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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : हुजूर जो इंतजाम है, बस उन्हें दुरुस्त कर दीजिए
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चंपावत में रोडवेज बस में महिला आरक्षित सीट में सवार पुरूष यात्री।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। हर साल इस दिन हम महिलाओं की तरक्की पर गर्व करते हैं। देश के विकास में योगदान देने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। समय-समय पर महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विभिन्न योजनाएं लाई जाती हैं लेकिन हकीकत यह है कि उन्हें इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। आज अगर हम महिलाओं को मिलने वालीं सुविधाओं की तस्दीक करें तो इनमें कई खामियां नजर आती हैं। इस पर महिलाओं का कहना है कि अगर उनको मिलने वाली सुविधाओं को ही दुरुस्त कर दिया जाए तो यह उनके लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा।
आरक्षित सीटों पर ही बैठने के लिए नहीं मिलता
चंपावत। रोडवेज की बसों में महिला सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। बसों में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होने के बाद भी कई लोग नजरअंदाज करते हुए उसमें सफर करते नजर आते हैं। ऐसे में कई बार मातृशक्ति को पूरा सफर खड़े-खड़े ही तय करना पड़ता है। पिथौरागढ़ में रोडवेज के एआरएम आरके आर्या ने बताया कि यदि कोई महिला आरक्षित सीट पर ही बैठना चाहती है तो उसे वो सीट उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं बसों में किसी भी सीट पर बैठ जाती हैं।
पिथौरागढ़ को छोड़कर कहीं नहीं महिलाओं के लिए शौचालय व्यवस्था
पिथौरागढ़। सीमांत जिले की पांच लाख की आबादी में महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय की पिथौरागढ़ को छोड़कर कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। मुनस्यारी, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला पर्यटकों की पहली पसंद है। हर साल हजारों की संख्या में देश के साथ विदेश से महिला पर्यटक सैर सपाटे के लिए आते हैं। मगर इन स्थानों सुलभ शौचालय न होने से उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मुनस्यारी में सुलभ शौचालय का इस साल निर्माण किया गया, लेकिन उसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। थल, नाचनी, बुंगाछीना, गणाईगंगोली में भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। एक मात्र पिथौरागढ़ में सिर्फ केएमओयू स्टेशन और सिल्थाम के पास सुलभ शौचालय की व्यवस्था है।
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देवी के धाम में ‘देवियों’ को नहीं मताधिकार
चंपावत। पंचायती, निकाय, विधायकी या सांसदी के चुनाव में वोट देने से लेकर खुद मैदान में उतरने का भले ही महिलाओं को बराबर का हक हो लेकिन इस जिले की सबसे बड़ी आध्यात्मिक स्थली मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति के चुनाव में महिलाएं न खुद मैदान में उतर सकती है और न ही वोट दे सकती हैं।
मां पूर्णागिरि धाम में मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर करने और तीर्थयात्रियों को सुविधा देने के लिए उत्तराखंड बनने के बाद 2006 में मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति का गठन किया गया। इसमें चार पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष) के लिए चुनाव होते हैं। लेकिन देवी के इस धाम के लिए बनाई गई मंदिर समिति के चुनाव में न तो महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं और न ही उन्हें वोट देने का अधिकार है। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि मंदिर समिति के संविधान में महिलाओं को मताधिकार नहीं दिए जाने का निर्णय हुआ था। इस नियम में संशोधन पर विचार मंदिर समिति की आम बैठक में ही हो सकेगा।
महिलाओं से संबंधित समस्याओं के 95 मामले आए
पिथौरागढ़। पुलिस की महिला हेल्पलाइन डेस्क महिलाओं की शिकायतों का शीघ्रता से समाधान करती है। प्रभारी एसआई रेनू ने बताया कि महिलाओं की समस्याओं के एक साल में 95 मामले आए। जिनका समाधान उच्च अधिकारियों के देखरेख में किया गया। शिकायत आने के दो माह के अंदर मामले का समाधान किया जाता है। पांच मामलों में एफआईआर दर्ज की गई, शेष काउंसलिंग के जरिये सुलझाए गए।
अभी भी महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया है। वे अपनी लड़ाई कभी अकेले लड़ती हैं तो कभी कोई संगठन उनके साथ खड़ा होकर उनकी लड़ाई लड़ता है। महिला दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब महिलाओं को बराबर समझा जाए। - तारा पांगती, सामाजिक कार्यकर्ता, पिथौरागढ़
07पीटीएच01पी-
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महिला दिवस हर रोज होना चाहिए ताकि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ना न पड़े। महिलाओं के अधिकारों के लिए सशक्त कानून बनाने की जरूरत है। राजनैतिक दलों को भी महिलाओं के हित के लिए एकजुट होना चाहिए। -
07पीटीएच02पी
महिलाओं की बेहतरी के लिए सरकार की ओर से दावे तो बहुत किए जाते हैं। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। महिलाओं को अपने हक और अधिकार पाने के लिए हर हमेशा ही जद्दोजहद करनी पड़ती है। - कविता गोस्वामी, सभासद।
फोटो 07 सीपीटी 07 पी।
महिलाएं आज भले ही पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। लेकिन कहीं न कहीं आज भी महिलाएं हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं। महिला दिवस में होने वाली गोष्ठियों में इस पर मंथन होना चाहिए। - चंचला अधिकारी, गृहिणी।
फोटो 07 सीपीटी 09 पी।
महिला उत्थान के लिए चलाए जा रहे हैं कई कार्यक्रम
लोहाघाट (चंपावत)। नगर पालिका परिषद लोहाघाट की ओर से महिला उत्थान के लिए कई कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। चेयरमैन गोविंद वर्मा बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार में आने वाली महिलाओं की दिक्कतों को देखते हुए स्टेशन बाजार, खेतीखान तिराहा, मीनाबाजार, डाकबंगला रोड में महिला शौंचालयों क निर्माण किया गया है। वहीं 15 महिला समूहों से महिलाओं की आजीविका बढ़ाने के लिए उन्हें फैंसी सजावटी सामान, सिलाई, स्वैटर बिनाई, खिलौने बनाने आदि का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। संवाद
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आरक्षित सीटों पर ही बैठने के लिए नहीं मिलता
चंपावत। रोडवेज की बसों में महिला सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। बसों में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होने के बाद भी कई लोग नजरअंदाज करते हुए उसमें सफर करते नजर आते हैं। ऐसे में कई बार मातृशक्ति को पूरा सफर खड़े-खड़े ही तय करना पड़ता है। पिथौरागढ़ में रोडवेज के एआरएम आरके आर्या ने बताया कि यदि कोई महिला आरक्षित सीट पर ही बैठना चाहती है तो उसे वो सीट उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं बसों में किसी भी सीट पर बैठ जाती हैं।
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पिथौरागढ़ को छोड़कर कहीं नहीं महिलाओं के लिए शौचालय व्यवस्था
पिथौरागढ़। सीमांत जिले की पांच लाख की आबादी में महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय की पिथौरागढ़ को छोड़कर कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। मुनस्यारी, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला पर्यटकों की पहली पसंद है। हर साल हजारों की संख्या में देश के साथ विदेश से महिला पर्यटक सैर सपाटे के लिए आते हैं। मगर इन स्थानों सुलभ शौचालय न होने से उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मुनस्यारी में सुलभ शौचालय का इस साल निर्माण किया गया, लेकिन उसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। थल, नाचनी, बुंगाछीना, गणाईगंगोली में भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। एक मात्र पिथौरागढ़ में सिर्फ केएमओयू स्टेशन और सिल्थाम के पास सुलभ शौचालय की व्यवस्था है।
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देवी के धाम में ‘देवियों’ को नहीं मताधिकार
चंपावत। पंचायती, निकाय, विधायकी या सांसदी के चुनाव में वोट देने से लेकर खुद मैदान में उतरने का भले ही महिलाओं को बराबर का हक हो लेकिन इस जिले की सबसे बड़ी आध्यात्मिक स्थली मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति के चुनाव में महिलाएं न खुद मैदान में उतर सकती है और न ही वोट दे सकती हैं।
मां पूर्णागिरि धाम में मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर करने और तीर्थयात्रियों को सुविधा देने के लिए उत्तराखंड बनने के बाद 2006 में मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति का गठन किया गया। इसमें चार पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष) के लिए चुनाव होते हैं। लेकिन देवी के इस धाम के लिए बनाई गई मंदिर समिति के चुनाव में न तो महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं और न ही उन्हें वोट देने का अधिकार है। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि मंदिर समिति के संविधान में महिलाओं को मताधिकार नहीं दिए जाने का निर्णय हुआ था। इस नियम में संशोधन पर विचार मंदिर समिति की आम बैठक में ही हो सकेगा।
महिलाओं से संबंधित समस्याओं के 95 मामले आए
पिथौरागढ़। पुलिस की महिला हेल्पलाइन डेस्क महिलाओं की शिकायतों का शीघ्रता से समाधान करती है। प्रभारी एसआई रेनू ने बताया कि महिलाओं की समस्याओं के एक साल में 95 मामले आए। जिनका समाधान उच्च अधिकारियों के देखरेख में किया गया। शिकायत आने के दो माह के अंदर मामले का समाधान किया जाता है। पांच मामलों में एफआईआर दर्ज की गई, शेष काउंसलिंग के जरिये सुलझाए गए।
अभी भी महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया है। वे अपनी लड़ाई कभी अकेले लड़ती हैं तो कभी कोई संगठन उनके साथ खड़ा होकर उनकी लड़ाई लड़ता है। महिला दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब महिलाओं को बराबर समझा जाए। - तारा पांगती, सामाजिक कार्यकर्ता, पिथौरागढ़
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महिला दिवस हर रोज होना चाहिए ताकि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ना न पड़े। महिलाओं के अधिकारों के लिए सशक्त कानून बनाने की जरूरत है। राजनैतिक दलों को भी महिलाओं के हित के लिए एकजुट होना चाहिए। -
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महिलाओं की बेहतरी के लिए सरकार की ओर से दावे तो बहुत किए जाते हैं। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। महिलाओं को अपने हक और अधिकार पाने के लिए हर हमेशा ही जद्दोजहद करनी पड़ती है। - कविता गोस्वामी, सभासद।
फोटो 07 सीपीटी 07 पी।
महिलाएं आज भले ही पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। लेकिन कहीं न कहीं आज भी महिलाएं हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं। महिला दिवस में होने वाली गोष्ठियों में इस पर मंथन होना चाहिए। - चंचला अधिकारी, गृहिणी।
फोटो 07 सीपीटी 09 पी।
महिला उत्थान के लिए चलाए जा रहे हैं कई कार्यक्रम
लोहाघाट (चंपावत)। नगर पालिका परिषद लोहाघाट की ओर से महिला उत्थान के लिए कई कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। चेयरमैन गोविंद वर्मा बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार में आने वाली महिलाओं की दिक्कतों को देखते हुए स्टेशन बाजार, खेतीखान तिराहा, मीनाबाजार, डाकबंगला रोड में महिला शौंचालयों क निर्माण किया गया है। वहीं 15 महिला समूहों से महिलाओं की आजीविका बढ़ाने के लिए उन्हें फैंसी सजावटी सामान, सिलाई, स्वैटर बिनाई, खिलौने बनाने आदि का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। संवाद