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बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ के दावे खोले
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धन की कमी के कारण वर्षों से अधूरा पड़ा राजकीय पॉलीटेक्निक का छात्रावास।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। सरकार की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे जोर शोर से दिए जा रहे हैं लेकिन बेटियों को बुनियादी सुविधाओं से ही वंचित रखा जा रहा है। इसका उदाहरण राजकीय पॉलीटेक्निक में नौ वर्ष से अटका महिला छात्रावास भवन है। इसका निर्माण कार्य बजट के अभाव में लटका हुआ है।
वर्ष 2008 में राजकीय पॉलीटेक्निक में दो मंजिला छात्रावास भवन निर्माण कार्य शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई पेयजल निगम ने छात्रावास भवन के दो मंजिले भवन का ढांचा तैयार कर दिया जिसमें एक करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी निर्माणाधीन भवन की पहली मंजिल में दरवाजे और खिड़कियां नहीं लगाई गई हैं जिससे तैयार हुआ छात्रावास भी खंडहर में तब्दील हो रहा है। इसके चलते छात्रावास जंगली जानवरों का अड्डा बना हुआ है। भवन के चारों ओर कंटीली झाड़ियां उग आई हैं। एक करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भी भवन छात्राओं के किसी काम नहीं आ पा रहा है।
ये होने हैं कार्य
लोहाघाट (चंपावत)। फिनिशिंग, सैनिटरी, ड्रेनेज, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, दरवाजे, शीशे, पुताई, विद्युत आदि कार्य होने शेष हैं। पूर्व में एक करोड़ रुपये छात्रावास के लिए स्वीकृत हुए थे जो भवन निर्माण में खर्च हो चुके हैं। शेष निर्माण कार्यों के लिए 36.10 लाख रुपये की जरूरत है। संवाद
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वर्ष 2008 में कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई पेयजल निगम ने महिला छात्रावास निर्माण कार्य शुरू किया था लेकिन अभी वह तैयार नहीं हुआ है। छात्रावास का निर्माण कार्य पूरा न होने से छात्राओं को बाहर किराये पर रहने को मजबूर होना पड़ता है। इससे उनके ऊपर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। छात्रावास का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने की लगातार मांग की जा रही है।
गोविंद बल्लभ, प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय पालीटेक्निक, लोहाघाट।
पेयजल निर्माण निगम की ओर से छात्रावास का निर्माण का कार्य किया गया है। लेकिन धन की कमी के चलते कार्य रुका हुआ है। इसके लिए कई बार निदेशालय श्रीनगर को 136.10 लाख रुपये का रिवाइज स्टीमेट बना कर भेजा गया है। जैसे ही धन की स्वीकृति मिल जाती है, भवन निर्माण कार्य पूरा कर हैंडओवर कर दिया जाएगा।
देवेश पंत, परियोजना प्रबंधक, निर्माण इकाई पेयजल निगम, लोहाघाट।
खाली पड़ा है 30 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास
लोहाघाट (चंपावत)। वर्तमान में राजकीय पॉलीटेक्निक में तीन छात्रावास हैं जिनमें से दो छात्राओं और एक छात्रों के लिए हैं। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में 30 छात्र और दूसरे 50 क्षमता वाले छात्रावास में पांच छात्राएं रह रही हैं। जबकि 30 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास खाली पड़ा है। संवाद
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वर्ष 2008 में राजकीय पॉलीटेक्निक में दो मंजिला छात्रावास भवन निर्माण कार्य शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई पेयजल निगम ने छात्रावास भवन के दो मंजिले भवन का ढांचा तैयार कर दिया जिसमें एक करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी निर्माणाधीन भवन की पहली मंजिल में दरवाजे और खिड़कियां नहीं लगाई गई हैं जिससे तैयार हुआ छात्रावास भी खंडहर में तब्दील हो रहा है। इसके चलते छात्रावास जंगली जानवरों का अड्डा बना हुआ है। भवन के चारों ओर कंटीली झाड़ियां उग आई हैं। एक करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भी भवन छात्राओं के किसी काम नहीं आ पा रहा है।
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ये होने हैं कार्य
लोहाघाट (चंपावत)। फिनिशिंग, सैनिटरी, ड्रेनेज, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, दरवाजे, शीशे, पुताई, विद्युत आदि कार्य होने शेष हैं। पूर्व में एक करोड़ रुपये छात्रावास के लिए स्वीकृत हुए थे जो भवन निर्माण में खर्च हो चुके हैं। शेष निर्माण कार्यों के लिए 36.10 लाख रुपये की जरूरत है। संवाद
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वर्ष 2008 में कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई पेयजल निगम ने महिला छात्रावास निर्माण कार्य शुरू किया था लेकिन अभी वह तैयार नहीं हुआ है। छात्रावास का निर्माण कार्य पूरा न होने से छात्राओं को बाहर किराये पर रहने को मजबूर होना पड़ता है। इससे उनके ऊपर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। छात्रावास का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने की लगातार मांग की जा रही है।
गोविंद बल्लभ, प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय पालीटेक्निक, लोहाघाट।
पेयजल निर्माण निगम की ओर से छात्रावास का निर्माण का कार्य किया गया है। लेकिन धन की कमी के चलते कार्य रुका हुआ है। इसके लिए कई बार निदेशालय श्रीनगर को 136.10 लाख रुपये का रिवाइज स्टीमेट बना कर भेजा गया है। जैसे ही धन की स्वीकृति मिल जाती है, भवन निर्माण कार्य पूरा कर हैंडओवर कर दिया जाएगा।
देवेश पंत, परियोजना प्रबंधक, निर्माण इकाई पेयजल निगम, लोहाघाट।
खाली पड़ा है 30 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास
लोहाघाट (चंपावत)। वर्तमान में राजकीय पॉलीटेक्निक में तीन छात्रावास हैं जिनमें से दो छात्राओं और एक छात्रों के लिए हैं। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में 30 छात्र और दूसरे 50 क्षमता वाले छात्रावास में पांच छात्राएं रह रही हैं। जबकि 30 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास खाली पड़ा है। संवाद