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बैसाखी से भी नहीं डिगा जानकी का संघर्ष का जज्बा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 11:21 PM IST
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Janki's spirit of struggle was not disturbed even with crutches
तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चंपावत जिले से चयनित बनबसा की जानकी चंद। - फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इसे साकार किया है बनबसा देशी फार्म की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानकी चंद ने। बैसाखी के सहारे जिंदगी की जंग लड़ने वाली जानकी अपने संघर्षों की बदौलत समाज को प्रेरणा दे रही है।
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उनकी हिम्मत को अब प्रदेश सरकार ने भी माना है। बहादुरी भरे कार्यों के लिए जानकी को तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस ब्रजवाल कहते हैं कि जानकी चंद का आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में बेहतरीन काम करने के साथ सामाजिक सेवा में भी हाथ बंटा रही हैं। दिव्यांग जानकी का अब तक का समूचा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जानकी बताती हैं कि दो वर्ष की आयु में पोलियो का शिकार होने से एक पांव बेकार हो गया।
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इंटर करने के बाद तीन सालों तक प्राइवेट स्कूल में भी पढ़ाया। बैसाखियों के सहारे स्वयं का जीवन जीने वाले जानकी समाज के लिए मिसाल भी है। मामूली कमाई के बाद भी समाज को जागृत करने के लिए वे आगे रहती हैं। खुद संघर्ष करते हुए जानकी ने अपने परिवार की देखभाल तो की ही, साथ ही खूब पढ़ा भी। पिता के न होते हुए तीन छोटी बहनों और एक छोटे भाई की परवरिश में मां का हाथ भी बटाया। उन्होंने इतिहास व समाज शास्त्र से एमए करने के अलावा एमएसडब्लू (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) भी किया। 2006 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी निभाने के बाद बचे हुए वक्त में गरीब व जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। जानकी नौजवानों को संघर्ष करने, मुसीबतों से पार पाने को हौंसला व धैर्य रखने और लड़कियों को मर्यादा में रहते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। जानकी को 2011 की जनगणना में उम्दा काम के लिए राष्ट्रपति ने कांस्य पदक देकर सम्मानित किया था।
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एवरेस्ट विजेता शीतल को तीलू रौतेली पुरस्कार
पिथौरागढ़। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को फतह करने वाली शीतल तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित होंगी। पिथौरागढ़ के सातशिलिंग निवासी शीतल ने पिछले वर्ष मई 2019 में माउंट एवरेस्ट फतह कर पिथौरागढ़ का नाम देश भर में रोशन किया था। शीतल एवरेस्ट पर चढ़ने वाली उत्तराखंड राज्य की सबसे कम उम्र की महिला बनीं। शीतल इससे पहले सतोपंथ, त्रिशूल, कंचनजंगा चोटियों को भी फतह कर चुकी हैं। शीतल का चयन तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए होने पर उनकी माता सपना देवी और पिता उमाशंकर काफी खुश हैं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली चंद्रकला होंगी पुरस्कृत
पिथौरागढ़। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पिथौरागढ़ के दुर्गम सल्ला आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता चंद्रकला चंद तीलू रौतेली की जयंती पर पुरस्कृत होंगी। इस वर्ष तीलू रौतेली पुरस्कार के साथ प्रदेश सरकार ने 22 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का भी पुरस्कार के लिए चयन किया है।

पिथौरागढ़ जिले से चयनित चंद्रकला चंद मूनाकोट ब्लाक के सल्ला आंगनबाड़ी केंद्र में वर्ष 2004 से तैनात हैं। चंद्रकला ने केंद्र में स्वच्छता, गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार वितरण, नंदा गौरा योजना का लाभ दिलाने सहित सभी कार्यों में उल्लेखनीय कार्य किया है। चंद्रकला ने बताया कि इस समय सल्ला आंगनबाड़ी केंद्र में 29 बच्चे हैं। वह पुरस्कार के लिए चयनित होने पर खुश नजर आईं।
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