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सुनो सरकार! समाज कल्याण महकमे को सहारे की है दरकार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2020 10:27 PM IST
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Hey government Social welfare department needs support
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित लोहाघाट का डॉ. आंबेडकर छात्रावास। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना काल में समाज कल्याण विभाग के पास एक खास जिम्मा था। यह कि समाज के कमजोर वर्ग की पेंशन को अग्रिम तौर पर उन तक भेजने का। इस काम को विभाग ने बखूबी किया, लेकिन दिव्यांग, विधवा, बुजुर्ग, किसान सहित समाज के विभिन्न वर्गों को पेंशन भेजने वाले समाज कल्याण विभाग को खुद अपने कल्याण की फिक्र सता रही है। विभाग के पास सहायक अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी है। 13 में से नौ पद खाली हैं।
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25 हजार से अधिक पेंशनरों के अलावा कई योजनाओं का सीधा संचालन करने वाले समाज कल्याण विभाग के जिला कार्यालय में जिला समाज कल्याण अधिकारी के अलावा दो कनिष्ठ लिपिक और एक एडीओ है। चार ब्लॉक वाले जिले में लोहाघाट को छोड़ कहीं भी एडीओ नहीं है।
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विभाग की खाली कुर्सियां:
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सहायक लेखाकार, दो कनिष्ठ सहायक, तीन एडीओ और एक छात्रावास अधीक्षक।
आंबेडकर छात्रावास में भी अधीक्षक का पद खाली
लोहाघाट में एससी-एसटी वर्ग के लिए डॉ. बीआर आंबेडकर छात्रावास है। 50 छात्र-छात्राओं की क्षमता वाले छात्रावास के संचालन के लिए भी स्टाफ नहीं है। यहां तक कि छात्रावास के अधीक्षक का पद भी खाली है। यह अतिरिक्त जिम्मेदारी इकलौते एडीओ एमडी भट्ट के जिम्मे है।
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मुख्य रूप से इन योजनाओं का संचालन करता है विभाग
पेंशन : वृद्धावस्था पेंशन, विधवा, दिव्यांग, किसान, तीलू रौतेली, परित्यक्ता, बौना समाज को पेंशन।
अनुदान : राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान, विधवाओं को पुत्री की शादी, विधवा पुनर्विवाह, वृद्ध पुरोहितों को भरणपोषण अनुदान।
छात्रवृत्ति : अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति, दिव्यांग छात्रवृत्ति। अन्य योजनाएं : एससी उपयोजना, अत्याचार उत्पीड़न में आर्थिक सहायता, एससी के लिए आवास योजना, दिव्यांगों को कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र।

कोट
विभाग पेंशनों से लेकर तमाम योजनाओं का हर साल करीब 60 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में स्थानांतरित करता है, लेकिन उसके पास सहायक लेखाकार तक नहीं है। कर्मियों की कमी से रोजमर्रा के काम से विभागीय शिविरों तक में असर पड़ता है। विभागीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए देर तक काम करने की वजह से कई बार खुद ही अपने कक्ष का ताला खोलना-बंद करने की भी नौबत आती है। खाली पदों को भरने के लिए कई बार निदेशालय पत्र भेजे गए हैं।
- आरएस सामंत, जिला समाज कल्याण अधिकारी, चंपावत।
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