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काश गरीब का पेट न होता और शरीर लोहे का होता...

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 11:12 PM IST
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I wish the poor had no stomach and the body was of iron ...
चंपावत में काव्य संग्रह अपना-अपना जीवन का विमोचन करते अतिथि और कवि। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच की ओर से रविवार को हुई काव्य गोष्ठी में मौजूदा हालात पर कवियों ने बेबाक राय रखी। इससे पूर्व मुख्य अतिथि ललित प्रसाद जोशी की मौजूदगी में हिमांशु जोशी के काव्य संग्रह-अपना-अपना जीवन- का विमोचन हुआ। काव्य संग्रह में युवा कवि जोशी ने जीवन के संघर्ष को कविता के रूप में उकेरा है।
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काव्य गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने-काश गरीब का पेट न होता और शरीर लोहे का होता... कविता के साथ हुआ। प्रवक्ता सामश्रवा आर्य ने-देख तेरे इंसान की हालत क्या हो गई भगवान, बबीता जोशी ने-अंधेरे की तासीर मिटा ही डालें..., डॉ. तिलकराज जोशी ने मेरे ख्वाबों में आने की..., हर्षित पांडेय ने-दुनिया से कुछ हटकर होता अच्छा है..., हिमांशु जोशी ने-वो साइकिल वो सैर सपाटा, चूरन सस्ता अच्छा था..., अजय रस्तोगी ने-तेज तूफानों की कितनी धार होगी क्या पता..., दिव्यांगी रस्तोगी ने-लाठी कहती बनो सहारा, डॉ. सतीश चंद्र पांडेय ने-मेरा भारत कमजोर नहीं, तू चाइन आंख दिखाना मत ... रचना पेश की।
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