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ऐसे में जड़ी बूटी कैसे बनेगी आय का बड़ा जरिया
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:11 PM IST
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चंपावत की नर्सरी में उगी जड़ी बूटी।
- फोटो : अमर उजाला
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जड़ी बूटी को उत्तराखंड की आमदनी का बड़ा माध्यम बनाने का सपना पाला जा रहा है। हर सरकार हर्बल हब बनाने के दावे भी कर रही है, लेकिन जड़ीबूटी विभाग में कर्मियों की भारी कमी है। भेषज विकास इकाई में दो-तिहाई पद रिक्त हैं। और तो और अभी तक विभागीय ढांचा तक नहीं बनाया जा सका है।
योग गुरु रामदेव द्वारा शुरू की गई अलख से प्रदेश में जड़ीबूटी की जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन सरकारी तौर पर हर्बल स्टेट की कल्पना को साकार नहीं किया जा सका है। दिसंबर 2006 में जड़ीबूटी भेषज विकास इकाई को सहकारिता विभाग से हटाकर उद्यान विभाग में शामिल किया गया है। पर इसके बाद भी ऐसा खास उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया गया, जिससे उत्तराखंड जड़ीबूटी प्रदेश तेजी से आगे बढ़े।
जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्य का कहना है कि भेषज विकास इकाई के पास सृजित पद 158 हैं लेकिन तैनाती महज 57 कर्मियों की है। भेषज विकास इकाई का काम पौधरोपण, समूह गठन, नर्सरी स्थापना, प्रचार-प्रसार व पंजीकरण कराना है। लेकिन चंपावत जिले में विभाग के पास एक अनुसेवक के अलावा महज एक जिला भेषज समन्वयक है। जिन्हें स्टाफ व संसाधन की भारी कमी के बीच तमाम जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है।
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जड़ीबूटी काश्तकारों का कहना है कि निचले स्तर पर जड़ीबूटी संवर्द्धन के लिए प्रशिक्षण से लेकर तकनीकी मदद की जरूरत है। ऐसे में प्रदेश में न जड़ीबूटी का विस्तार हो पा रहा है और नहीं लोगों को रोजगार मिल पा रहा है।
सात साल में दोगुना हो गया कृषि करण
संसाधनों की कमी के बावजूद चंपावत जिले में जड़ीबूटी का कृषिकरण तेजी से हो रहा है। भेषज जिला समन्वयक राकेश वर्मा का कहना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद विभाग का प्रदर्शन शानदार रहा है। जिले में इस वक्त करीब 1900 से अधिक काश्तकार 3900 नाली जमीन में जड़ीबूटी की खेती कर रहे हैं। ये संख्या 2010 के सापेक्ष दो गुने से अधिक है। तेजपात, रीठा, सतवार, आंवला, समेवा, सर्पगंधा, घुड़बच, तुलसी, किलमोड़ा, कड़ी पत्ता, कपूर कचरी का कृषि करण किया गया है।
हर ब्लाक में हो एडीओ की तैनाती
भेषज विकास इकाई के विभागीय पुनर्गठन को लेकर भेषज कर्मी लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उत्तराखंड भेषज कर्मचारी एसोसिएशन का कहना है कि पुनर्गठन के बाद जड़ीबूटी विकास एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाया जाए। हर जिले में भेषज से संबंधित तमाम विभागीय कार्य, प्रशिक्षण कार्य, कृषिकरण कार्य एवं विपणन कार्य करेगी। संगठन का कहना है कि जड़ीबूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने के लिए हर विकासखंड में सुपरवाइजर व एडीओ तथा तहसील में अतिरिक्त जिला भेषज विकास अधिकारी की तैनाती की जानी चाहिए।
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योग गुरु रामदेव द्वारा शुरू की गई अलख से प्रदेश में जड़ीबूटी की जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन सरकारी तौर पर हर्बल स्टेट की कल्पना को साकार नहीं किया जा सका है। दिसंबर 2006 में जड़ीबूटी भेषज विकास इकाई को सहकारिता विभाग से हटाकर उद्यान विभाग में शामिल किया गया है। पर इसके बाद भी ऐसा खास उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया गया, जिससे उत्तराखंड जड़ीबूटी प्रदेश तेजी से आगे बढ़े।
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जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्य का कहना है कि भेषज विकास इकाई के पास सृजित पद 158 हैं लेकिन तैनाती महज 57 कर्मियों की है। भेषज विकास इकाई का काम पौधरोपण, समूह गठन, नर्सरी स्थापना, प्रचार-प्रसार व पंजीकरण कराना है। लेकिन चंपावत जिले में विभाग के पास एक अनुसेवक के अलावा महज एक जिला भेषज समन्वयक है। जिन्हें स्टाफ व संसाधन की भारी कमी के बीच तमाम जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है।
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जड़ीबूटी काश्तकारों का कहना है कि निचले स्तर पर जड़ीबूटी संवर्द्धन के लिए प्रशिक्षण से लेकर तकनीकी मदद की जरूरत है। ऐसे में प्रदेश में न जड़ीबूटी का विस्तार हो पा रहा है और नहीं लोगों को रोजगार मिल पा रहा है।
सात साल में दोगुना हो गया कृषि करण
संसाधनों की कमी के बावजूद चंपावत जिले में जड़ीबूटी का कृषिकरण तेजी से हो रहा है। भेषज जिला समन्वयक राकेश वर्मा का कहना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद विभाग का प्रदर्शन शानदार रहा है। जिले में इस वक्त करीब 1900 से अधिक काश्तकार 3900 नाली जमीन में जड़ीबूटी की खेती कर रहे हैं। ये संख्या 2010 के सापेक्ष दो गुने से अधिक है। तेजपात, रीठा, सतवार, आंवला, समेवा, सर्पगंधा, घुड़बच, तुलसी, किलमोड़ा, कड़ी पत्ता, कपूर कचरी का कृषि करण किया गया है।
हर ब्लाक में हो एडीओ की तैनाती
भेषज विकास इकाई के विभागीय पुनर्गठन को लेकर भेषज कर्मी लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उत्तराखंड भेषज कर्मचारी एसोसिएशन का कहना है कि पुनर्गठन के बाद जड़ीबूटी विकास एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाया जाए। हर जिले में भेषज से संबंधित तमाम विभागीय कार्य, प्रशिक्षण कार्य, कृषिकरण कार्य एवं विपणन कार्य करेगी। संगठन का कहना है कि जड़ीबूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने के लिए हर विकासखंड में सुपरवाइजर व एडीओ तथा तहसील में अतिरिक्त जिला भेषज विकास अधिकारी की तैनाती की जानी चाहिए।