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आवासीय भवनों को अपने कब्जे में नहीं ले पाया स्वास्थ्य विभाग

Fri, 09 Jun 2017 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)। Updated Fri, 09 Jun 2017 10:50 PM IST
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Health department can not take residential buildings in its possession
सीएचसी लोहाघाट के आवासीय परिसर - फोटो : अमर उजाला
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट को पीपीपी मोड से हटे छह माह से अधिक समय हो गया है। स्वास्थ्य विभाग अभी तक बरेली की शील नर्सिंग होम से अस्पताल के आवासीय भवनों और उपकरणों को अपने कब्जे में नहीं ले पाया है। अस्पतालों में उपकरणों के अभाव के चलते जहां मरीजों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, वहीं आवासीय भवनों के विभाग को हस्तांतरित न होने अस्पताल के कर्मचारी किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं। 

अक्तूबर 2013 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट को पब्लिक-प्राइवेट पाटनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत संचालित करने के लिए बरेली के शील नर्सिंग होम को सौंपा गया था। लोगों द्वारा पीपीपी मोड का भारी विरोध किए जाने के बाद पिछले साल नवंबर माह में सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र को राज्य सरकार ने पीपीपी मोड से हटा दिया था। नवंबर 2016 से पुन: सीएचसी का संचालन सरकारी व्यवस्था में शुरू हो गया था। सीएचसी को  पीपीपी मोड से हटने के छह माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते अस्पताल के कुछ महत्वपूर्ण उपकरण और आवासीय कालोनी अभी भी शील नर्सिंग होम बरेली के स्वामित्व में हैं। अस्पताल की आवासीय कालोनी शील नर्सिंग होम के कब्जे में होने के कारण सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों को विभागीय आवासीय  कालोनी में कमरा नहीं मिल पा रहा है। पीपीपी मोड के समय से आवासीय कालोनी में रहने वाले लोग डेरा डाले हुए हैं।  
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वह इन  कमरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। अस्पताल के चीफ  फार्मेसिस्ट मनोज घिल्डियाल का कहना है कि वे पिछले चार माह से चिकित्सा अधीक्षक को अस्पताल के आवासीय भवन में कमरे की मांग कर रहे हैं। मगर कमरे खाली न होने की बात कही जा रही है।  मजबूरन अस्पताल से बाहर मंहगे दामों में किराया लेकर रहना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल की स्थायी स्टाफ  नर्स  रंजना चंद, रीना, संजय दताल,  बबीता भंडारी, हरीश कुमार, प्रमोद का कहना है कि उन्होंने भी कई बार चिकित्साधीक्षक को लिखित रूप में पत्र देकर आवासीय कमरे की मांग की जा चुकी है, लेकिन कमरा नहीं मिल पाया।
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स्वास्थ्य महानिदेशक ने अक्तूबर 2016 में पीपीपी मोड समाप्त होने से पूर्व सीएमओ को पीपीपी मोड को सौंपे उपकरणों और संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने के निर्देश दिए थे। लेकिन उनके निर्देशों को भी दरकिनार किया गया। बरेली की शील नर्सिंग होम ने न तो आवासीय कालोनी को स्वास्थ्य विभाग को सौंपा और न ही गायब हुए सामान एनालाइजर, तीन ऑक्सीजन कंसनटेटर, तीन इनवर्टर कई उपकरणों को जमा किया है। अस्पताल में उपकरणों की कमी से मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। 


26 आवासों में रह रहे हैं पीपीपी मोड के कर्मचारी 
सीएचसी परिसर में 41 आवासीय कक्ष हैं। जिनमें से 17 कमरें टाइप-2 के हैं, जो तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए, 15 टाइप-3 के कमरे हैं, जो चतुर्थ श्रेणी और नौ कमरे टाइप -4 के हैं, जो डाक्टरों के लिए बने हैं। अस्पताल के रिकार्ड में केवल 15 डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ  को ही कमरे आवंटित किए गए हैं।  26 कमरों में पीपीपी मोड के दौरान नियुक्त कर्मचारी रह रहे हैं। 


हस्तांतरण के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी
सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह का कहना है कि अस्पताल के पीपीपी मोड में जाने के बाद आवासीय कालोनी को भी पीपीपी मोड में दे दिया गया था। अस्पताल से पीपीपी मोड की व्यवस्था समाप्त होने के बाद अभी तक इसे सीएचसी को हस्तांतरित नहीं किया गया है। पीपीपी मोड द्वारा सीएचसी को हस्तांतरित करने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत स्वास्थ्य विभाग से इतर रह रहे लोगों को हटाया जाएगा।



अस्पताल के आवासीय भवनों और जमा नहीं किए गए उपकरणों को विभाग को हस्तांतरित करने के लिए कई बार शील नर्सिंग होम बरेली को नोटिस भेजा जा चुका है। शासन के निर्देशों के अनुसार शील नर्सिंग होम बरेली के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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