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ऐसा ही रहा तो कैसे आएंगे सैलानी
सतीश जोशी ‘सत्तू’/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 26 Sep 2015 10:30 PM IST
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जिले में पर्यटन प्रोत्साहन के नाम पर सरकार की ओर से दावे चाहे जो भी हों, लेकिन यहां अवस्थापना ढांचे की कमी पर्यटन विकास की राह का रोड़ा बन रही है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के डॉक बंगलों में बुनियादी सुविधाओं अभाव के चलते यहां पर्यटकों की आमद में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है।
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आलम ये है कि जिले में केएमवीएन के छह पर्यटक आवास गृह (टीआरसी) में से खेतीखान और सूखीढांग टीआरसी में ताले लटके हैं, तो टुन्नास (पूर्णागिरि) टीआरसी का संचालन ठेके में हो रहा है। किसी भी टीआरसी में जनरेटर तक की सुविधा नहीं है।
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दूसरी ओर एनएच की बदहाली भी पर्यटन विकास पर बट्टा लगा रही है। वर्ष 2014-15 में 88 हजार से अधिक सैलानी जिले में आए हैं, जिनमें से 87,799 भारतीय और 208 विदेशी सैलानी शामिल हैं, जबकि 2015-16 में मई तक 190 भारतीय और मात्र तीन विदेशी सैलानी जिले में पहुंचे हैं।
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जिला पर्यटन अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का मानना है कि जिले को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। नए पर्यटन स्थल तो विकसित नहीं किए जा सके, मगर पुराने स्थानों को ही बचा पाना कठिन हो रहा है।
पर्यटन सर्किट विकास योजना ठंडी
चंपावत जिले में साल 2008 में पर्यटन प्रोत्साहन के लिए पर्यटन सर्किट विकास योजना प्रस्तावित की गई थी, लेकिन इस योजना से एक भी रुपया अभी मंजूर नहीं हुआ है। पर्यटन विभाग के मुताबिक क्षेत्र को उभारने के लिए 22.39 करोड़ रुपये की पर्यटन सर्किट विकास योजना तैयार की गई थी। केंद्र पोषित इस योजना से बनबसा-टनकपुर-पूर्णागिरि-ब्यानधुरा, सूखीढांग-श्यामलाताल-सिन्याड़ी-अमोड़ी-चंपावत-मंच-मानेश्वर-अखिलतारिणी-पंचेश्वर एवं लोहाघाट-रामेश्वर-खेतीखान-देवीधुरा क्षेत्र में बुनियादी अवस्थापना का प्रस्ताव था, लेकिन ये कार्ययोजना अब तक केंद्र सरकार से स्वीकृति की बाट जोह रही है।
जिले में नामचीन पर्यटक स्थलों की भरमार
जिले में नामचीन पर्यटक स्थलों की भरमार है, जिसमें कुदरती श्यामलाताल झील और मायावती का अद्वैत आश्रम बंगाली सैलानियों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र हैं। इंसाफ का थान गोरलदेव मंदिर, चंद राजाओं का किला, एक हथिया नौला, पौराणिक महत्व का मानेश्वर मंदिर है तो दूसरी ओर मां पूर्णागिरि धाम न केवल सूबे के प्रमुख तीर्थस्थल में है, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था की भी रीढ़ है। मीठे रीठे के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध श्रीरीठासाहिब स्थित गुरुद्वारे ने इस इलाके को प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी नई पहचान दी है तो मां बाराही धाम देवीधुरा के बग्वाल पत्थर युद्ध ने देश-विदेश में चंपावत का नाम लोकप्रिय किया है।