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Champawat News: ब्यूटी पार्लर और सिलाई उद्यम से संवर गई गीता की जिंदगी
Sun, 13 Jul 2025 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 13 Jul 2025 11:18 PM IST
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गीता पंत, उद्यमी
चंपावत। लोहाघाट के सेलपेडू गांव निवासी गीता पंत ने ब्यूटी पार्लर और सिलाई उद्यम से आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई। पति की मौत के बाद उन्होंने खुल को संभाला और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ने के बाद एक नई इबारत लिख दी।
सामान्य गृहिणी गीता देवी की जिंदगी परिवार के साथ सादगी से बीत रही थी। सिर्फ 40 वर्ष की आयु में उनके पति का असमय निधन होने पर परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने हार मानने के बजाय ब्यूटी पार्लर और सिलाई कार्य शुरू किया। संसाधनों की कमी, अनुभव की चुनौती और ग्रामीण परिवेश में एक महिला का उद्यम शुरू करना संघर्ष से कम नहीं था।
एनआरएलएम की जानकारी मिलने पर उन्होंने प्रगति स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। ग्राम संगठन से 1.50 लाख ऋण प्राप्त किया। 50 हजार अपनी जमा पूंजी से जोड़कर कुल दो लाख रुपये से उद्यम को विस्तार दिया। निवेश कर उन्होंने अपने ब्यूटी पार्लर में नई मशीनें, कॉस्मेटिक उत्पाद, हेयर और स्किन केयर सामग्री शामिल की।
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अपनी सिलाई दुकान में लेडीज गारमेंट्स, फैब्रिक्स, ड्रेस मटीरियल और रेडीमेड कपड़ों का भी स्टॉक बढ़ाया। यह बदलाव उनके उद्यम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। मुश्किलों से जूझने के बाद वह अब हर माह 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं। आज वह गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
डीएम मनीष कुमार ने कहा कि एनआरएलएम योजन से जोड़कर हर एक गांव की महिला को आत्मनिर्भर बनाना है।
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सामान्य गृहिणी गीता देवी की जिंदगी परिवार के साथ सादगी से बीत रही थी। सिर्फ 40 वर्ष की आयु में उनके पति का असमय निधन होने पर परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने हार मानने के बजाय ब्यूटी पार्लर और सिलाई कार्य शुरू किया। संसाधनों की कमी, अनुभव की चुनौती और ग्रामीण परिवेश में एक महिला का उद्यम शुरू करना संघर्ष से कम नहीं था।
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एनआरएलएम की जानकारी मिलने पर उन्होंने प्रगति स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। ग्राम संगठन से 1.50 लाख ऋण प्राप्त किया। 50 हजार अपनी जमा पूंजी से जोड़कर कुल दो लाख रुपये से उद्यम को विस्तार दिया। निवेश कर उन्होंने अपने ब्यूटी पार्लर में नई मशीनें, कॉस्मेटिक उत्पाद, हेयर और स्किन केयर सामग्री शामिल की।
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अपनी सिलाई दुकान में लेडीज गारमेंट्स, फैब्रिक्स, ड्रेस मटीरियल और रेडीमेड कपड़ों का भी स्टॉक बढ़ाया। यह बदलाव उनके उद्यम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। मुश्किलों से जूझने के बाद वह अब हर माह 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं। आज वह गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
डीएम मनीष कुमार ने कहा कि एनआरएलएम योजन से जोड़कर हर एक गांव की महिला को आत्मनिर्भर बनाना है।