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पौष में लग रही फाल्गुन और चैत्र जैसी धूप
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चंपावत में बीते पांच दिनों से चटक धूप खिलने से हिमालय की वादियां दिखने लगी हैं।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज से लोग हैरत में हैं। बीते पांच दिनों से मौसम में काफी बदलाव आया है। दिन में चटक धूप खिलने से जहां लोगों को ठिठुराती ठंड से राहत मिल रही है, वहीं सुबह-शाम गिरने वाले पाले में भी कमी आई है। इसके ठीक उलट जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में कोहरे की ठंड ने आफत मचाई हुई है। पौष (जनवरी) में फाल्गुन और चैत्र (मार्च-अप्रैल) जैसी धूप खिलने से लोग हैरत में हैं। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य के लिए खतरे का संकेत है।
आठ जनवरी को हुई बारिश के बाद मौसम में हैरतअंगेज तब्दीली आई है। गत वर्ष जहां नौ जनवरी को जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हुई थी, वहीं इस साल अब तक एक बार भी हिमपात के आसार नहीं बने हैं। पिछले साल 12 जनवरी को चंपावत का न्यूनतम तापमान दो और अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस था। वहीं मंगलवार को न्यूनतम तापमान छह डिग्री और अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश जोशी के अनुसार जनवरी माह में पहाड़ों में तेज धूप खिलने से कृषि उपजों का फसल चक्र गड़बड़ा सकता है। लंबे समय से पर्याप्त बरसात नहीं होने के कारण जहां भूमिगत जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए है। इसका असर आने वाले समय में पेयजल संकट के रूप में सामने आ सकता है।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे बदलाव
चंपावत। उद्यान विशेषज्ञ भूपेंद्र प्रकाश जोशी के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में तापमान बढ़ता जा रहा है। इसका असर विभिन्न प्रजाति के फलों के उत्पादन पर भी पड़ रहा है। कई स्थानों में सेव, नाशपाती, आडू सहित अन्य फलों का उत्पादन चक्र बदल गया है। वर्तमान में चटख धूप खिलने और पाला कम गिरने से ठंड वाले स्थानों में फसलों की पैदावार अच्छी होगी।
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आठ जनवरी को हुई बारिश के बाद मौसम में हैरतअंगेज तब्दीली आई है। गत वर्ष जहां नौ जनवरी को जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हुई थी, वहीं इस साल अब तक एक बार भी हिमपात के आसार नहीं बने हैं। पिछले साल 12 जनवरी को चंपावत का न्यूनतम तापमान दो और अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस था। वहीं मंगलवार को न्यूनतम तापमान छह डिग्री और अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश जोशी के अनुसार जनवरी माह में पहाड़ों में तेज धूप खिलने से कृषि उपजों का फसल चक्र गड़बड़ा सकता है। लंबे समय से पर्याप्त बरसात नहीं होने के कारण जहां भूमिगत जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए है। इसका असर आने वाले समय में पेयजल संकट के रूप में सामने आ सकता है।
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ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे बदलाव
चंपावत। उद्यान विशेषज्ञ भूपेंद्र प्रकाश जोशी के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में तापमान बढ़ता जा रहा है। इसका असर विभिन्न प्रजाति के फलों के उत्पादन पर भी पड़ रहा है। कई स्थानों में सेव, नाशपाती, आडू सहित अन्य फलों का उत्पादन चक्र बदल गया है। वर्तमान में चटख धूप खिलने और पाला कम गिरने से ठंड वाले स्थानों में फसलों की पैदावार अच्छी होगी।
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