज्ञापन
टनकपुर संयुक्त अस्पताल में कोरोना जांच के लिए इंतजार करतीं महिलाएं।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत/टनकपुर (चंपावत)। चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र का सबसे बड़ा टनकपुर संयुक्त अस्पताल इलाज करने के स्थान पर खुद बीमार है। हालात इस कदर खराब हैं कि मशीन होने के बावजूद इस अस्पताल में न एक्सरे का लाभ मिल पा रहा है और न अल्ट्रासाउंड परीक्षण का। ऐसे में लोगों को सामान्य वक्त में ही नहीं, आपात काल में भी अस्पताल से निजी क्लीनिकों में दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं इस अवधि में 58.20 लाख रुपये की लोगों को चपत लग चुकी है।
2006 से शुरू टनकपुर संयुक्त अस्पताल बीमार हाल में है। एक्सरे ही नहीं, जून 2017 से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी नहीं हो रहे हैं। वहीं ईसीजी के परीक्षण के लिए भी अस्पताल में विशेषज्ञ नहीं है। फिजिशियन नहीं होने से ईसीजी, तो रेडियोलोजिस्ट नहीं होने से मरीज अल्ट्रासाउंड मशीन के लाभ से वंचित हैं। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताले लटके हैं। औसतन हर महीने गर्भवती महिलाओं सहित 150 से अधिक लोगों को इन तमाम परीक्षणों की जरूरत पड़ती है। सवा तीन साल में 5850 लोगों को परीक्षण के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी है। सवा तीन साल में लोगों की जेब से 46.80 लाख रुपये सिर्फ अल्ट्रासाउंड और 11.40 लाख रुपये एक्सरे परीक्षण में खर्च हो चुके हैं। एसीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि दोनों पद खाली होने से दिक्कत हो रही है। रेडियोलॉजिस्ट और एक्सरे तकनीशियन की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
फोटो 18 सीपीटी 01पी से 03पी तक
अधिकांश विशेषज्ञों के पद भी खाली
संयुक्त अस्पताल में एमएस के अलावा 14 डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन इस वक्त विशेषज्ञों के अधिकांश पद खाली है। गायनाकोलॉजिस्ट, फिजीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, नेत्र शल्यक, चर्म रोग विशेषज्ञ सहित सात पद खाली है।
विज्ञापन
विज्ञापन
2006 से शुरू टनकपुर संयुक्त अस्पताल बीमार हाल में है। एक्सरे ही नहीं, जून 2017 से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी नहीं हो रहे हैं। वहीं ईसीजी के परीक्षण के लिए भी अस्पताल में विशेषज्ञ नहीं है। फिजिशियन नहीं होने से ईसीजी, तो रेडियोलोजिस्ट नहीं होने से मरीज अल्ट्रासाउंड मशीन के लाभ से वंचित हैं। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताले लटके हैं। औसतन हर महीने गर्भवती महिलाओं सहित 150 से अधिक लोगों को इन तमाम परीक्षणों की जरूरत पड़ती है। सवा तीन साल में 5850 लोगों को परीक्षण के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी है। सवा तीन साल में लोगों की जेब से 46.80 लाख रुपये सिर्फ अल्ट्रासाउंड और 11.40 लाख रुपये एक्सरे परीक्षण में खर्च हो चुके हैं। एसीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि दोनों पद खाली होने से दिक्कत हो रही है। रेडियोलॉजिस्ट और एक्सरे तकनीशियन की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
विज्ञापन
फोटो 18 सीपीटी 01पी से 03पी तक
अधिकांश विशेषज्ञों के पद भी खाली
संयुक्त अस्पताल में एमएस के अलावा 14 डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन इस वक्त विशेषज्ञों के अधिकांश पद खाली है। गायनाकोलॉजिस्ट, फिजीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, नेत्र शल्यक, चर्म रोग विशेषज्ञ सहित सात पद खाली है।
विज्ञापन