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Champawat News: आत्मनिर्भरता की मिसाल बना जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह
Fri, 16 Jan 2026 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:08 PM IST
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समूह अध्यक्ष किरन देवी
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चंपावत। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जनकांडे गांव का जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। वर्ष 2022 में गठित यह समूह एनआरएलएम के तहत संचालित है और आज अपने कार्यों से आर्थिक सफलता की कहानी लिख रहा है।
समूह अध्यक्ष किरन देवी ने बताया इस स्वयं सहायता समूह में कुल सात महिलाएं हैं, जो मिलकर पशुपालन, दाल उत्पादन, मोटे अनाज की खेती, किराना दुकान संचालन और सिलाई कार्य जैसे विविध आय वर्धक कार्य कर रही हैं। समूह की मेहनत और आपसी सहयोग का ही परिणाम है कि आज यह समूह प्रति माह लगभग 20 हजार रुपये की सामूहिक आय अर्जित कर रहा है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले वह घरेलू कार्यों तक ही सीमित थीं, लेकिन एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार मिला। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला। अब वह स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और समर्थन मिले, तो वह गांव की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। यह समूह नारी सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान की जमीनी सच्चाई को दर्शाता है।
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जब महिलाएं एक-दूसरे का सहारा बन गईं
कभी घर-आंगन तक सीमित रहने वाली जनकांडे गांव की महिलाएं आज अपने फैसले खुद ले रही हैं। इसकी वजह नारी शक्ति ग्राम संगठन बना है। शुरुआत छोटी थी लेकिन इरादे मजबूत थे। किसी ने पशुपालन संभाला, किसी ने दाल और मोटे अनाज का काम सीखा तो किसी ने सिलाई और छोटी दुकान से आमदनी का रास्ता चुना। महिलाओं का कहना है कि नारी शक्ति ग्राम संगठन ने उन्हें एक मंच दिया। संगठन में 60-70 महिलाएं जुड़ी है।
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समूह अध्यक्ष किरन देवी ने बताया इस स्वयं सहायता समूह में कुल सात महिलाएं हैं, जो मिलकर पशुपालन, दाल उत्पादन, मोटे अनाज की खेती, किराना दुकान संचालन और सिलाई कार्य जैसे विविध आय वर्धक कार्य कर रही हैं। समूह की मेहनत और आपसी सहयोग का ही परिणाम है कि आज यह समूह प्रति माह लगभग 20 हजार रुपये की सामूहिक आय अर्जित कर रहा है।
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समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले वह घरेलू कार्यों तक ही सीमित थीं, लेकिन एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार मिला। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला। अब वह स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और समर्थन मिले, तो वह गांव की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। यह समूह नारी सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान की जमीनी सच्चाई को दर्शाता है।
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जब महिलाएं एक-दूसरे का सहारा बन गईं
कभी घर-आंगन तक सीमित रहने वाली जनकांडे गांव की महिलाएं आज अपने फैसले खुद ले रही हैं। इसकी वजह नारी शक्ति ग्राम संगठन बना है। शुरुआत छोटी थी लेकिन इरादे मजबूत थे। किसी ने पशुपालन संभाला, किसी ने दाल और मोटे अनाज का काम सीखा तो किसी ने सिलाई और छोटी दुकान से आमदनी का रास्ता चुना। महिलाओं का कहना है कि नारी शक्ति ग्राम संगठन ने उन्हें एक मंच दिया। संगठन में 60-70 महिलाएं जुड़ी है।