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प्रसूता की मौत, अधिक रक्तस्राव से घर में हुई मौत, नवजात सुरक्षित
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चंपावत विकासखंड के दूरस्थ डांडा ग्राम पंचायत के कठौती गांव की एक महिला की शिशु को जन्म देने के कुछ देर बाद ही मौत हो गई। मौत की वजह अधिक रक्तस्राव होना बताया गया है। नवजात शिशु की हालत ठीक है। ग्राम पंचायत में एएनएम केंद्र बंद होने से महिला को तुरंत मदद नहीं मिल पाई।
चंपावत से 67 किमी दूर डांडा ग्राम पंचायत का कठौती गांव सड़क से सात किलोमीटर दूर है। यहां मोबाइल नेटवर्किंग नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर एएनएम केंद्र जरूर है। कठौती गांव में सोमवार शाम को हयात सिंह की पत्नी ममता देवी (23) को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों के मुताबिक मंगलवार सुबह ममता ने घर मेें ही बच्ची को जन्म दिया।
दर्द और अधिक खून बहने से करीब एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई। ममता का करीब दो साल का एक बेटा है। एएनएम केंद्र में एएनएम के नहीं होने से महिला को मदद नहीं मिल सकी। 67 किमी दूर अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं हुआ। डांडा की एएनएम संतोष कंबोज का कहना है कि एएनएम केंद्र में प्रसव की सुविधा नहीं है। मौत की वजह अधिक खून बहना है। उन्होंने बताया कि ममता देवी को गर्भ के दौरान लगने वाला अंतिम टीका 20 अप्रैल को लगाया था। एएनएम दूसरे गांव में गई हुई थी।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
चंपावत। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता दिवान सिंह, प्रेम सिंह आदि का कहना है कि एएनएम केंद्र में बेहतर व्यवस्थाओं के अलावा सड़क की आवाज उठाते-उठाते हुए वे थक गए हैं। सुविधाओं की कमी के चलते प्रसूता को जान से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य विभाग यहां की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करता तो वे 15 अगस्त के बाद आंदोलन करेंगे।
प्रसूता की मौत का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद जांच कराई जाएगी। अगर स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मी की कमी की वजह से मौत की पुष्टि हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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चंपावत से 67 किमी दूर डांडा ग्राम पंचायत का कठौती गांव सड़क से सात किलोमीटर दूर है। यहां मोबाइल नेटवर्किंग नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर एएनएम केंद्र जरूर है। कठौती गांव में सोमवार शाम को हयात सिंह की पत्नी ममता देवी (23) को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों के मुताबिक मंगलवार सुबह ममता ने घर मेें ही बच्ची को जन्म दिया।
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दर्द और अधिक खून बहने से करीब एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई। ममता का करीब दो साल का एक बेटा है। एएनएम केंद्र में एएनएम के नहीं होने से महिला को मदद नहीं मिल सकी। 67 किमी दूर अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं हुआ। डांडा की एएनएम संतोष कंबोज का कहना है कि एएनएम केंद्र में प्रसव की सुविधा नहीं है। मौत की वजह अधिक खून बहना है। उन्होंने बताया कि ममता देवी को गर्भ के दौरान लगने वाला अंतिम टीका 20 अप्रैल को लगाया था। एएनएम दूसरे गांव में गई हुई थी।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
चंपावत। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता दिवान सिंह, प्रेम सिंह आदि का कहना है कि एएनएम केंद्र में बेहतर व्यवस्थाओं के अलावा सड़क की आवाज उठाते-उठाते हुए वे थक गए हैं। सुविधाओं की कमी के चलते प्रसूता को जान से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य विभाग यहां की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करता तो वे 15 अगस्त के बाद आंदोलन करेंगे।
प्रसूता की मौत का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद जांच कराई जाएगी। अगर स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मी की कमी की वजह से मौत की पुष्टि हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।