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ऐसे तो लग जाएगा अदरक की खेती पर ब्रेक
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 30 Apr 2017 11:24 PM IST
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विविध गुणों से भरपूर अदरक की खेती जिले में खूब होती है मगर अब इस खेती पर ग्रहण लग सकता है। ये हाल बीज की प्रजाति के चलते हो रहा है। उद्यान विभाग द्वारा वितरित बीज को काश्तकार नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ का ये बीज यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है।
अदरक की फसल जिले की प्रमुख नगदी फसल है। करीब 304 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की बुवाई होती है। पिछले साल 2200 कुंतल अदरक की पैदावार हुई। उद्यान विभाग द्वारा वक्त पर सस्ता बीज उपलब्ध कराने के बावजूद किसान बीज लेने से गुरेज कर रहे हैं। उद्यान विभाग की चंपावत सचल प्रभारी निधि जोशी रविवार को तल्लादेश के मंच क्षेत्र में बीज वितरण के लिए गई।
काश्तकारों ने छत्तीसगढ़ के अदरक के इस बीज को पहाड़ के लिए अनुपयुक्त बताते हुए लेने से इंकार कर दिया। काश्तकार महेश चंद्र, शंकर दत्त, स्वरूप राम, उमेश सिंह सहित ढेरों काश्तकारों का कहना है कि पिछले साल भी इसी प्रजाती का बीज आया था, जिससे पैदावार बेहद कम हुई थी।
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काश्तकार शेर सिंह बताते हैं कि कायदे में एक कुंतल बीज में दस कुंतल की पैदावार होनी चाहिए, लेकिन पिछली बार पांच कुंतल बीज बोने पर महज चार कुंतल ही पैदावार हुई। इसके चलते इस बार मंच क्षेत्र ही नहीं सूखीढांग, स्वांला, धौन, अमोड़ी आदि इलाकों में भी लोग बीज लेने से हिचक रहे हैं, जबकि ये बीज बाजार की कीमतों से करीब 50 प्रतिशत कम का है।
उद्यान विभाग द्वारा बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी के बाद 31 रुपये प्रति किलो की दर से काश्तकार को दिया जा रहा है। उद्यान विभाग की 164 कुंतल अदरक बीज की मांग के सापेक्ष फिलहाल 84.34 कुंतल बीज ही पहुंचा है, लेकिन इसकी बिक्री 25 प्रतिशत भी नहीं हो सकी है।
बीज की आपूर्ति का टेंडर निदेशालय स्तर से जारी हुआ। पूरे प्रदेश में यही बीज किसानों को दिया गया है। रियो दि जनेरो प्रजाति का बीज आम तौर पर पहाड़ की जलवायु के लिए मुफीद है। अगर पैदावार कम हो रही है, तो इसके लिए सिर्फ बीज ही नहीं मौसम चक्र में बदलाव, खेत की उर्वरा शक्ति में कमी सहित कई कारण हो सकते है। विभाग किसानों को अधिक उत्पादन के तरीके बताने के साथ बीज खरीद को प्रेरित करेगा।
एचसी तिवारी
जिला उद्यान अधिकारी
चंपावत।
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अदरक की फसल जिले की प्रमुख नगदी फसल है। करीब 304 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की बुवाई होती है। पिछले साल 2200 कुंतल अदरक की पैदावार हुई। उद्यान विभाग द्वारा वक्त पर सस्ता बीज उपलब्ध कराने के बावजूद किसान बीज लेने से गुरेज कर रहे हैं। उद्यान विभाग की चंपावत सचल प्रभारी निधि जोशी रविवार को तल्लादेश के मंच क्षेत्र में बीज वितरण के लिए गई।
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काश्तकारों ने छत्तीसगढ़ के अदरक के इस बीज को पहाड़ के लिए अनुपयुक्त बताते हुए लेने से इंकार कर दिया। काश्तकार महेश चंद्र, शंकर दत्त, स्वरूप राम, उमेश सिंह सहित ढेरों काश्तकारों का कहना है कि पिछले साल भी इसी प्रजाती का बीज आया था, जिससे पैदावार बेहद कम हुई थी।
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काश्तकार शेर सिंह बताते हैं कि कायदे में एक कुंतल बीज में दस कुंतल की पैदावार होनी चाहिए, लेकिन पिछली बार पांच कुंतल बीज बोने पर महज चार कुंतल ही पैदावार हुई। इसके चलते इस बार मंच क्षेत्र ही नहीं सूखीढांग, स्वांला, धौन, अमोड़ी आदि इलाकों में भी लोग बीज लेने से हिचक रहे हैं, जबकि ये बीज बाजार की कीमतों से करीब 50 प्रतिशत कम का है।
उद्यान विभाग द्वारा बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी के बाद 31 रुपये प्रति किलो की दर से काश्तकार को दिया जा रहा है। उद्यान विभाग की 164 कुंतल अदरक बीज की मांग के सापेक्ष फिलहाल 84.34 कुंतल बीज ही पहुंचा है, लेकिन इसकी बिक्री 25 प्रतिशत भी नहीं हो सकी है।
बीज की आपूर्ति का टेंडर निदेशालय स्तर से जारी हुआ। पूरे प्रदेश में यही बीज किसानों को दिया गया है। रियो दि जनेरो प्रजाति का बीज आम तौर पर पहाड़ की जलवायु के लिए मुफीद है। अगर पैदावार कम हो रही है, तो इसके लिए सिर्फ बीज ही नहीं मौसम चक्र में बदलाव, खेत की उर्वरा शक्ति में कमी सहित कई कारण हो सकते है। विभाग किसानों को अधिक उत्पादन के तरीके बताने के साथ बीज खरीद को प्रेरित करेगा।
एचसी तिवारी
जिला उद्यान अधिकारी
चंपावत।